क्षितिज

क्षितिज की उस ओर….. शिखर का अंत……………….अथवा नभ का एक छोर।। यही खोज है………………….अथवा उद्देश्य जीवन का… सोचता रहा हूँ खड़ा इस ओर… विस्मय में हूँ कि मैं आरम्भ …

कब लेगा यह युद्ध विराम।

जंग छिड़ी है किन लोगों में, फूट पड़ी है किन लोगों में, मन में द्वेष की लपटें लेती, आग बड़ी है किन लोगों में, जो भड़की या भड़काई है …

।। माँ लक्ष्मी स्तुति।।

जय विष्णुप्रिया लक्ष्मी माता, जय सबकी सुख सम्पति दाता। सकल जगत से तुम हो पूजित, सब सदगुण तुमसे आता।। १ ।। सागर से उदभव हुआ तुम्हारा, जग में कहलाई …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

दोहे आई देखो दामिनी, चंदा लेकर साथ दिनकर भी मद्धिम पड़ा, अद्भुत है सौगात। नखत भी अब चमक रहा, जगमग है आकाश घूंघट के पट खोलकर, करता है अट्टहास। …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

दोहे आई देखो दामिनी, चंदा लेकर साथ दिनकर भी मद्धिम पड़ा, अद्भुत है सौगात। नखत भी अब चमक रहा, जगमग है आकाश घूंघट के पट खोलकर, करता है अट्टहास। …

।। निराश की आस।।

हे जगतपिता ! हे जगदीश्वर ! नित प्रति जपूँ तुम्हारा नाम। भक्ति मे मेरी शक्ति नहीं, किस विधि तुमको करूँ प्रणाम ।। 1 ।। बचपन बीता बचपना करते, अंजाने …

मुक्तक, दौहे और रचनाएं – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

मुक्तक जिसे हंसना था, तूने रुला दिया खुशियाँ दे न सके गम में सुला दिया। उजाड़ दी ज़िन्दगी भला चंगा था इक पल में अपना रिश्ता भुला दिया। नफ़रत …

विष्णुछंद – गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

धीरे-धीरे विष्णुपद छंद – 16+10 अंत 2 दौड़ेगा तो थक जायेगा, धीरे – धीरे चल चलना ही तो जीवन है यह, दीपों सा तू जल। ठोकर भी गर लगे …

सार छंद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

पत्थर पर भी दूभ उगेगा सार छंद – 16+१२ अंत 22 बहुत आगे बढ़ गई दुनिया, तुम देखो हम कितने तुम भी आगे बढ़ सकते हो, रोका तुमको किसने। …

डायरी

1 जितनी भी गुजरी बेमिसाल गुजरी तेरी पनाह में हर चीज बड़ी है मुस्कराते हुऐ पलटे मुक्कदर के पन्ने हमने ज़िन्दगी तेरी आँखों से पढी है 2 जिसपे दूजा …

सीख रहा हूँ – डी के निवातिया

सीख रहा हूँ *** कलम लिए झूल रहा हूँ, मैं लिखना भूल रहा हूँ, क्योकि, अब पढ़ना सीख रहा हूँ ! गीत ग़ज़ल कविता दोहे, कभी समझ आये मोहे, …

रूह का लिबास – डी के निवातिया

रूह का लिबास *** साँसों की गर्म हवा बर्फ सी जमने लगे, लबों से हर्फ़ जर्जर पेड़ से हिलने लगे, रूह ! तुम लिबास बदल लेना उस रोज़, जिस …

बेटियाँ सुरक्षित कैसे हों?

बेटियाँ सुरक्षित कैसे हों? विधा: परिचर्चा ये बात बहुत खेद की है भारत जैसे महान देश में जिसने पूरे विश्व को चरित्र का पाठ पढाया,बलात्कार जैसे पाप कृत्य होते …

मनभावण सावण आय गयो

दोहा सावण री झड़ लग रही, घटा चढ़ी घणघोर। भांग धतूरा घुट रिया, चिलमां चढ़गी जोर।१। सावण मनभावण हुयो, खूब सजै दरबार। शिवजी रो महिनो बड़ो, हो री जै …

फ़लसफां

इक नहीं आप ही तनहा ये ग़म उठाते हैं कितने परवाने हैं जो इसमें जले जाते हैं रस्म-ए-उल्फ़त की निभाना नहीं आसां इतना उम्र हम अहद-ए-वफ़ा पर गुज़ारे जाते …

शालिनी छन्द (“राम स्तवन”)

शालिनी छन्द (“राम स्तवन”) हाथों में वे, घोर कोदण्ड धारे। लंका जा के, दैत्य दुर्दांत मारे।। सीता माता, मान के साथ लाये। ऐसे न्यारे, रामचन्द्रा सुहाये।। मर्यादा के, आप …

शार्दूलविक्रीडित छंद “हिन्दी यशोगान”

शार्दूलविक्रीडित छंद “हिन्दी यशोगान” हिन्दी भारत देश के गगन में, राकेश सी राजती। भाषा संस्कृत दिव्य हस्त इस पे, राखे सदा साजती।। सारे प्रांत रखे कई विविधता, देती उन्हे एकता। हिन्दी से पहचान है जगत में, देवें इसे भव्यता।। …

शिखरिणी छंद (“भारत वंदन”)

शिखरिणी छंद (“भारत वंदन”) बड़ा ही प्यारा है, जगत भर में भारत मुझे। सदा शोभा गाऊँ, पर हृदय की प्यास न बुझे।। तुम्हारे गीतों को, मधुर सुर में गा …

स्रग्धरा छंद “शिव स्तुति”

स्रग्धरा छंद “शिव स्तुति” शम्भो कैलाशवासी, सकल दुखित की, पूर्ण आशा करें वे। भूतों के नाथ न्यारे, भव-भय-दुख को, शीघ्र सारा हरें वे।। बाघों की चर्म धारें, कर महँ …

हरिणी छंद “राधेकृष्णा नाम-रस”

हरिणी छंद “राधेकृष्णा नाम-रस” मन नित भजो, राधेकृष्णा, यही बस सार है। इन रस भरे, नामों का तो, महत्त्व अपार है।। चिर युगल ये, जोड़ी न्यारी, त्रिलोक लुभावनी। भगत …

इच्छा ये तुम्हारी है

इच्छा ये तुम्हारी है देखो सब उजड़ते हुए फूल पत्ते पेड़ झड़ते हुए या नए पुष्प खिलते हुए उनपर भौंरे उड़ते हुए इच्छा ये तुम्हारी है ॥ १ ॥ …