Category: अज्ञात कवि

काश मेरे पास भी कोई कबूतर होता।

काश मेरे पास भी कोई कबूतर होता, जो मेरी बातों को अपने पंखों पर ढोता, बिन कहे समझता कहाँ जाना है । कागज पर लगी स्याही को अपने गुटर …

हुकूमत

हुकूमत ने रिआया पर गजब एह्सान कर डाला बनाने मंदिर निकले थे शहर शमसान कर डाला बढे थे दाम बिजली के शहर मे रौशनी कम थी चिताओ को जलाकर …

आने जाने वाले ( दिल्ली से जाने। वाले)

मैं लिखती हूँ कविता उन आने जाने वालों पर, जो टिक न सके इन बेहकती निगाहों पर, मैं लिखती हूँ कविता उन आने जाने वालों पर। बहकती थी मैं, …

रविवार

सुबह आया शाम भी.आया, जिन्दगी के हर पहलू को तेरे संग है बिताया, सोमवार भी बिताया शनिवार भी बिताया, पर तेरे संग मेरा रविवार नहीं आया । सडक भी …

न वक्त से हुआ, न गुलजार से हुआ, कलाम तो दुखी जाहान से हुआ, तडप के रह गये खुले परिन्दे के ताराजू खुदा भी उनका गुलाम जो हुआ । …