Category: अज्ञात कवि

“मैं निशा हूं”

मैं निशा हूं सोचा कि आज कह ही दूं सबकुछ। निर्दोष हूं, अकेली हूं, प्यारी भी हूं सचमुच। मेरी तन्हाई को सिर्फ वहीं समझ सकता है- जिसने आविरक्त प्रेम …

हिंदी गीत- PT. BABU RAM SHARMA

अमर भारती वसुन्धरा की शान हमारी हिन्दी है |देश धर्म शासन सत्ता की जान हमारी हिन्दी है ||प्रलयंकर शंकर डमरू से निकली भाषा हिन्दी है|अमर शहीदों के साहस की …

बेहतर है…..

धारा 370 के ऐतिहासिक निर्णय पर ,लद्धाख के प्रतिनिधि के भाषण के विचारों मे बांधने का प्रयत्न किया है, उस अनजान कोलाहल से, परिचत सन्नाटा बेहतर है। गीदड़ की …

किसान की व्यथा

समस्या एक है बहुत ही उत्कट,आज भी हिन्दुस्तान कीआवाज नहीं है कोई सुनता,लाचारगरीबकिसान कीसमस्या एक है …. काम कोई पड़ जाए तो फिर, दौड़े आफिस आफिससाहब साहब कहता भागे, …

किसान की व्यथा

किसान की व्यथा समस्या एक है बहुत ही उत्कट,आज भी हिन्दुस्तान कीआवाज नहीं है कोई सुनता,लाचारगरीबकिसान कीसमस्या एक है …. काम कोई पड़ जाए तो फिर, दौड़े आफिस आफिससाहब …

Plastic Se Azadi

प्लास्टिक से आजादी स्वरचित-नीरज कुमार सिंह, लखनऊप्लास्टिक बोतल है,नषा है, बैग हैजानलेवा बीमारी है,अफीम की तरह।प्लास्टिक की बाढबाजार में आयी हैनर-नारी, जानवरसब पर वह भारी है।।प्लास्टिक ज्वालामुखी है,उसके धंुए …

माँ

माँमाँ शब्द नहीं संसार है, अमिट अमिय की धार है माँ होती ऐसी क्षीरसागर, जिसमें ममता प्यार दुलार हैमाँ शब्द नहीं ……. माँ जन्मदात्री अधिष्ठात्री, सुखमय सुखदात्री माँ ही …

कैंसर वाला बच्चा बड़ा हो रहा है।

कैंसर वाला बच्चा बड़ा हो रहा हैलड़खड़ाते हैं पाँव उसके…. फिर भी!वो अपने कमजोर पाँव पे, खड़ा हो रहा है।कैंसर वाला बच्चा बड़ा हो रहा है। मालूम है उसको… …

निहारिका

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है रात घनी , अँधेरा बड़ा

है रात घनी अँधेरा बड़ाबीच मजधार मुसाफिर खड़ाये लगे थपेड़े आंधी केदेख सामने है तूफ़ान बड़ाहै रात घनी अँधेरा बड़ाथा चला जीतने इंद्रधनुषथी पानी फ़तेह इन लहरों परतूफानों ने …

मेरे युग का मुहावरा है फ़र्क नहीं पड़ता

मेरे युग का मुहावराहै फ़र्क नहीं पड़तामैं जागा हूँ या सोयापाया हूँ या खोयाक्या लिया क्या दियाअपना लबादा फाड़ केअपने से सीयाचल रहा पर टूटतीनहीं जड़तामेरे युग का मुहावराहै …

एक चिथडा सुख

एक चिथडा सुखएक चिथडा सुखलिपटा आशा के बिछावन मेंरखा आवश्यकताओ के चंवर मेंघिरा संभावनाओ के भंवर मेंअब अभावों के गंदे सीवर मेवो एक चिथडा सुख कहींअटक गया है.$$सूत्र कहते …

क्या करोगी तुम, मेरी ज़िन्दगी में आके ?

क्या करोगे तुम, मेरी मह्फ़िल में आकेहम तो तनहा ही थे, जब से तुम छोड़ गए!मरा नहीं जीता रहा, उन चंद लम्हों को याद करकेजो तुम मेरे नाम कर …