Category: अज्ञात कवि

कौने खेतवा मां अनजवा उगहिहो

जब तुम अयिहो तब का खाइहो कौने खेतवा मां अनजवा उगहिहो सब तो बनाए डारेऊ पक्की जमीनिया नाय राखेओ कौनो कच्ची मिनिया अभहीन के तुम फायदा देखेओ जमींवा से …

मोबाइल से नजरें हटाया करोगे।

मोहल्ले में जब तुम आया करोगे किसी नुक्कड़ पर दोपहरी बिताया करोगे नजरों से नजरें जब मिलाया करोगे नए फैशन के दौर भी को आजमाया करोगे चार लडको के …

बोलती मूरत का करिश्मा दिखाएंगे ।

हज़ारो बातें दफना कर आज पर जिन्दगी की चादर पहना कर चलो काटते हैं वो सफ़र तैखने मे रखेंगे तेरी भी ख़बर बोलती मूरत का करिश्मा हम दिखाएंगे दुनियां …

पंहुचा घर का।

दिल्ली से चले हम गांव अपन घर अपने पांव। जब देखेन हम नोएडा चलत गाएन रोड़ा आय रोड़ा अमेठी राहेंय बहुताए मीठी, लाग गाए झोरा मां बहुताये चींटी पेड़ा …

बुढ़ापे का साथ।

बाबा लाए झाबा भरके, हम जागेन भोरे तड़के देखीन जैसे बाबा आए, बाबइन धीरे से मुस्कियाए, लड़वाए भागे आगे पाछे दाढ़ी उनकी लड़कवाए खाचे, बाबइन भीतर से शरबत लइके …

जिंदगी के कैमरे से दूर हूं मैं।

जिंदगी के कमरे से दूर हूं मैं अकेली पर सबसे महफूज हूं मैं न रहेंगी निगाहें मुझ पर किसी की न दुनिया मुझे लगाएगी दुःखी सी। लोग कहते है …

सिसकियों सी थी वो रातें।

सिसकियों सी थी वो रातें याद आई थी बहुत सी बातें, ओझल होती तस्वीरें सारी, बढ़ती दूरियां रही थी जारी, जब बेवजह बन गईं मुलाकातें। सिसकियों सी थी वो …

कुंडलियां – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

कोरोना के काल में, बिखर गया व्यापारजीना संभव है नहीं, पड़े हुए लाचार।पड़े हुए लाचार, कहाँ अब हम जाएंबेगम बच्चों के साथ, बोल क्या हम खाएं।हालत ऐसी देख, सभी …

मुसाफिर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

जिंनगी मोह माया के जाल में फँसलचल चल मेरे मुसाफिर तूं बाहर निकल। आए हम अकेले माता की गोद मेंखाए और खेले माता की गोद में।ये बचपन जवानी उन्हीं …