Category: अज्ञात कवि

।। मानव जीवन का लक्ष्य।।

जीवन प्राप्ति का उद्देश्य है क्या, किस पथ पे इसे ले जाना है, यह होता एक प्रबल मंथन, किस प्रकार इसे पार लगाना है ।। 1 ।। किस हेतु …

नारी -BHAWANA KUMARI

जाऊँ मैं जिस भी क्षेत्र में अव्वल आ कर दिखलाऊँगी। तुमसे बिलकुल अलग हूँ मैं कुछ कर इस दुनिया से जाऊँगी। नहीं चाहिए तेरा नाम मुझे मैं खुद के …

।। जय माँ जगजननी।।

जगजननी माँ संकटहारिणी,दुःखविनाशिनि तुम्हें प्रणाम। ऐसी दया करो हे माता, प्रतिपल जपूँ तुम्हारा नाम ।। 1 ।। संकटहरिणी, कष्टनिवारिणि, जगजननी माँ जग की माता। तुम्हारी ही दया से माता, …

बेटी

मेरे इस हथेली में समा जाती थी, पोपले मुंह से मुस्कराकर मेरा हर ग़म,हर थकन मिटा देती थी । एक दिन नन्हें हाथो और नन्हें पैरों से इस हथेली …

।। जीवन का सार ll

जीवन मे क्या खोया क्या पाया, समझ चौथेपन में आता है। उपलब्धियों अनुप्लाधियों का लेखा जोखा, नजरों के सामने आता है ।।1।। उपलधियों के उजले पक्ष से, यदि मानव …

चन्दा मामा(बाल कविता )- Bhawana Kumari

चन्दा मामा छत पर आना अपने संग चाँदनी लाना। जम कर दूध मलाई खाना बादल में जा कर छुप जाना। चंदा मामा छत पर आना साथ हमारे दौड़ लगाना …

।। जय पवन कुमार ।।

जय अंजनि कुमार पवन सुत दुःख भंजन है नाम तुम्हारा। दीन दुःखी असहायों को केवल एक तुम्हारा सहारा।। 1 ।। जो जन भजते तुमको राम कृपा होती स्वत: प्राप्त। …

।। माँ लक्ष्मी स्तुति।।

जय विष्णुप्रिया लक्ष्मी माता, जय सबकी सुख सम्पति दाता। सकल जगत से तुम हो पूजित, सब सदगुण तुमसे आता।। १ ।। सागर से उदभव हुआ तुम्हारा, जग में कहलाई …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

दोहे आई देखो दामिनी, चंदा लेकर साथ दिनकर भी मद्धिम पड़ा, अद्भुत है सौगात। नखत भी अब चमक रहा, जगमग है आकाश घूंघट के पट खोलकर, करता है अट्टहास। …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

दोहे आई देखो दामिनी, चंदा लेकर साथ दिनकर भी मद्धिम पड़ा, अद्भुत है सौगात। नखत भी अब चमक रहा, जगमग है आकाश घूंघट के पट खोलकर, करता है अट्टहास। …

।। निराश की आस।।

हे जगतपिता ! हे जगदीश्वर ! नित प्रति जपूँ तुम्हारा नाम। भक्ति मे मेरी शक्ति नहीं, किस विधि तुमको करूँ प्रणाम ।। 1 ।। बचपन बीता बचपना करते, अंजाने …

मुक्तक, दौहे और रचनाएं – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

मुक्तक जिसे हंसना था, तूने रुला दिया खुशियाँ दे न सके गम में सुला दिया। उजाड़ दी ज़िन्दगी भला चंगा था इक पल में अपना रिश्ता भुला दिया। नफ़रत …

विष्णुछंद – गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

धीरे-धीरे विष्णुपद छंद – 16+10 अंत 2 दौड़ेगा तो थक जायेगा, धीरे – धीरे चल चलना ही तो जीवन है यह, दीपों सा तू जल। ठोकर भी गर लगे …