Category: सलीम रजा

हर एक ज़ुल्म गुनाह-ओ- ख़ता से डरते हैं- सलीम रज़ा

हर एक ज़ुल्म गुनाह-ओ- ख़ता से डरते हैंजिन्हे है ख़ौफ़-ए-ख़ुदा वो ख़ुदा से डरते हैंन मुश्किलों से न जौर-ओ-जफ़ा से डरते हैग़म-ए-हयात की काली घटा से डरते हैंकिसी ग़रीब …

बुलन्दी मेरे जज़्बे की – salimrazarewa

बुलन्दी मेरे जज़्बे की ये देखेगा ज़माना भीफ़लक के सहन में होगा मेरा इक आशियाना भीअकेले इन बहारों का नहीं लुत्फ़-ओ-करम साहिबकरम फ़रमाँ है मुझ पर कुछ मिजाज़-ए-आशिक़ाना भीजहाँ …

जहां में तेरी मिसालों से रौशनी – सलीम रज़ा

जहां में तेरी मिसालों से रौशनी फैलेकि जैसे चाँद सितारों से रौशनी फैलेतुम्हारे इल्म की खुश्बू से ये जहाँ महकेतुम्हारे रुख़ के चराग़ों से रौशनी फैलेक़दम क़दम पे उजालों …

राह पर सदाक़त की गर – सलीम रज़ा

साथ तुम नहीं होते कुछ मज़ा नहीं होतामेरे घर में खुशियों का सिलसिला नहीं होताराह पर सदाक़त की गर चला नहीं होतासच हमेशा कहने का हौसला नहीं होताकोशिशों से …

जिसे मुश्किल में जीने का -सलीम रज़ा

जिसे मुश्किल में जीने का हुनर पर्फेक्ट होता हैमसाइब के अंधेरों से वही रिफ्लेक्ट होता हैवही क़ानून को हाथो की कठपुतली समझते हैंकनेक्शन जिनका ऊंचे लोंगों से डारेक्ट होता …

जिधर देखो उधर मेहनत -सलीम रज़ा

जिधर देखो उधर मेहनत कशों की ऐसी हालत हैग़रीबों की जमाअत पर अमीरों की हुक़ूमत हैग़रीबों के घरों में रहबरों देखो कभी जा करवहां ख़ुशियां नहीं हैं सिर्फ़ फ़ाक़ा …

रंगीन-ए-जमाल में डूबी -सलीम रज़ा

रंगीन-ए-जमाल में डूबी हुई मिलेयानी मेरे सुख़न को नई रोशनी मिलेवो चांदनी जो आबरू है आसमान कीऐसा न हो ज़मीन पे घायल पड़ी मिलेकल की मुझे उमीद नहीं है …

कहीं पर चीख़ होगींऔर कहीं #salimraza

कहीं पर चीख़ होगीं और कहीं किलकारियाँ होंगींअगर हाकिम के आगे भूक और लाचारियाँ होंगींअगर हर दिल में चाहत हो शराफ़त हो सदाक़त होमहब्बत का चमन होगा ख़ुशी की …

अपने हसीन रुख़ से हटा कर नक़ाब को- #salimrazarewa

अपने हसीन रुख़ से हटा कर नक़ाब कोशर्मिन्दा कर रहा है कोई माहताब कोउनकी निगाहे नाज़ ने मदहोश कर दियामैं ने छुआ नहीं है क़सम से शराब कोदिल चाहता …

मेरा हमदम है तो – सलीम रज़ा

मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आएमुश्किलों में भी मेरा साथ निभाने आएचाँद तारे भी यहाँ बन के दिवाने आएउनकी खुश्बू के समन्दर में नहाने आएरश्क करते …

इश्क़ तुमसे किया नहीं होता- salim raza

इश्क़ तुमसे किया नहीं होताज़िन्दगी में मज़ा नहीं होताज़िन्दगी तो संवर गयी होतीतू जो मुझसे जुदा नहीं होतातेरी चाहत ने कर दिया पागलप्यार इतना किया नहीं होताचोट खाएँ भी …

दूर जितना ही मुझसे जाएंगें-सलीम रज़ा

दूर जितना ही मुझसे जाएंगेमुझको उतना क़रीब पाएँगेफिर से खुशिओं के अब्र छाएंगेडूबते तारे झिल मिलाएंगेकुछ न होगा तो आंख नम होगींदोस्त बिछड़े जो याद आएंगेमाना पतझड में हम …

मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ – सलीम रज़ा

मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता हैजो यक ब यक ही मुझसे तू हो गया ख़फ़ा हैटूटी हुई हैं शाख़ें मुरझा गई हैं कलियाँतेरे बग़ैर दिल का गुलशन …

शाम-ए-रंगीं गुलबदन गुलफा़म है- सलीम रज़ा

__________________________शाम-ए-रंगीं गुलबदन गुलफा़म हैमिल गए तुम जाम का क्या काम हैजिससे रोशन मेरी सुब्ह-ओ-शाम हैमेरे होटों पे फक़त वो नाम हैमेरा घर खुशिओं से है आरास्तामेरे रब का ये …

पहले ग़लती तो बता दे मुझको- SALIMRAZA REWA

पहले ग़लती तो बता दे मुझकोफिर जो चाहे वो सज़ा दे मुझकोसारी दुनिया से अलग हो जाऊँख़ाब इतने न दिखा दे मुझकोहो के मजबूर ग़म-ए-दौरां सेये भी मुमकिन है …

उसे ख़्यालों में रखता हूँ – सलीम रजा

उसे ख़्यालों में रखता हूँ शायरी की तरहमुझे वो जान से प्यारी है ज़िंदगी की तरहतमाम उम्र समझता रहा जिन्हे अपनागया जो वक़्त गए वो भी अज़नबी की तरहमहक …

गॉड ख़ुदा भगवान कहो या ईश्वर अल्लाह – सलीम रज़ा

सुख उसका है दुख उसका है तो काहे का रोना हैदौलत उसकी शोहरत उसकी क्या पाना क्या खोना हैचाँद-सितारे उससे रौशन फूल में उससे खुशबू हैज़र्रे-ज़र्रे में वो शामिल …

पांच शे’र – सलीम ‘रज़ा’ रीवा

आईना देख के वो मुस्कुरा के कहते हैंऐसी सूरत भी भला तुमने कहीं देखी है-मेरी तस्वीर में चेहरा बहुत पुराना हैअब जो देखोगे तो पहचानना मुश्किल होगा-आज भी उनकी …

सलीम रज़ा रीवा की 101 ग़ज़लें – gazal’s of salimraza rewa

#salimrazarewa #salim-raza-rewa #qita #muktak #behtreen #shayri #sher #gazal #urdushayri_________________________ Nov-19रुख़ से जो मेरे यार ने पर्दा हटा दियामहफ़िल में हुस्न वालों को पागल बना दियाउसके हर एक अदा पे …

शाम आना है सुब्ह जाना है – GAZAL SALIM RAZA REWA

शाम आना है सुब्ह जाना हैदिल सितारों से क्या लगाना हैooदिल ये कहता है तुम चले आओआज मौसम बड़ा सुहाना हैooप्यार उल्फत वफ़ा मुहब्बत सबये तो जीने का इक …

गर तू नज़रों से पिला जम के पिएँगे साक़ी-SALIMRAZA REWA

गर तू नज़रों से पिला जम के पिएँगे साक़ी रहने देंगे नहीं प्याले में कोई मय बाक़ी -जाम पे जाम चले सुब्ह से शाम चले तेरा भी नाम चले …

अन-गिनत फूल मोहब्बत के चढ़ाता जाऊँ-सलीम रज़ा रीवा

अन-गिनत फूल मोहब्बत के चढ़ाता जाऊँ आख़िरी बार गले तुझ को लगाता जाऊँ oo जाने इस शहर में फिर लौट के कब आऊँगा पर ये वादा है तुझे भूल …

ग़मों की लज़्ज़त चुराके लेजा – सलीम रज़ा रीवा

.Nov18ग़मों की लज़्ज़त चुराके लेजा मेरी मसर्रत चुराके लेजाया ज़ौक़-ए-उल्फ़त चुराके लेजा या दिल की हसरत चुराके लेजाooक़दम क़दम पर उजाला बन कर ये साथ देंगी तेरा हमेशामेरी सख़ावत …

चंद खुशिओं का भी ख़ज़ाना है- SALIM RAZA REWA

शाम आना है सुब्ह जाना हैदिल सितारों से क्या लगाना हैooदिल ये कहता है तुम चले आओआज मौसम बड़ा सुहाना हैooप्यार,उल्फ़त,वफ़ा,मुहब्बत, सबये तो जीने का इक बहाना हैooसच कहाँ …