Category: किरन कपूर गुलाटी

नहीं तो जाने क्या होगा किरण कपूर गुलाटी

नहीं तो जाने क्या होगा। kiran kapur gulati किरन कपूर गुलाटी पहचानें इक दूजे को हम, ऐसे होने इंसान चाहिए . मैं मेरे से उठ जाएँ ऊपर, कुछ ऐसे …

नहीं कायर। निर्भीक बनो

नहीं कायर निर्भीक बनो सहन शीलता इंक वरदान सही पर हम इतने भी नादान नहीं दया धर्म सब ठीक है पाठ सहिष्णुता का भी ठीक है पर होता है …

नन्हीं। बूँदें किरण कपूर गुलाटी

बरस रही बूँदें छम छम छाए बदरा कारे कारे पिया मिलन को जाए बिजुरिया धरती बैठी माँग सँवारे बोले पपीहा महके तन मन चटखें कलियाँ बेला की कोमल चलें …

है बुलबुला रंगों का

है इक बुलबुला यह ज़िन्दगी तरह २ के रंग भी हैं शामिल फूला रहता है बड़े गुमानों में यह बसी रहती है इसमें पूरी कायनात अपनी ही दुनिया में …

सब याद है ज़रा ज़रा

सब याद है ज़रा ज़रा चाँदनी रातों का बीती बातों का महकती हवाओं का चहकती फ़िज़ाओं का भूली बिसरी यादों काकुछ कही अनकही बातों कासब याद है ज़रा ज़रा …

छोड़ देता है

छोड़ देता है हो सफ़र सुहाना खिलखिलाना भाता है बहुत टूट जाना खा़बों का हौंसले तोड़ देता है मंज़िलों को पा जाना न मुमकिन तो नहीं रासता मुश्किल हो …

प्रश्न चिन्ह

प्रश्न चिन्ह क्या ,क्यूँ ,कब ,कैसे इन्हीं शब्दों में सिमट जाती है ज़िन्दगी जवाब इनके मिलते नहीं कट जाती है ज़िन्दगी रिश्ते निभाने में बँट जाती है ज़िन्दगी देह …

चली जा रही हूँ

सावन की रातों में झडी़ जम के बरसती फूलों और पत्तों से अठखेलियाँ सी करती अजब हैं नजा़रे गरमीयों के मौसम में कभी आग बरसती कड़ाके की सर्दी में …

तू देख मेरे हुनर को देख

तू देख मेरे हुनर को देख देख ज़िन्दगी को मेरी नज़र से देखबिखरे हैं रंग कैसे२ रंगीनीयोँ को देखनहीं कमी कुछ भी कहीं जा के आते नज़ारों को देख …

जवाब नहीं होता

कई बार कुछ बातों काजवाब नहीं होताउठते हैं जब तूफ़ाँ आँधियोँ का हिसाब नहीं होताबढ़ जाती हैं कभी बेचैनियाँ तो प्रभु शरण बिना,रास्ता कोई और नहीं होता जाना इस …

अरमान मचलते रहते हैं

मन का चलन कुछ है ऐसा कि अरमान मचलते रहते हैं पा जाने को दुनिया सारीदिन रात में ढलते रहते हैं नील गगन में उड़ते बादल छमछम बरसते रहते …

उडा़नो को हम ढूँढते हैं

न जाने ज़िन्दगी में हम क्या ढूँढते हैं बहारों का हर पल पता ढूँढते हैं कैसी अजब कश्मकश है यह पर नहीं हैं लेकिन,उड़ानों को ढूँढते हैं नहीं चलता …

रंग लो कान्हा अपने रंग में

रंग लो कान्हा अपने रंग में रंग लिया तूने अपने रंग मेंअब ले चल कान्हा अपने संग मेंमोह में फँस सब कुछ भूलेचाहा बढ़ के गगन को छु लेंगहरी …

मुस्कुराहटें

नहीं मुस्कुराहटों का कोई जवाब छिपें हैं इनमें हजा़रों राज़ चली आती हैं कभी नम आँखों के साथ कभी थम जाती हैं शर्मो हया के साथ चहक जाती हैं …

अद्भुत रंग बिरंगे धागे

ये अद्भुत रंग बिरंगे धागे खींचें मुझे और लेकर भागेंहै हर रंग निराला इनका कामनाओं से भी हैं भरपूर है सतरगीं दुनिया ये सारी कभी उभारे कभी कर दे …