Category: किरन कपूर गुलाटी

Does God exist? By kiran Kapur Gulati His miracles are all around Open your eyes and hear the sound Lovely colour surround the sky Beautiful flowers sway to fly Cool breez feels so pleasant Feels like u r in Heaven In every form and everything , Why do I see you in flying wings. It’s everywhere that you exist, Can feel you in the storm and mist. In every breath you are there, Eyes open or shut you are present everywhere. Illusionary world is lovely and fair, Sometimes it’s full of scare. Whatever I perceive or see, It’s nothing else but only Thee. Be it a river or a stream, Or water gushing in the sea. Flying birds in the sky, Or bursting clouds when they cry. When I see the splendid creation, I’m mystified by your evolution. You have your own ways to show, That you are present in every seed you sow. Don’t get involved with colours and sway, With time only they fade away. No guarantee of the breath we take, So we know this life is fake. How can this creation be, Without a creator which is thee. I see you always all around, Your ways of showing are profound. Sent from my iPad – [ ]

Does God exist? By kiran Kapur Gulati His miracles are all around Open your eyes and hear the sound Lovely colour surround the sky Beautiful flowers sway to fly …

नहीं तो जाने क्या होगा किरण कपूर गुलाटी

नहीं तो जाने क्या होगा। kiran kapur gulati किरन कपूर गुलाटी पहचानें इक दूजे को हम, ऐसे होने इंसान चाहिए . मैं मेरे से उठ जाएँ ऊपर, कुछ ऐसे …

नहीं कायर। निर्भीक बनो

नहीं कायर निर्भीक बनो सहन शीलता इंक वरदान सही पर हम इतने भी नादान नहीं दया धर्म सब ठीक है पाठ सहिष्णुता का भी ठीक है पर होता है …

नन्हीं। बूँदें किरण कपूर गुलाटी

बरस रही बूँदें छम छम छाए बदरा कारे कारे पिया मिलन को जाए बिजुरिया धरती बैठी माँग सँवारे बोले पपीहा महके तन मन चटखें कलियाँ बेला की कोमल चलें …

है बुलबुला रंगों का

है इक बुलबुला यह ज़िन्दगी तरह २ के रंग भी हैं शामिल फूला रहता है बड़े गुमानों में यह बसी रहती है इसमें पूरी कायनात अपनी ही दुनिया में …

सब याद है ज़रा ज़रा

सब याद है ज़रा ज़रा चाँदनी रातों का बीती बातों का महकती हवाओं का चहकती फ़िज़ाओं का भूली बिसरी यादों काकुछ कही अनकही बातों कासब याद है ज़रा ज़रा …

छोड़ देता है

छोड़ देता है हो सफ़र सुहाना खिलखिलाना भाता है बहुत टूट जाना खा़बों का हौंसले तोड़ देता है मंज़िलों को पा जाना न मुमकिन तो नहीं रासता मुश्किल हो …

प्रश्न चिन्ह

प्रश्न चिन्ह क्या ,क्यूँ ,कब ,कैसे इन्हीं शब्दों में सिमट जाती है ज़िन्दगी जवाब इनके मिलते नहीं कट जाती है ज़िन्दगी रिश्ते निभाने में बँट जाती है ज़िन्दगी देह …

चली जा रही हूँ

सावन की रातों में झडी़ जम के बरसती फूलों और पत्तों से अठखेलियाँ सी करती अजब हैं नजा़रे गरमीयों के मौसम में कभी आग बरसती कड़ाके की सर्दी में …

तू देख मेरे हुनर को देख

तू देख मेरे हुनर को देख देख ज़िन्दगी को मेरी नज़र से देखबिखरे हैं रंग कैसे२ रंगीनीयोँ को देखनहीं कमी कुछ भी कहीं जा के आते नज़ारों को देख …

जवाब नहीं होता

कई बार कुछ बातों काजवाब नहीं होताउठते हैं जब तूफ़ाँ आँधियोँ का हिसाब नहीं होताबढ़ जाती हैं कभी बेचैनियाँ तो प्रभु शरण बिना,रास्ता कोई और नहीं होता जाना इस …

अरमान मचलते रहते हैं

मन का चलन कुछ है ऐसा कि अरमान मचलते रहते हैं पा जाने को दुनिया सारीदिन रात में ढलते रहते हैं नील गगन में उड़ते बादल छमछम बरसते रहते …

उडा़नो को हम ढूँढते हैं

न जाने ज़िन्दगी में हम क्या ढूँढते हैं बहारों का हर पल पता ढूँढते हैं कैसी अजब कश्मकश है यह पर नहीं हैं लेकिन,उड़ानों को ढूँढते हैं नहीं चलता …

रंग लो कान्हा अपने रंग में

रंग लो कान्हा अपने रंग में रंग लिया तूने अपने रंग मेंअब ले चल कान्हा अपने संग मेंमोह में फँस सब कुछ भूलेचाहा बढ़ के गगन को छु लेंगहरी …