Category: देवी नांगरानी

ज़िंदगी एक आह होती है

ज़िंदगी एक आह होती है मौत उसकी पनाह होती है। जुर्म जितने हुए है धरती पर आसमाँ की निगाह होती है। आदमी आदमी को छलता है आदिमीयत गवाह होती …

ज़माने से रिश्ता बनाकर तो देखो

ज़माने से रिश्ता बनाकर तो देखो समझ बूझ से तुम निभाकर तो देखो यह पुल प्यार का एक, नफ़रत का दूजा ये अन्तर दिलों से मिटाकर तो देखो गिराते …

जब दुख में अबला रोती है

जब दुख में अबला रोती है क्यों खून की बारिश होती है। उड़ जाती हैं नींदें रातों की क़िस्मत जब मेरी सोती है। बेचैनी देख के रातों की करवट …

छीन ली मौसमों ने है आज़ादियाँ

छीन ली मौसमों ने है आज़ादियाँ जाने क्या हो गईं सारी आबादियाँ बनके भँवरे चुराते रहे रंगो बू रंग अपना न कोई न है आशियाँ क्यों नहीं ताज कोई …

चक्रव्यूह

लड़ाई लड़ रही हूं मैं भी अपनी शस्त्र उठाये बिन, खुद को मारकर जीवन चिता पर लेटे॥ गाँधी का उदाहरण, सत्याग्रह, बहिष्कार तज देना सब कुछ अपने तन, मन …

घर में वो जब भी आया होगा

घर में वो जब भी आया होगा खुशबू से घर महका होगा। उसने जुल्फ़ को झटका होगा प्यार का सावन बरसा होगा। साँसों में है उसकी खुश्बू इस रह …

ख़लिश से गुज़रते रहे जो

ख़लिश से उमर भर गुज़रते जो आए उन्हें अन्त वेले सुमन क्यों सजाए।। सदा नफ़रतों के चुभे ख़ार जिनको, उन्हें प्यार कर क्यों है खुद को रुलाए।। इतना सजाओ …

ख़यालो-ख़्वाब में ही महफिलें सजाता है

ख़यालो-ख़्वाब में ही महफिलें सजाता है और उसके बाद उदासी में डूब जाता है वो चाहता है के नज्दीक रहूँ मैं उसके क़रीब जाऊँ तो फिर फ़ासले बढ़ाता है …

कुछ अंधेरो में दीपक जलाओ

कुछ अंधेरो में दीपक जलाओ आशियानों को अपने सजाओ। घर जलाकर न यूँ मुफलिसों के उनकी दुश्वारियाँ तुम बढ़ाओ। कुछ ख़राबी नहीं है जहाँ में नेकियों में अगर तुम …

कसमसाता बदन रहा मेरा

कसमसाता बदन रहा मेरा चूम दामन गई हवा मेरा मुझको लूटा है बस खिज़ाओं ने गुले दिल है हरा भरा मेरा तन्हा मैं हूँ, तन्हा राहें भी साथ तन्हाइयों …

कलियों के होंट छूकर वो मुस्करा रहा है

कलियों के होंट छूकर वो मुस्करा रहा है झोंका हवा का देखो क्या गुल खिला रहा है. पागल है सोच मेरी, पागल है मन भी मेरा बेपर वो शोख़ियों …

उड़ गए बालो-पर उड़ानों में…

उड़ गए बालो-पर उड़ानों में सर पटकते हैं आशियानों में । जल उठेंगे चराग़ पल-भर में शिद्दतें चाहिएँ तरानों में । नज़रे बाज़ार हो गए रिश्ते घर बदलने लगे …

अब ख़ुशी की हदों के पार हूँ मैं

अब ख़ुशी की हदों के पार हूँ मैं दर्द पिघला है अश्क़ बार हूँ मैं। गीत कैसे न सुर में ढल जाते दोस्तो साज़े दिल का तार हूँ मैं। …