Category: योगेश शर्मा ‘योगी’

वजूद की तलाश

निकला जो वजूद की तलाश में,मिला एक मोड पे खुदी से मैं,हरदम खुश रहने वाला था जो कभी,कितना उदास अब लगता हूं मैं,मिल जाए कभी जवाब उदासी से,खुद से …

फितूर है

जाने ज़ेहन में ये कैसा फितूर है,गलती है ये तेरी या मेरा कुसूर है,लिए चला है दिल खुद को राहे-मुहब्बत में,हशर की सोच तुझे टूटना जुरूर है,हर लहजे में …

मेहरबां होने को हैं लोग

बडे अदाकार हैं इस बस्ती के लोग,दिल तोडने को मजाक समझते हैं लोग,चुपचाप गुजर जा रंगमंच से ऐ दिले नादां,अहसास की आवाज सुन लें कहीं ना लोग,नाराज होतें हैं …

ख्वाब

अपने ख्वाबों की जो खुश्बु से बिछड जातें हैं,लोग वही दुनियां में तन्हा रह जातें हैं,हम चले भी तो ख्वाब लिए आंखों में,या ख्वाब ही हमें राहों में लिए …

खुदा भुलाए फिरतें हैं,

दिलों में बेहद नफरतें दबाए फिरतें हैं,खुदा समझतें हैं खुद को खुदा भुलाए फिरतें हैं,होठों पे हरदम झूठी मुस्कुराहटें लिए,लोग जिन्दगी का बोझ उठाए फिरतें हैं,दिल मिले किसी से …

तु इन्तजार की बात कर

हमेशा इधर उधर की ना बेकार की बात कर,करनी है तो इश्क मुहब्बत या प्यार की बात कर,तेरे आंसुओं के बदले अपने होंठों की हंसी दे दी,समझ आती है …

ज़िन्दगी

बहुत उदास सी रहने लगी है जिन्दगी,हर सोच से अब परे है जिन्दगी,हम तो तस्वीर बनाते जातें हैं,जाने क्या रंग भरे जिन्दगी,मिलेगी कभी तो पूछेंगें जरूर,कया चाहती है हमसे …

महोब्बत दे मुझे

खुद से मोहब्बत की इजाज़त दे मुझे,नहीं चाहता बहुत फकत इतना दे मुझे,एहतराम करू सर आँखों पे तेरी हर ख्वाहिश,तू समझे मुझे, खुदा इतनी नजाकत दे तुझे,रंग-नूर बरसता हो, …

राखी का त्यौहार आया है

राखी का त्यौहार आया है, खुशियां हजार संग लाया है, युगों युगों से चली आ रही रीत का इतिहास का इसमें समाया है, भाईयों बहनों के चेहरों पर ये …

मायूस हो जाते हैं

मायूस हो जाते हैं जाने क्यों, हमें फिर से सम्भलता देखकर, मुश्किलों में पड जातें हैं जानें क्यों, हमें मुश्किलों से निकलता देखकर, रोशन चिराग बुझाने के लिए बारिशों …

कश्मीर को जाने क्या हुआ है,

कश्मीर को जाने क्या हुआ है, बुरी नजर का शिकार हुआ है, मस्त बहारों में खेलने वाला, लाशों के ढेर पे अब पडा है, हिन्दु मुस्लिम दो भाईयों मे, …

खुदा भुलाए फिरतें हैं

दिलों में बेहद नफरतें दबाए फिरतें हैं, खुदा समझतें हैं खुद को खुदा भुलाए फिरतें हैं, होठों पे हरदम झूठी मुस्कुराहटें लिए, लोग जिन्दगी का बोझ उठाए फिरतें हैं, …

बेचिराग रास्ते

क्या जिन्दगी यूंही गुजर जाएगी, सोचता हूं यही होगा पर ना हो खुदा के वास्ते, फिर वहां शम्मां भी क्या करेगी योगी, जब चुनतें ही हैं हम बेचिराग रास्ते,

मेहरबां होने को हैं लोग

बडे अदाकार हैं इस बस्ती के लोग, दिल तोडने को मजाक समझते हैं लोग, चुपचाप गुजर जा रंगमंच से ऐ दिले नादां, अहसास की आवाज सुन लें कहीं ना …