Category: विवेक सिंह

निशान

पूरा करने कमी को अपनी, मानव चलता तो हैआवेग की ऊष्मा से कभी पिघलता, सांचे में ढलता तो हैएक निशान तो रहना चाहिए समय का, फौलाद के जिस्म परदेखकर …

मैं तो विकल्प को संकल्प कर चुनूँगा ।।

जीविका और जीवन की खींचतान में से,आत्मश्लाघा व आत्मसम्मान में से,व्यापक चाटुकारिता और अल्प स्वाभिमान में से,मैं तो विकल्प को संकल्प कर चुनूँगा ।।द्रुत-धनवान और पुष्ट खानदान में से,ठंडे …

मौसम

आज विश्वास बोल रहा हैे, अच्छा लग रहा होगाक्योंकि माज़ी की यादों का घमाघम हो रहा है।पर सोचकर कि न जी पाएंगे उस रुत को कभी अबयहां दिल का …

खामोशियाँ

साँसों की हौली सरसराहट,पेशानी पर शांत पसीने की चमक।दिमागी उधेड़बुन की ख़ामोशीरगों में खून की रवानी की धड़क।।कुछ खामोशियां, तो कुछ शोरज़रूरी होते हैं बताने के लिएकी हम हैं…. …

ज़रुरत

आगाज़ किताब का हुआहमसे….मजमून भी हम,मुकम्मल भी हमसे ही हुई कहानी…..खूबसूरत अंजाम के लिए हमारा होना ज़रूरी था। Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые …

क्या वफ़ा, क्या जफ़ा

मेरी याद्दाश्त पर इतना यकीन क्यों है तुझे, खुदगर्ज़ हूँ,अपना कहा भी भूल जाता हूँ।   कोई मजबूरी नही रोक सकती वादा निभाने से, बस यूँ है कि वादाखिलाफ …

डॉ. अवुल पकिर जैनुलब्दीन अब्दुल कलाम को एक श्रद्धांजलि

आज मैं हिंदी में ‘कलाम’ लिखता हूँ उर्दू आती नही पर दिल-से-सलाम लिखता हूँ I होती होगी आप जैसी ही कुरान की आयत इसीलिए पुरज़ोर और पुरशान लिखता हूँ …

हा !

जब जब इतिहास छुपाया जाता है, तब तब कोई गौरव मिटाया जाता है II जब मिथ्या के बल कुछ हथियाया जाता है, तब एक सत्य झुठलाया जाता है II …