Category: वैभव दुबे

बाउजी।

आज जब तुमको गोद में उठाकर मैंने लिटाया बिस्तर पे तो बचपन का वो वक़्त याद आ गया। जब अपने काँधे पे बिठाकर तुम मुझे मेला घुमाया करते थे। …

मैं हूँ निजी स्कूल है मेरी तानाशाही।

एक प्रतियोगिता में प्रथम पुरुस्कार प्राप्त रचना। मैं हूँ निजी स्कूल है मेरी तानाशाही। बस्ते,ड्रेस,किताबें सब पे करूँ उगाही। एक बर्ष में कई आयोजन करवाता हूँ मैं। पिकनिक तो …

भूखा अन्नदाता।

उम्मीदों पर ओले गिर गए चन्द मुआवजे का मरहम है। किसान किस्मत कोस रहा जिसपे गर्व था,अब गम है। राहत का रास्ता रोकती राजनीति रोटी सेंक रही। बीमा के …

रहे हनुमान धरा पर।

बैकुंठ गए सब देव, रहे हनुमान धरा पर। कलियुग में भी सत्कर्मों का मान धरा पर। भूत-प्रेत,बाधाएं मिटें, हो भक्ति की विजय। बल,विवेक,विद्या के दाता बजरंगी की जय। भक्ति …

तू मेरा दर्पण है माँ।।

हृदय,श्वांस और रक्त कणों का चरणों मे समर्पण है माँ। मुझको मुझसे ही मिलाया तू मेरा दर्पण है माँ। वाणी,वाग्देवी,वागीश्वरी, शारदा,नाम तेरे अनेक हैं। शब्द तेरे ही दिए हैं …

मन्ज़िल भी तुम्हारी है।

ये राहें भी तुम्हारी हैं ये मन्ज़िल भी तुम्हारी है। है अगर हौंसला दिल में,महफ़िल भी तुम्हारी है। ठहरे हुए पानी में पत्थर से लहर दूर तक जाती ठोकरों …

सुनकर तेरा नाम रहे।

मत पूछो कैसे बरस हैं बीते राधा बिन क्या श्याम रहे? अपनी ही प्रतिध्वनियों में हम सुनकर तेरा नाम रहे। सावन का था मस्त माह हम प्यासे व्याकुल तरसे …

विदाई।।

कोई लौटा दे मुझको बचपन फिर से गोद में सो लूंगी। माटी के गुड्डे-गुड़ियों से जीभर के आज मैं खेलूंगी। जहां के हर कोने में मेरी यादें गीत सुनाती …

जीना सिखाया है।

ज़िन्दगी में होके शामिल जीना सिखाया है। दिल में पाक मुहब्बत का पैगाम लाया है। मुरझा जो गई कली फिर अश्क़ बहायेगी लहरों की रवानी पे भी उदासी छायेगी। …

कष्ट परों को सहने दो।

स्वच्छंद उड़ो मुक्त गगन में पूर्ण करो अभियान। विश्वास हृदय में हो मगर तनिक नहीं अभिमान। दृष्टि लक्ष्य की अनन्य रहे विचलित,व्यथित न हो पाये। प्राप्त करो प्रथम परिणाम …

ममता भी हो रही है अख़बार में शुमार।

सुबह एक हाथ में था समाचार पत्र और एक हाथ में थी चाय की प्याली। पीते-पीते चाय मैंने जब नज़र ख़बरों पर है डाली। मुख्य पृष्ठ पर सबसे बड़ी …

माँ की आह प्रलय है लाती।।

क्या कोई पुत्र देख सकेगा माँ को चौराहे पर आस लगाये हुए। चन्द रोटी के टुकड़ों की खातिर सबके आगे हाथ फैलाये हुए। गाय भी तो हमारी माता है …

थे देश के अमर सपूत।।।

स्वाभिमान,सम्मान की खातिर न्यौछावर निज प्राण किये। थे देश के अमर सपूत वो बिन स्वार्थ ये अनुदान किये। काँटों पर चलकर कर दिए पुष्प समर्पित माँ के चरणों में। …

जल बिन जग जीवित नहीं।

जल से ही जग जीवित है। जल हर श्वांस में नीहित है। मनुष्य नहीं देवों को ज्ञान शिव जटा में गंगजल शोभित है। पंचतत्व में है सर्वश्रेष्ठ जल प्रकृति …