Category: सुहानता शिकन

SHAYARI

जीओ जिन्दगी मुस्कुराते हुये, खुद हंसो और जग को हंसाते हुये, ऐसे कि आपकी हंसी देखे बगैर, रो पडे ये कुदरत सिसकियाते हुये.                           ः-सुहानता ‘शिकन’  

किसे आवाज़ दें रहीं हैं बेकरारी में

 किसे आवाज़ दें रहीं हैं बेकरारी में , गले लगा लूं क्या मैं आकर इस खुमारी में , खिले गुलाब से हैं अरमां एक कतारी में गले लगा ………..किसे …

फितरत नहीं है रिश्ते में

फितरत नहीं है रिश्ते में दिल के सामने वाले पे हक जताने की, अगर रिश्ता जजबातों से जुडा है वो आप ही दूर ना रह पायेंगी, मचल जायेंगे मिलन के वास्ते खुद ही से वो तनहा हो, और इशारे बिना ही आकर गले से लिपट जयेंगी.                                         …

गिनती में याद हमें करना नहीं आता

गिनती में याद हमें करना नहीं आता , दिल पे आघात  हमें करना नहीं आता , आता है हमें सिर्फ उल्फत में ज्रीना, बेरुखी भरी बात  हमें करना नहीं आता .                          ः-सुहानता ‘शिकन”

बेवक्त मौसम आ जाए बहार का

बेवक्त मौसम आ जाए बहार का, अप्सरा सी सज जाए वक्त इंतजार का, जब भी वो गुजरें झरोखों से पलकों के, भुल जाए पता दिल धडकन पे इख्तियार का.                                             ः-सुहानता ‘शिकन’

दुआ ना कर अफसानों को पाने की

दुआ ना कर अफसानों को पाने की, जो अपना ना माने उनपे हक जताने की, सिसकियों में रह के कोई हंस सका है भला, जो टुटे हुए दिल से कोशिश कर रहे मुस्कुराने की.                                             ः- सुहानता “शिकन’

मदहोश नजर की

मदहोश नजर की सादगी में दीवने हो गए, दिल अपना  अरमान दिल के पराए गए, तारीफ को उनके रोज रोज नए अल्फाज खोजने पडतें हैं, ऐसे करिश्माई आजकल उनके अदायें हो गए.                                           …

उठती ही नहीं पलकें उन्हें बुलाऊं तो कैसे

उठती ही नहीं पलकें उन्हें बुलाऊं तो कैसे, बेगाना बना लिया हक जताऊं तो कैसे, सुनके चन्द अफसानों को ही फेर लिए नजर, रुठा हुआ है यार भला मनाऊं तो कैसे.  

रोज याद कर उन्हें गुनहगार हुए हम

रोज याद कर उन्हें गुनहगार हुए हम, जो सपने में भी याद किए नहीं बेवफा हमें कहतें हैं, वाह रे वक्त का मसीहा क्या खूब रंग है तेरा, जो रंगों से दूर रहे कपडे गंन्दे होने की बात करते हैं.    

दुआ है आपको रब एक ऐसी अदा दे

दुआ है आपको रब एक ऐसी अदा दे, कि याद आयें हम और आप मुस्कुरा दें, जनाजे पर हम लेटें हों पलकें खुली रखे, फिर भी पर्दे के खयाल से आप पलकें झुका दें.                        ः-सुहानता ‘शिकन’  

आज मौसम बहुत आशिकाना है

आज मौसम बहुत आशिकाना  है, शायद उनकी जुल्फ खुली है जिनसे ये शामियाना है, चाहत है उन्हें बाहों में प्यार से भर लेने की, मगर क्या करें दुरियां हैं उसपर ये बैरी जमाना है.  ःसुहानत ‘शिकन‘

दिल की बाजी है वफा

दिल की बाजी है वफा का दाव है, असलियत मे कुछ नही सब खयाली पुलाव है, इश्क कि गली संकरी जिसमें चलते हुए ऐ गालिब, खुद की परछाई से खुद का ही मनमुटाव है. ः-सुहानता ‘शिकन‘    

देर तक मैं अम्बर पे नजर टिकाये था

देर तक मैं अम्बर पे नजर टिकाये था, सुना था कि आसमान से एक परी गुजरती है, वादी में मैं शान्त सा बदन लिटाये था, सुना था कि एक ईश्वर की एक छवि गुजरती है, तनहाई के उस वक्त में बस पता चला इतना, कि हल्की सी तेरी लफ्ज की एक हंसी गुजरती है.  ः-सुहानता ‘शिकन’

नाराज हैं वो कि चांद बदली में है

नाराज हैं वो कि चांद बदली में है, सपना है ये या सब असली में है, मैं भी मैं हूं या कोई और ही हूं, क्यूं रहस्यमयी आज सब ही में है.                      ;-सुहानता ‘शिकन‘

दर्द मिला हमको पर जीना ना आया

दर्द मिला हमको पर जीना ना आया, मासूम था दिल इसलिए पीना ना आया, उलझते गये जिन्दगी के अनसुझे सवालों में, इस तरह के आज भी जख्म सीना ना आया. ;-सुहानता ‘शिकन’

दीदार ही किया तो गुनहगार हो गये

दीदार ही किया तो गुनहगार हो गये, आज सरे जमाने मे शर्मसार हो गये, अब हमसे हर शख्स नजर चुराए फिरता है, जो जी भर उन्हें देखने के तलबगार हो गये.  ;-सुहानता ‘शिकन’

खुशनसीब हैं वो जो दिल मे किसी को जगह देते हैं

खुशनसीब हैं वो जो दिल मे किसी को जगह देते हैं, बेचैनी सहकर भी दूसरों को हंसना सिखा देते हैं, दुनियावाले लाख चाहें बदनाम उन्हें कर लें, मगर वो अपनी सादगी से हर दिल में जगह बना लेतें हैं.   ;-सुहानता ‘शिकन‘

तलाश में सुकून की बेकरार हो गया

तलाश में सुकून की बेकरार हो गया, एक तिश्नगी है सर पे सवार हो गया, आवारा बन भटकता हूं सफर में जिन्दगी के, हाय शायद मुझको भी है प्यार हो गया.      -सुहानता ‘शिकन‘

हक है मुझे कि दीदार किया करूं

हक है मुझे कि दीदार किया करूं; बेखुदी में खुद को बेकरार किया करूं, कभी तो बेखुद होकर मिल जायेंगी हमको, इतना तो उस खुदा पे ऐतबार किया  करूं.             ः- सुहानता ‘शिकन’

शक ना कर बेवफाई का

शक ना कर बेवफाई का, मै तो सौदागर हूं तनहाई का, महसूस कर हूं तू बेहाल सी पडी है, पर तू अकेली ही तो शिकार नही जुदाई का.                                      ः-सुहानता ‘शिकन‘

वो हमसे रूठ गये ऐसे

वो हमसे रूठ गये ऐसे कि दुश्मनी हो गयी हो, सुहाग की पहली रात हो और दुल्हे मे कुछ कमी हो गयी हो, वाह रे कुदरत का मसीहा क्या खूब खेल खेला, जैसे सूरज मे दो बुन्द पानी से नमी हो गयी हो.                                                   …