Category: सोनित बोपचे

क्यूँ दर्द की हर दास्तां रंगीन लगाती है…

वक़्त कैसा आ गया है, इस सफर में देखिये… जिंदगी हर मौत की शौकीन लगती है… तूने बनाई थी बड़ी हमदर्द ये दुनिया… संगदिल ये क्यूँ मुझे संगीन लगती …

रिश्तों की कमीज..

रिश्ते भी कमीज सरीखे होते हैं.. कुछ नए..कुछ पुराने..तो कुछ फटे हुए.. नए वाले अच्छे हैं चमक है उनमें पार्टी फंक्शन में पहनता हूँ कुछ रौब भी जम जाता …

और घर में बन्दर छोड़ चले..

तुम दिल क्यूँ मेरा तोड़ चले.. आँखों में समंदर छोड़ चले.. दिल को थी कहाँ उम्मीद-ए-वफ़ा.. यादों का बवंडर छोड़ चले.. 😐 न पूछो कैसा किया सितम.. जो दिल …

तुम्हारी याद आती है..

हवाएँ मुस्कुराकर जब घटाओं को बुलाती है.. शजर मदहोश होते हैं..तुम्हारी याद आती है.. इन्ही आँखों का पानी फिर उतर आता है होठों तक.. भिगोकर होंठ कहता है..तुम्हारी याद …

ये वो कली है जो अब मुरझाने लगी है..

कश्ती समंदर को ठुकराने लगी है.. तुमसे भी बगावत की बू आने लगी है.. मत पूछिए क्या शहर में चर्चा है इन दिनों.. मुर्दों की शक्ल फिर से मुस्कुराने …

खुदा प्यारा ज़माने को..मुझे बस बंदगी प्यारी…

तुम्हारी याद में हर पल हरिक लम्हा जिया हूँ मै… इसी तरह बिता दी इस बशर ने जिन्दगी सारी… न पूछो क्या मोहब्बत का हुआ मुझपे असर यारों… खुदा …

मैं रोज नशा करता हूँ… गम रोज गलत होता है…

इक हाथ सम्हलती बोतल… दूजे में ख़त होता है… मैं रोज नशा करता हूँ… गम रोज गलत होता है… तरकश पे तीर चड़ाकर… बेचूक निशाना साधूँ… उस वक्त गुजरना …

असमान आर्थिक वितरण..गरीबी..विडम्बना..(कविता)

खा खा के मर गए कुछ..खाने को मर रहे हैं.. कुछ मर रहे हैं क्यूंकि खाने को कुछ नहीं है.. इस जिन्दगी में जीने को है कई बहाने.. माना …

कलेजा तो हमारा है..(शेर)

“कलेजा जो हमारा है..अगर तुम चीर के देखो… यहाँ हर खून का कतरा तुम्ही से प्यार करता है… बगावत इस कदर यारों ज़माने में नहीं देखी… मनाओ लाख पर …

हमनजर हो जाइये या हमसफ़र हो जाइये…(गजल)

हमनजर हो जाइये या हमसफ़र हो जाइये… आज हमसे मिल के अब शाम-ओ-सहर हो जाइये… बिन तेरे चारों तरफ कैसा अँधेरा छा गया… इस अँधेरी रात में आ दोपहर …

बारिश फ़र्क नही करती

बारिश फ़र्क नही करती हर जर्रा जर्रा भीगता है मनभावन उपवन भीगते हैं गलियों का कचरा भीगता है प्रेम मे फ़र्क नही होता मैं सोचता हूं अम्बर को कभी …

दवाखाने में क्यूँ छोड़ा जरा चलते तो मैखाने

“बुरा क्या था अगर इस दर्द के मै साथ में दिलबर…  तुम्हारी याद भी चलकर मिटा लेता अगर थोड़ी…   दवाखाने में क्यूँ छोड़ा जरा चलते तो मैखाने…  दवा के …

सिलवटें जाती नहीं..

नींद भी आती नहीं.. रात भी जाती नही.. कोशिशें इन करवटों की.. रंग कुछ लाती नहीं.. चादरों की सिलवटों सी हो गई है जिंदगी.. लोग आते.. लोग जाते.. सिलवटें …