Category: सोनित बोपचे

साहब..मैं कुत्ता हूँ..

साहब..मैं कुत्ता हूँ..अपनी जात का आदमी सूंघ लेता हूँ..फिर हम मंडलियों में भौंकते हैं…..read more Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день …

स्पर्धा २०१७ में प्रेषित कविता

“वो हिन्द का सपूत है”आप सभी के मार्गदर्शन के चलते मेरी कविता “वो हिन्द का सपूत है” को “स्पर्धा २०१७” प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है. कविता का …

इन नजरों से देखो प्रियवर..पार क्षितिज के एक मिलन है

इन नजरों से देखो प्रियवरपार क्षितिज के एक मिलन हैधरा गगन का प्यार भरा इकमनमोहक सा आलिंगन है..पंछी गान करे सुर लय मेंनभ की आँखें लाल हुई हैंकुछ दुःख …

यादें

शांत समुद्र..दूर क्षितिज..साँझ की वेला..डूबता सूरज..पंछी की चहक..फूलों की महक..बहके से कदम..तुझ ओर सनम..उठता है यूँ ही..हर शाम यहाँ..यादों का नशा..यादों का धुआँ..कुछ और नहीं..कुछ और नहीं..यादों के सिवा..अब …

आज तन पर प्राण भारी

आज तन पर प्राण भारी मन हुआ स्वच्छन्द जैसेतोड़ सारे बंध जैसेदेह की परिधि में सिमटे अब नहीं यह रूह सारीआज तन पर प्राण भारी   लोक क्या परलोक …

“Poetry on Picture” contest के अंतर्गत सम्मिलित मेरी रचना “कचरेवाली” अगर आपको पसंद आए और आप उसे दूसरे लोगों से Share करने योग्य समझें तो दी गयी लिंक पर जाकर Share करें. विजेता Number of Facebook Shares के आधार पर चुना जाएगा.

20-01-2017 की  सन्ध्या ६ बजे तक किए गए Shares ही  गिने जाएंगे.“कचरेवाली” Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит …

कचरेवाली

इक कचरेवाली रोज दोपहर..कचरे के ढेर पे आती है..तहें टटोलती है उसकी..जैसे गोताखोर कोई..सागर की कोख टटोलता है.. उलटती है..पलटती है..टूटे प्लास्टिक के टुकड़े को..और रख लेती है थैली …

चल अम्बर अम्बर हो लें..

चल अम्बर अम्बर हो लें..धरती की छाती खोलें..ख्वाबों के बीज निकालें..इन उम्मीदों में बो लें.. सागर की सतही बोलो..कब शांत रहा करती है..हो नाव किनारे जब तक..आक्रांत रहा करती …

सौ सवाल करता हूँ..

सौ सवाल करता हूँ..रोता हूँ..बिलखता हूँ..बवाल करता हूँ..हाँ मैं……….सौ सवाल करता हूँ..फिर भी लाकर उसी रस्ते पे पटक देता है..वो देकर के जिंदगी का हवाला मुझको..और चलता हूँ उन्ही …

क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो..

क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो..क्या दोष तुम्हें दूँ तुम ही कहो..इस रिश्ते की बुनियाद हिलाने की शुरुआत तो मैंने की थी..छुपकर तुमसे और किसी से पहले बात …

जश्न-ए-आजादी में “इन भारतीयों” को न भूलना…

यहाँ जिस्म ढकने की जद्दोजहद में… मरते हैं लाखों..कफ़न सीते सीते… जरा गौर से उनके चेहरों को देखो… हँसते हैं कैसे जहर पीते पीते… वो अपने हक से मुखातिब …

वक़्त

वक़्त को दीवार पर टांग रखा है और जब देखता हूँ शक्ल उसकी जैसे कोई बेबस.. तिलमिलाता हुआ लाख मजबूरियाँ..पर जिंदगी बसर करता फिर रात के सन्नाटों में आकर …

अब सिर्फ एक तागा टूटेगा..

आज उस पुराने झूले को देखकर कुछ बातें याद आ गयी.. कई बरस गुजरे जब वो नया था.. उसकी रस्सियाँ चमकदार थी.. उनमे आकर्षण था.. उन रस्सियों का हर …

मैं किनारा हूँ…लहरों सा मचलते रहिए…

किसी गुल सा मेरे गुलशन में भी खिलते रहिए… कभी दो चार दिन में हमसे भी मिलते रहिए… तेरि अटखेलियों का मैं भी इक दिवाना हूँ… मैं किनारा हूँ…लहरों …