Category: शिवदत्त श्रोत्रिय

जब भी तुम्हारे पास आता हूँ मैं

जब भी तुम्हारे पास आता हूँ मैंकितना कुछ बदल जाता हैसारी दुनिया एक बंद कमरे में सिमिट जाता हैसारी संसार कितना छोटा हो जाता हैमैं देख पता हूँ, धरती …

खुदखुशी के मोड़ पर

जिंदगी बिछड़ी हो तुम तन्हा मुझको छोड़ करआज मैं बेबस खड़ा हूँ, खुदखुशी के मोड़ पर ||जुगनुओं तुम चले आओ, चाहें जहाँ कही भी होशायद कोई रास्ता बने तुम्हारी …

कुछ फायदा नहीं

कुछ फायदा नहीं मैं सोचता हूँ, खुद को समझाऊँ बैठ कर एकदिनमगर, कुछ फायदा नहीं ||तुम क्या हो, हकीकत हो या ख़्वाब होकिसी दिन फुर्सत से सोचेंगे, अभी कुछ …

तुम्हे पढ़ना नहीं आया

जिंदगी की क़िताब कुछ बिखरने सी लगी हैबेचने की ख़ातिर इसे मुझे मढ़ना नहीं आया ||लोग कहते है कि मुझे पत्थर गढ़ना नहीं आयातुम्हे क्या ख़ाक लिखता तुम्हे पढ़ना …

कब नीर बहेगा आँखों में ?

सागर कब सीमित होगाफिर से वो जीवित होगाआग जलेगी जब उसके अंदरप्रकाश फिर अपरिमित होगा ||सूरज से आँख मिलाएगाकब तक झूमेगा रातों में ?कब नीर बहेगा आँखों में ?छिपा …

कभी सोचता हूँ कि

कभी सोचता हूँ कि कभी सोचता हूँ  किजिंदगी की हर साँस जिसके नाम लिख दूँवो नाम इतना गुमनाम सा क्यों है ?कभी सोचता हूँ  किहर दर्द हर शिकन में, …

फूलो के इम्तिहान का

कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय मंदिर में काटों ने अपनी जगह बना लीवक़्त आ गया है फूलो के इम्तिहान का  ||सूरत बदलने की कल वो बात करता थालापता है पता आज …

कितना कुछ बदल जाता है, आधी रात को

कितना कुछ बदल जाता है, आधी रात को  कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय जितना भी कुछ भुलाने कादिन में प्रयास किया जाता हैअनायास ही सब एक-एक करमेरे सम्मुख चला आता हैकितना …

बहुत बेशर्म है या ज़िद्दी

वो लड़का जो कभी किताबों से मोहब्बत करता थासुना है, आजकल मोहब्बत में किताबें लिख रहा हैंपहले रास्ते की किसी सड़क के किसी मोड़ परया शहर के पुराने बाज़ार …

एक प्लेटफार्म है

शहर की भीड़ भाड़ से निकल करसुनसान गलियों से गुजर करएक चमकता सा भवनजहाँ से गुजरते है, अनगिनत शहर |एक प्लेटफार्म है जो हमेशा हीचलता रहता हैफिर भीवहीं है …

पर कौन सुनेगा उसकी

शाम को आने मे थोड़ी देरीहो गयी उसकोघर का माहौल बदल चुकाथा एकदमवो सहमी हुई सी डरी डरीआती है आँगन मेहर चेहरे पर देखती हैकई सवालसुबह का खुशनुमा माहौलधधक …

कैसे जान पाओगे मुझको

कैसे जान पाओगे मुझको अगर तुमने प्रेम नही कियातो कैसे जान पाओगे मुझकोकिसी को जी भरकर नही चाहाकिसी के लिए नही बहायाआँखों से नीर  रात भरकिसी के लिए अपना …

दूसरो की तलाश में

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियजब भी भटकता हूँ किसी की तलाश मेंथक कर पहुच जाता हूँ तुम्हारे पास मेंतुम भी भटकती हो किसी की तलाश मेंठहर जाती हो आकर के मेरे …

कोई सहारा तो हो

मिले नज़र फिर झुके नज़र, कोई इशारा तो होयो ही सही जीने का मगर, कोई सहारा तो हो ||स्कूल दफ़्तर परिवार सबको हिस्सा दे दियाजिसको अपना कह सके, कोई …

पिता के जैसा दिखने लगा हूँ मैं

काम और उम्र के बोझ से झुकने लगा हूँ मैंअनायास ही चलते-चलते अब रुकने लगा हूँ मैंकितनी भी करू कोशिश खुद को छिपाने कीसच ही तो है, पिता के …

अच्छा लगता है

कभी-कभी खुद से बातें करना अच्छा लगता हैचलते चलते फिर योहीं ठहरना अच्छा लगता है ||जानता हूँ अब खिड़की पर तुम दिखोगी नहींफिर भी तेरी गली से गुजरना अच्छा …

भारत दिखलाने आया हूँ

रंग रूप कई वेष यहाँ पररहते है कई देश यहाँ परकोई तिलक लगाकर चलताकोई टोपी सजा के चलताकोई हाथ मिलाने वालाकोई गले लगाकर मिलताकितने तौर-तरीके, सबसे मिलवाने आया हूँक्या …

दुनिया में सबसे बड़ा मजहब है

एक कहे मंदिर में रब हैदूजा कहे खुदा में सब हैतीजा कहे चलो गुरुद्वाराचौथा कहे कहाँ और कब हैमैं कहता माँ बाप की सेवादुनिया में सबसे बड़ा मजहब है …

मगर ये हो न सका

मैंने एक ख्वाब देखा था, तुम्हारी आँखों मेंहक़ीक़त बन जाये मगर ये हो न सका ||एक कश्ती ले उतरेंगे समुन्दर की बाहों मेंकोई मोड़ न होगा फिर अपनी राहों …

विज्ञान और धर्म

विज्ञान और धर्म की ऐसी एक पहचान होविज्ञान ही धर्म हो और धर्म ही विज्ञान हो|आतंक हिंसा भेदभाव मिटें इस संसार सेएक नया युग बने रहे जहाँ सब प्यार …

आया था चाँद पानी पर

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियकिसी ने उपमा दी इसेमहबूबा के चेहरे की,किसी ने कहा ये रात का साथी हैकभी बादल मे छिपकरलुका छिपी करता तो ,मासूम सा बनकर सामने आ जाता …

अंतिम यात्रा, भाग -१

अंतिम यात्राकिसी की चूड़ियाँ टूटेंगी,कुछ की उम्मीदे मुझसेविदा लेगी रूह जबमुस्करा कर मुझसेकितनी बार बुलाने पर भी जोरिश्ते नहीं आयेदौड़ते चले आएंगे वो तबआँशु बहायेकितने आँशु गिरेंगे तबजिस्म पर मेरेरुख्सती …