Category: शर्मन

तुम नीचे उतरे…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

ऊँचे सिंहासन को छोड़कर तुम नीचे उतरे… और मेरे घर के दरवाजे की आड़ लेकर चुपचाप खड़े रहे मैं एकांत…कोने में बैठकर गुनगुनाता रहा…सुर तेरे कानों तक पहुंचे जिसे …

क्या तुमने उसकी…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

क्या तुमने उसकी पद्ध्वनि नहीं सुनी प्रतिदिन-प्रतिपल वह आ रहा है निरंतर उसके स्मरण में मैंने कितने गीत रचे स्वरलिपि में…’वही’ उदघोषित हो रहा है वैशाख की खुशबूदार धूप …

जितनी पूजा करनी थी …रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

जीवन में जितनी पूजा करनी थी पूरी नहीं हुई फिर भी…मैं हारा नहीं कली खिलने से पहले मुरझा गयी गिर गयी धरा पर फिर भी…मैं हारा नहीं नदी की …

फूलों की तरह…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

फूलों की तरह प्रस्फुटित हो मेरे गान समझूंगा हे नाथ ! मिल गया तेरा दान जिसे देखकर मैं सदा आनंदित होता रहूँगा अपना समझकर तूने जो दिया है उपहार …

नित नये रूप धर…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

नित नये रूप धर आओ मेरे प्राण में गंध में…रंग में आओ मेरे गान में हे अमृतमय ! आओ मुग्ध-मुदित-दो नयन में हे निर्मल-उज्जवल-कान्त हे सुंदर-स्निग्ध-प्रशांत आओ नाना-विधान में …

चित्त जहाँ भय शून्य हो…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

चित्त जहाँ भय शून्य हो शीश जहाँ उठे रहे ज्ञान जहाँ उन्मुक्त हो गृह-प्राचीर से जहाँ खंडित न हो वसुंधरा जहाँ सत्य की गहराई से शब्द…हृदय से झरे जहाँ …

मेघ-पर-मेघ धाय…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

मेघ-पर-मेघ धाय घोर अँधेरा छाये रखा है क्यों बिठाकर अकेला मुझे द्वार पर ? दिन के नाना-कामकाज में उलझा रहता हूँ मैं आज बैठा हूँ यहाँ तेरे ही आश्वासन …

मिलन की लीला होगी…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

मिलन की लीला होगी हृदय में यही भाव लेकर मैं इस जग में आया हूँ द्वार खुले…अहंकार मिटे आनंदमय इस संसार में ओ रे…बिन तेरे कुछ न रहे जीवन …

कितने अज़नबी से…रवीन्द्रनाथ टैगोर की “गीतांजलि” का बंगला से हिंदी में अनुवाद

कितने अज़नबी से मिलवाया तूने कितनों के दिल में बसाया तूने जो दूर थे उनको निकट लाया तूने कितने पराये को भाई, बनाया तूने सोचता हूँ…न जाने क्या होगा …

चैतू की बहुरिया

चैतू की बहुरिया कूड़े-कचरे के ढेर पर चुन रही साँवरी…कूक-कोयले डेग-डेग, ठहर-ठहर नत फेर नज़र इधर-उधर ढुलकते पीघल सीकर नित प्रायः इसी पहर उठती मन में इक लहर कि …

खुदा के बन्दों से दोस्ती कीजिये

खुदा के बन्दों से दोस्ती कीजिये मोहब्बत से रहिये और मस्ती कीजिये साहिल पे गुफ्तगू न करते रहियो डूबते हुए के आगे कश्ती कीजिये बहुत खूब, की है महलों …

जब से दिल मेरे महबूब से लगा है

जब से दिल मेरे महबूब से लगा है मैं कैसे कहूँ कि कितना मज़ा है किताबों में लिखा है, लेकिन मैंने ढाई अक्षर प्रेम का चखा है धीरे-धीरे सरकता …

बात दिल की, जुबां तक नहीं पहुंचती

बात दिल की, जुबां तक नहीं पहुंचती सभी दुआएं खुदा तक नहीं पहुंचतीं दीवारें इतनी खड़ी हैं इर्द-गिर्द कि सदाएं वहां तक नहीं पहुंचती हम बीमार हुए कुछ इस …

फिरंगी पीठ पर सवार न होते

फिरंगी पीठ पर सवार न होते दंगे-फसाद बार-बार न होते न होते देश के टुकड़े-टुकड़े अगर खुदगर्ज़ पहरेदार न होते समझ लेते गाँधी को अगर ये खूनी त्योहार न …

दिनभर जब कोई काम नहीं मिलता

दिनभर जब कोई काम नहीं मिलता बेचकर सामान भी दाम नहीं मिलता बेचते नहीं तो क्या करते आख़िर मुफ्त ही बच्चों को बादाम नहीं मिलता हम तो बैठे हैं, …

मैंने तुम्हें कब, कब नहीं समझा

मैंने तुम्हें कब, कब नहीं समझा तुम्हीं को अपनी ज़िन्दगी समझा यही समझाने में उम्र ढल गयी देर से समझा, मगर सही समझा मोहब्बत भी क्या बला है, यारों …

बुरे कर्मों का देखो मैंने कितना दुःख उठाया है

बुरे कर्मों का देखो मैंने कितना दुःख उठाया है मेरा साया मुझको ही अपनाने से कतराता है जिसको मारी ठोकर आज उसी के दर पे जाता हूँ रो-रोकर अपने …

दीपक से मांगो न उजाला…

दीपक से मांगो न उजाला, सूरज का इंतज़ार करो चुपके-चुपके लम्हा-लम्हा, हृदय का विस्तार करो हम करें प्रार्थना उसकी जो मुक्ति देने वाला है एक वही जो इस जग …

नन्हें-मुन्ने की आँखों में है भारत का सपना

नन्हें-मुन्ने की आँखों में है भारत का सपना आज नहीं तो कल होगा पर होगा पूरा सपना भारत का सपना हो पूरा ये उद्देश्य हमारा है अपना-अपना देश सबको …

ऐ दीन-ए-इलाही ! हमें रास्ता दिखाओ

ऐ दीन-ए-इलाही ! हमें रास्ता दिखाओ कहाँ है हाड-मांस में आत्मा दिखाओ यूँ तो इस मुल्क में बहुत हैं मुईन कौन है गरीबों का फरिश्ता दिखाओ ख़त्म हुई ज़िन्दगी …