Category: सर्वेश कुमार मारुत

शख़्सियत ऐसी क्या

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सेल्फ़ी रे

सेल्फ़ी ले-ले घूमता, मानव विविध प्रकार। कैसी उमंग मन में जगी, इच्छा अतृप्त अपार।।1 सेल्फ़ी अब जा चढ़ि, खींची जो तस्वीर। छवि मनोहर जो मिली, नयन कटीले तीर।।2 सेल्फ़ी …

मिल जाए जो तेरा साथ

मिल जाए जो तेरा साथ हालात-ए ज़िन्दगी में,वरना ज़नाज़े अक्सर यहाँ हर पल निकलते हैं। सर्वेश कुमार मारुत Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды …

मत हौंसले तोड़

मत हौंसले तोड़ पंख टूटे हुए परिंदे, कि रास्ता अभी बाकी है।एक ज़ुनून सा  दिल में जगा तू बस,  तेरे लिए बस इतना ही काफ़ी है।सर्वेश कुमार मारुत Оформить …

हज़ारों मंजिले मिलेंगी

हजारों मंजिलें मिलेंगी तुम्हें पाने के लिए,परेशानियां इम्तिहान लेगीं आजमाने के लिए ।रास्ते टेढ़े-मेढ़े भले ही हों इस ज़माने के लिए ,जिंदगी मिलती है सभी को सुलझाने के लिए।सर्वेश …

ज़रूरतों के मुताबिक़

ज़रूरतों के मुताबिक़ ज़िन्दगी ज़िया करते हैं, ख़्वाहिशों के मुताबिक़ नहीं ज़िया करते हैं। ज़रूरतें तो ग़रीबों की भी पूरी हो जाती हैं, ख्वाहिशें, बादशाहों की भी अधूरी रह …

‘ज़िन्दगी’ में उल्फ़ियत तो है

‘ज़िन्दगी’ में उल्फ़ियत तो है,सब के मन में बन्दियत तो है।कसर भी नहीं रही कुछ भी,इंसानियत ही तो मन में है।गुमांन करते फिरें शख़्स ख़ुद पर,ऐसी उनमें वसी आवारगी …

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी, ज़िन्दगी की हो गई।पर हमें रूसबा और बेख़बर कर गई।ज़िन्दगी की तलाश में घूमा यूँहीं।फ़िक्र मेरी और हद से बढ़ गई।सिलसिला चलता रहा राहों में यूँहीं।खुले आम उनकी …

नभ खुली आँखों से देखे

नभ खुली आंखों से देखे, दुःखी दिख रहे हैं सारे। दूषित बसन यह कैसे छाय?, भीड़ लगाए पर सब हारे।शून्य का मन क्यों व्याकुल?, और आंखों में छाय आंसू …

क्यों

क्यों ना उन पर?, मैं फ़ना हो जाऊं ?ज़ज़्बे टूटे हैं जिनके, उनमें समा क्यों ना जाऊं?गुजारिशे की जिसने नेक सी, क्यों ना मैं रहनुमां हो जाऊँ?तकल्लुफ़ कर बैठे …

ख़ामोशी

देखो कैसे याद दिलाती है?, उन बातों को ख़ामोशी।क्या हुआ था-क्या नहीं?, फ़िर यह कैसी मदहोशी?कुछ पूछे या कुछ बोले, तब क्या बतलाए ख़ामोशी?दुःख कैसा और कितना है?, तभी …

प्यारी कोयल

प्यारी कोयल-प्यारी कोयल, तू इतना प्यारा कैसे गाती है?तू क्या खाती और क्या पीती?, तू मुझको क्यों नहीं बतलाती है?कू-कू ,कू-कू तेरी बोली, मन में मेरे घर कर जाती …

ज़िन्दगी हमें झकझोरती रही

ज़िन्दगी हमें झकझोरती रही, फ़िक्र के फन्दों में उलझाती रही। सुन-अनसुने हालातों में डूबा, जो हमें डुबाते ही गये। किस्तियाँ भी बनीं जले बांसों की; और समंदर में कहाँ …

अब तो मचा है हाहाकार

अब तो मचा है हाहाकार, वृक्ष बिना बुरा हुआ है हाल।मानव ने यह किया कमाल, ख़ुद को पाएं नहीं सम्हाल।कैसे-कैसे अब किए हैं खेल?, हाल बुरा है पेलम-पेल।गर्मी ने …

आवारा भटकता फ़िर रहा हूँ

आवारा भटकता फिर रहा हूँ मैं,जाने क्यों उनकी यादों में।इस तरह यह ज़ीवन आधा गुजारा ,आरज़ू भी करते हैं ,फरियाद करते हैं।मैं हूँ एक ऐसा बेचारा !इस जहाँ में …

वर्षा देखकर हर्षा दिल

वर्षा देखकर हर्षा दिल, रिमझिम-रिमझिम-हिलमिल हिल।प्यासी धरा अब हो उठी खिल, बिजली चमकी चिल-चिल-चिल।बच्चे दौड़े हिल मिल हिल, बच्चे गये तब सभी फिसल।मेढ़कों के अब बने महल, और ज़ोर …

फ़टी झोली और फ़टे हाल हैं

माँग लिया हमने कुछ उनसे,झट उन्होंने मुख अपना मोड़ा।तोड़ लिए अपने दरवाजे,टक-टकी लगाए मैंने देखा ऐसे।कुछ मिल जाए-कुछ मिल जाए ,यह उम्मींद लगाए मैं बैठा।कुछ देख फिर मैंने ,अपने …

सुबह का फ़रमान

सुबह का जब फ़रमान आता है,कुछ कसकसाते हैं, कुछ मसमसाते हैं।कुछ उठ जाते हैं ,कुछ सिमटकर रह जाते हैं।कुछ इसका इस्तकेबाल करते हैं।कुछ तार-तार करते हैं।कुछ सूरज की तरह …

क़िस्मत

किस्मत ना तो वरदान है,और ना ही यह फ़रमान है।जो ज़िए इसके सहारे,रास्ते ग़ुमनाम हैं।अनज़ान यूँ छोर हैं,ख्वाहिशों के शोर हैं।हाँकते फ़िरते मग़र वे, समझते की हम नूँर हैं।चल …

चाहतें

चाहतें तो बहुत होती हैं, कुछ छोटी-कुछ बड़ी, होती हैं।कुछ माँगने से मिल जाती हैं, कुछ बिन माँगे पूरी हो जाती हैं।चाहतों की लड़ी लम्बी होती है, माँगने वालो …

ज़िन्दगी जब भी अपना पता देती है

ज़िन्दगी जब भी अपना पता देती है,ग़म कितने हैं यह बता देती है।सह भी लेते हैं लोग अक्सर इसको,फिर भी अक्सर रुला देती है।फ़िक्र जब बढ़ जाती हैं खुशियों …

मैं पवन होता

मैं पवन होता तो, नदियों आकाश-पाताल तक उड़ता।तरु के पातों को स्पर्शित कर, मैं जन-जन को हर्षित करता।पहुँच यदि तरिणी तक, तो मृदु तरंगों के सह बहता।ले थोड़ी सी …