Category: सजन कुमार मुरारका

बात बात में

बात बात में मजहब की वो ढाल उठाते रहते हैं.जब देखो वो नियम कानूनों की बाट लगाते रहते हैं.भेजा उनका सड़ा दिया राजनीति की चालों ने. इसीलिए वे आगे …

#उठा_न_पाते_पत्थर_तुम 

#उठा_न_पाते_पत्थर_तुम   —————————- काश न होता हाथ तुम्हारे । उठा न पाते पत्थर तुम ।। काश न होता इतनी नफरत , उठा न पाते पत्थर तुम। नफ़रत की आग में …

 एक कदम घर की ओर  ———————-

 एक कदम घर की ओर  ———————- कदम बढ़ा रहा था , जाने क्यूं ओ घर की ओर । था पता उसे, नहीं है कुछ खाने को वहां, फिर भी …

 जिसने देश का मान बढ़ाया

 जिसने देश का मान बढ़ाया            ———————————–  जिसने देश का मान बढ़ायाजीता मेडल नाम कमाया । सुन ली गर्जन वीर शेरनी की ।क्रोधित शेरनी ने …

 कोरोना का कहर  —————–

 कोरोना का कहर  —————– कैसा है ये महामारी का डर ।कैसा हैं ये कोरोना का डर ।। थम सी गई है जिंदगी सबकी ।रुक सी गई है जिंदगी सबकी …

लगी जो आग इस ज़माने में ।

लगी जो आग इस ज़माने में वो बुझे कैसे, उठी दीवार ये जो दरमिया गिरे कैसे। दरारे पड़ रही बचपन की मुस्कुराहटों के बीच,बढ़ रहीं दूरियां दिल की, ये …

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

बदलता जमाना

वक़्त है आज गुजर जाएगातेरा साथ है एक दिन छूट जाएगाबदलेगा जमाना तू भी बदल जाएगावक़्त है आज गुजर जाएगातू आज साथ हैमै बड़ा जो हूँकल मै छोटा होंगातू …

भीड़ मे खो जाने दो

भीड़ है भीड़ मे खो जाने दोकुछ अपना सा हो जाने दोतनहा हूँ मैं , तनहा हो जाने दोएक बस मकसद है , पूरा हो जाने दोभीड़ मे मुझे …

जल रहा हैं हिन्दुस्तान

“आरक्षण की आग मे जल रहा हैं हिन्दुस्तान”,शिक्षा नौकरी पाने को बिक रहे हैं कई मकान,ठोकरे मिलती हैं यहा मिलता नही हैं ग्यान…. “आरक्षण की आग मे जल रहा …

जिन्दगी

जिन्दगी के दस्तूर बड़े निर्जीव हसंता-रोता खेलता मौत के ठिकाने पहुंचने सजीव इसका तानाबाना यादों के धागों मे बुन थमा जाते कुछ दमकते चिराग जिस का असर अज़ीब रोशनी …

यादों का शिकार

असमंजस परिस्थिति-का एहसास, दिल में ये र्दद कब उठा ? कब शरीर का एक-एक हिस्सा, ज़मकर बेज़ान होने लगा? अब जख्मीं हालात मे; आगे धूप से तप्ते पल, पत्थरों …

मिलन

है आसमान मैं धरती मिलन प्यासी सदीयों से भ्रमित क्षितिज मे मिलन आश्वासित जितनी पास जाती तुम दूर हो जाते पर जब बरसाते स्नेह की धारा पल्लवित आशायें तुम …

प्यार के एहसास

सिमटी कोई लज़्ज़त- जैसे बाँहों में खामोशी से सीने में रंग भर दे, वैसे ही सहसा,बिन आहट, किसी ख़ास लम्हे को पिरोने रंगों मे हसरत मुहब्बत को सजाने लरज़ते …

पाती प्रेम की

शब्द शब्द हैं मुखर नेह अनुवादों की अक्षर अक्षर गमक रहा सुगंध देह की स्याही महकी यादों की फ़ैल गई सुरभि अन्तरमन की मन बहके खुशबु सोंधापन की सजल …