Category: रमेश तैलंग उड़न खटोले आ

इकड़ी-तिकड़ी

इकड़ी-तिकड़ी, तिकड़म ता । हुआ सबेरा, अब उठ जा । इकड़ी-तिकड़ी तिकड़म-ता । दाँत माँज कर, रोज़ नहा । इकड़ी-तिकड़ी तिकड़म-ता । मान बड़ों का, सदा कहा ।

बग़ीचा

हरी घास का, बिछा गलीचा । सुन्दर-सुन्दर सजा बग़ीचा । ठंडी-ठंडी हवा चल रही, फूलों पर तितली मचल रही, यहाँ बैठकर, मन बहलाओ । जैसे पंछी, गाते, गाओ ।

उड़ा कबूतर

में…में बकरी मटक-मटक चली तो रस्ता गई भटक । ब-ब-बचाओ ! गले में उसके- बोली निकली अटक-अटक । ०० टिक-टिक घोड़ा टिम्मक-टिम । चलता डिम्मक-डिम्मक डिम । जिसने छोड़ी ज़रा …