Category: कुमार आदित्य

जब दर्द फिसल कर….

जब दर्द फिसल कर उतरने लगते हैं पन्नो पेतब कर्ज़दार हो जाते हैं मेरे ये कलम,उन्हें आए दिन स्याहियां जो उधार लेनी पड़ती हैं .”Copyright” © ( नितेश बनाफ़र …

अगर कभी मेरी याद आए…….

अगर कभी मेरी याद आए तो खिड़की से पर्दा हटाकर उस अधूरे चाँद को देख लेना,वो सिसकता हुआ तुम्हारे कदमो में उतरेगा, फिर मैं मिलूँगा तुम्हे उस चाँद की …

मजदूरों ने बनाया था …..

जब कभी खून की दरकार हो तो अस्पतालों में भटकने से अच्छा घर की दीवारों को कुरेद कर देख लेना ,वो तुम्हे वहां मिल जाएंगे,इन्हें कुछ मजदूरों ने कभी …

बड़ी शिद्दत से…

बड़ी शिद्दत से करते हैं तुम्हारी मोहब्बत का कारोबार,पर शाम आते-आते मुनाफ़ा तो नहीं पर ख़ुद बिक जाते हैं. Nitesh banafer(kumar aditya) Оформить и получить экспресс займ на карту …

एक थी बिटिया,सोन की चिरैया…

एक थी बिटिया,सोन की चिरैया,घर आँगन सुना कर उड़ चली वो गुड़िया।मौसम सी कली मन था केसरिया,खुशबुओं में रंग तलाशती हर वो दूसरी गलियां।सपनो के बीज् से,खिलाती आशाओं की …

मेरे दरवाज़े की उम्र हो चली है ….

मेरे घर में सिसकते इस पुराने दरवाज़े की अब उम्र हो चली है,अपनी हर आख़िरी साँसों की एवज में ये टूटते बिखर रहे हैं.ये चौखट भी अब इस बूढ़े …

शायद लौट आये वापस वो पन्नों में…..

ना जाने उस कविता का रंग क्या था, ना जाने उसका वो उमंग क्या था, दिल ढूंढ रहा है आज उसे पुराने पन्नो में, कहीं वो शब्द मेरे रूठे …