Category: कमलेश संजीदा

प्लेसमेन्ट एजेंसी

प्लेसमेन्ट एजेंसी धड़ल्ले से चल रही हैं क्यों कि बेरोजगारों की संख्या बढ़ रही हैं तीन से छ महीने की सैलेरी एडवांस ले रहे हैं और खूब प्लेसमेन्ट करा …

सरकारी तंत्र ( ५ मई २०१२)

जैसे ही नौकरी मिली, सरकार को समर्पण कर बैठे अपना सब कुछ जैसे, गवर्नमेंट को अर्पण कर बैठे खुशियाँ हर वक़्त, दिल मैं छाने लगीं और सरकारी तंत्र की, …

आज का नेता (१७ जनवरी २००६)

नेता बना ऐसा कि, लेता चला गया गरीब की झोली में, आँसू भरता चला गया न बस चला तो, उसका भी खून बहा दिया गद्दार साबित करके, एन्काउन्टर करवा …

किताबें और अस्तित्व

किताबों की कहानी, आनी -जानी रही धूल ऐसी चढी, किताब रोती रही इंतजार की इम्तहां, होती रही और पलकें बिछाये , बैठी रही I जब अस्तित्व ही किताबों का, …