Category: इंदर भोले नाथ

गज़ल

जीन्हे भुलने में है…..हमने उम्र गुजारीकाश़ हम उन्हें दो वक्त याद आये तो होतेंबहाया अश्कों का सागर यादों में जिनकेकाश़ वो आंसुओं के दो बूंद बहाये तो होतेंजीन्हे भुलने …

वो यादें…………….

कागज़ की कश्ती बनाके समंदर में उतारा था हमने भी कभी ज़िंदगी, रईशों-सा गुजारा था,बर्तन में पानी रख के ,बैठ घंटों उसे निहारा था फ़लक के चाँद को जब, …

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फ़िक्र रहा न जाने का किसी का राह-ए-ग़ुजर मे,ये ज़िक्र लिए जेहन मे सफ़र पे तन्हा हो चलें… Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые …

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हमारा ज़िक्र और चलेगा तेरी महफ़िल में अभीं,ज़िन्दगी को थोडा और बे-नक़ाब तो होने दो… Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день …

तूँ चाँद है फलक़ का

तूँ चाँद है फलक़ का,मैं मिट्टी का बादशाहतूँ ख्वाहिश है दिलों की,मैं यूँ ही बे-वजहतूँ हुस्न है चमन का,मैं ख्वाहिश-ए-वीरानतूँ आगाज़-ए-आसमान है,मैं बुझता कारवाँ Оформить и получить экспресс займ …

वो मकाँं बाकी है…..

अबसारों पे अब भी दीद की निशाँ बाकी हैनाकाम-ए-इश्क़ मे अब भी इम्तेहाँ बाकी हैगुजर जाते हवाओं सा तेरे शहेर से “लेकिन” जर्जर हुआ अब भी वो मकाँं बाकी …

ज़ारी रहा मेरा…

मंज़िले मिलती रहीं लेकिन सफ़र ज़ारी रहा मेरा,हुए मुख्तलिफ-ए-राह-ए-गुज़र लेकिन खबर जारी रहा मेरा…मुकम्मल ख़्वाब न हो शायद ये भी महसूस होता हैउम्मीद-ए-कारवाँ पे लेकिन नज़र ज़ारी रहा मेरा…उन्हे …

दिल-ए-खल्क़ मे

गम-ए-दरिया उतर आया दिल-ए-खल्क़ मे,कुछ इस क़दर अल्फ़ाज़ ने मुरीद बना दिया…. Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский …

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युं ही बिकते रहें जमाने मे,कभी महफिल,कभी मयखाने में…पैमाने छलकते रहें,यादों को मिटाने मे,खो दियें खुद को ही “ऐ-जिन्दगी” तुझे भुलाने में……इंदर भोले नाथ Оформить и получить экспресс займ …

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निकल पड़े फिर आज किसी चांह की तलाश मे,’ऐ-जिन्दगी’ ये सफर-ए-कारवां तुं युंही जारी रख…….इंदर भोले नाथ Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды …

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अभी न ठहर ऐ-जिन्दगी,बाकी कारवां और भी है…अभी तो बस देखी जमीं हमने,बाकी आसमां और भी है……इंदर भोले नाथ Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на …

अधुरी क्यूं है…

तुं पास होकर भी, ये दुरी क्यूं हैहमें तन्हा छोड़ जाना जरूरी क्यूं है,कभी तो हमसे मील मुकम्मल होकर”ऐ-जिन्दगी” तुं मीलती अधुरी क्यूं है…….इंदर भोले नाथ Оформить и получить …

यादों के पन्ने से…..

हर शाम…. नई सुबह का इंतेजारहर सुबह….वो ममता का दुलार ना ख्वाहिश,ना आरज़ूना किसी आस पे ज़िंदगी गुजरती थी…हर बात….पे वो जिद्द अपनीमिलने की….वो उम्मीद अपनी था वक़्त हमारी …