Category: गोकुल चन्द्र उपाध्याय

मैंने ज़िन्दगी गुलाम कर दी

मैंने ज़िन्दगी अपनी गुलाम कर दीतेरे नाम अपनी हर शाम कर दी मेरा साया भी ना रहा साथ मेरेमैंने जो रौशनी तेरे नाम कर दी वो ढूँढता रहा पहचान …

बर्बादी का मंज़र

मेरी बर्बादी का मंज़र भी उस आसमां के नीचे हुआ जिसे हम देखकर अक्सर दुआएं मांगा करते थे..!! ~गोकुल चंद्र उपाध्याय Оформить и получить экспресс займ на карту без …

मशगूल हुए रुसवाई में

वो कुछ यूँ मशगूल हुए मेरी रुसवाई मेंकहीं अब उम्र ना बीत जाये यकजाई में..!! ~गोकुल चंद्र उपाध्याय Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в …

तेरी चाहत में दिल बन गया आवारा

इश्क़ हमें ना था कभी गवारातेरी चाहत में दिल बन गया आवारा !! वो शरमा गये देख मेरा इशारापर किस्मत को ना था मंजूर ये नज़ारा !! जो ना …

मज़हबी परदा ना होता

काश! तुझसे मिलने का वादा ना होतातेरे करीब आने का इरादा ना होतामुक़म्मल दास्ताँ तो हमारी भी होतीगर दरमियाँ ये मज़हबी परदा ना होता..!! ~गोकुल चंद्र उपाध्याय Оформить и …

तू ख़ुदा तो नहीं

तू ख़ुदा तो नहीं, जो अब तेरी इबादत करूँ अरे! मुझे डुबाकर दरिया पार किया है तूने अब तुझसे कैसे बयां ये अज़िय्यत करूँ..!! ➡️★★★★★★★★★★★★★★★★★★⬅️ तू ख़ुदा तो नहीं, …

इन आंखों में

इश्क़ का दाग गहरा दिखाई देता है‘इन आंखों में’ तेरा चेहरा दिखाई देता हैकभी मिलो किसी राह तो लिपट जाऊँ तुमसेयहां तो ज़माने का पेहरा दिखाई देता है..!! ~गोकुल …

क्यों करती हो किसी और की आशा

मैंने खुद को खोकर तुम्हें, तुमसे मिलायाइश्क़ की राहों में चलना सिखायासिखायी मैंने तुम्हें प्रेम की परिभाषाफिर क्यों?तुम करती हो किसी और की आशा..!! Оформить и получить экспресс займ на карту …

नया रिश्ता बनाने में

बुनी हुई ख़्वाहिशों को अब कोरे कागज पर सजाते हैटूटी हुई उम्मीदों को फिर से जगाते हैअब ‘नया रिश्ता बनाने में’ ख़ुद को उलझाते हैना दरक पड़े फिर इस …

सुकूँ पाने लगा है दिल

अब सुकूँ पाने लगा है दिलतेरी पनाह में आने लगा है दिलअब राह-ए-पुर-ख़तर आसान है मेरीजो तेरी निगहबानी में रहने लगा है दिल!! ~ गोकुल चन्द्र उपाध्याय Оформить и …

यादों में तुझको ही पाऊं – गोकुल उपाध्याय

 तेरे बिन अब जी नहीं लगताकटती है न रातेबीते पल की याद हमेशाआँसु बनकर आती…खुश होते कभी देख तुझे हमआज है तुझसे रूठेदेख रकीब की बाहों में तुझेअंदर से …

सपना(कल्पना या हकीकत)

माँ के आँचल में लिपटेदेखा मैंने एक सपनाचारों ओर खुशियां ही खुशियांलगता कभी ऐसा था जग अपनास्वार्थ और ईर्ष्या रहितसच्चाई और प्रेम सहितन कोई रावण न कोई लंका खुशियों …

समुद्री लहरें

समुद्र की लहरों से अनसुनी आवाज निकलती कहना भी चाहें लहरें कुछ जुबां इनमें कहाँ होती मैंने समझी मैंने जानी इन लहरों की आवाज समुद्र से निकलकर अस्तित्व ढ़ूँढ़ती …

जागृति का उदय – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

गुलामी की जंज़ीरों को तोड़ लाचारी से नाता जोड़ कब तक तू बच पाएगा भारत माँ की मिट्टी में तू धूल -२ हो जाएगा सूख गए वो पेड़ सारे …

एक – दूजे से तार – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

चाँद भी हो जाये काला जो सूरज से न हो उजियाला जड़े भी वे है सूखी धरती से जो ऊपर उठी पानी भी है वो मटमैला जो कंकड़ – …

सूखा पेड़ – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

दूर खेत किनारे एक सूखा पेड़ खड़ा बंजर भूमि जैसा ही बंजर वो पेड़ पड़ा जिसकी छाव में बच्चे खेलते थे कभी टहनियों में उसकी झूलते थे कभी जो …

अमर शहीद – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

मिट गया जो वतन की माटी पर वीर वो याद किया जाएगा जन्मा था वो जिस माटी पर कर्ज़ उतारे बिन ना जायेगा हिंदुस्तान उसका एक शब्द था ना …

इंतजार – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

यूँ तन्हा अकेले जिए जा रहा हूँ है इंतजार…………. है इंतजार जज्बातों को अपने सिमेटे जा रहा हूँ है इंतजार…………. है इंतजार जबसे है देखा तुझे थम सा गया …

इज़हार – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

ना जाने कब होगा इज़हार मेरी मोहब्बत का, ना जाने कब होंगे बयां लव्ज़ मेरे । चाहता हूँ तुझे इस कदर, कह भी न पाया, कह भी ना पाऊं …

झूठे वादे – गोकुल चन्द्र उपाध्याय

ना करने थे वो वादे, ना देनी थी ये यादें। जिनसे जुडी है तेरी-मेरी मुलाकातें। जाने क्यों मुझको छोड़ गया तू, जैसे गगन को टूटता तारा । भूल ना …