Category: गौतम राजरिशी

खोल ना गर मुख जरा तू, सब तेरा हो जाएगा

खोल ना गर मुख ज़रा तू,सब तेरा हो जाएगा गर कहेगा सच यहाँ तो हादसा हो जाएगा भेद की ये बात है यूँ उठ गया पर्दा अगर तो सरे-बाज़ार …

खुद से ही बाजी लगी है

खुद से ही बाजी लगी है हाय कैसी जिंदगी है जब रिवाजें तोड़ता हूँ घेरे क्यों बेचारगी है करवटों में बीती रातें इश्क ने दी पेशगी है रोया जब …

कितने हाथों में यहां

कितने हाथों में यहाँ हैं कितने पत्थर, गौर कर फिर भी उठ-उठ आ गये हैं कितने ही सर, गौर कर आसमां तक जा चढ़ा संसेक्स अपने देश का चीथड़े …

एक मुद्‍दत से हुए हैं वो हमारे यूँ तो

एक मुद्‍दत से हुए हैं वो हमारे यूँ तो चांद के साथ ही रहते हैं सितारे, यूँ तो तू नहीं तो न शिकायत कोई, सच कहता हूँ बिन तेरे …

ऊँड़स ली तूने जब साड़ी में गुच्छी चाभियों वाली

ऊँड़स ली तूने जब साड़ी में गुच्छी चाभियों वाली हुई ये जिंदगी इक चाय ताज़ी चुस्कियों वाली कहाँ वो लुत्फ़ शहरों में भला डामर की सड़कों पर मज़ा देती …

उनका हरेक बयान हुआ

उनका एक बयान हुआ दंगे का सामान हुआ कातिल का जब भेद खुला हाकिम मेहरबान हुआ कोना-कोना चमके घर वो जबसे मेहमान हुआ बस्ती ही तो एक जली ऐसा …

उठेंगी चिलमनें फिर हम यहाँ देखेंगे किस-किस की

उठेंगी चिलमनें फिर हम यहाँ देखेंगे किस-किस की चलें,खोलें किवाड़ अब दब न जाए कोई भी सिसकी जलूँ जब मैं, जलाऊँ संग अपने लौ मशालों की जलाए दीप जैसे, …

आईनों पे जमीं है काई लिख

आईनों पर आज जमी है काई, लिख झूठे सपनों की सारी सच्चाई, लिख जलसे में तो खुश थे सारे लोग मगर क्या जाने क्यूं रोती थी शहनाई, लिख साहिल …