Category: एकान्त श्रीवास्तव

ख़ून की कमी

टीकाटीक दोपहर में भरी सड़क चक्कर खा कर गिरती है रुकमनी ख़ून की कमी है कहते हैं डाक्टर क्या करे रुकमनी ख़ुद को देखे कि तीन बच्चों को पति …

करेले बेचने आई बच्चियाँ

पुराने उजाड़ मकानों में खेतों-मैदानों में ट्रेन की पटरियों के किनारे सड़क किनारे घूरों में उगी हैं जो लताएँ जंगली करेले की वहीं से तोड़कर लाती हैं तीन बच्चियाँ …

अनाम चिड़िया के नाम

गंगा इमली की पत्तियों में छुपकर एक चिड़िया मुँह अँधेरे बोलती है बहुत मीठी आवाज़ में न जाने क्या न जाने किससे और बरसता है पानी आधी नींद में …

अन्तर्देशीय

धूप में नहाया एक नीला आकाश तुमने मुझे भेजा अब इन झिलमिलाते तारों का क्या करूँ मैं जो तैरने लगे हैं चुपके से मेरे अंधेरों में क्या करूँ इन …

बहनें-2

बहनें घर-भर में सुगंध की तरह व्याप्त हैं एक दिन उड़ जाएंगी जाने किन पवन झकोरों के साथ रह जाएगा तेज़ धूप में भी हमारी कमीज़ों पर उनके हाथों …

माँ की आँखें

यहां सोयी हैं दो आंखें गहरी नींद में मैं अपने फूल-दिनों को यहां रखकर लौट जाऊंगा लेकिन लौट जाने के बाद भी हमें देखेंगी ये आंखें हम जहां भी …

दवा वाले दिन

अब खाट से उठेंगे मां के दुःख और लम्‍बे-लम्‍बे डग भरकर कहीं गायब हो जायेंगे और जो बचेंगी छोटी-मोटी तकलीफें उन्‍हें बेडियों की तरह वह टांग देगी घर की …

माँ का पत्र

गांव से आया है मां का पञ टेढ़े-मेढ़े अक्षर सीधे-सादे शब्‍द सब कुशल मंगल मेरी कुशलता की कामना पैसों की जरूरत नहीं अच्‍छे से रहने की हिदायतें और बाकी …

पालना

जब भी गाती है मां हिलता है पालना पालने में सोया है नन्‍हां-सा फूल जिसकी पंखुडियों में बसी है मां के सबसे सुंदर दिनों की खुशबू पालने में सोया …

पंडुक

वे अकेले पक्षी होते हैं जिनकी आवाज से लगातार आबाद रहती हैं जेठ-बैशाख की तपती दोपहरें वे पंडुक होते हैं जो जलती हुई पृथ्‍वी के झुलसे हुए बबूलों पर …

पहाड़

पहाड़ बच्‍चों के सबसे अच्‍छे दोस्‍त हैं उनकी छोटी-छोटी इच्‍छाओं और सपनों के लिए चिन्तित छोटी-सी इच्‍छा है बच्‍चारें की कि वे पहाड़ के कंधे पर बैठकर उड़ायें अपनी …

सपने

सपने थकान भरी रात में जल-तरंग की तरह बजेंगे हमारी याञा में हिलेंगे पेड़ों की सघन पंक्ति की तरह सपने हजार-हजार पक्षियों के कंठ एक साथ खुलेंगे मौसम की …

नाचा

नचकार आए हैं, नचकार आन गाँव के नाचा है आज गाँव में उमंग है तन-मन में सबके जल्‍दी राँध-खाकर भात-साग दौड़ी आती हैं लड़कियाँ औरतें, बच्‍चे और लोग इकट्ठे …