Category: धर्मेन्द्र कुमार निवातियाँ

प्यार करेंगें-प्रेम गीत – डी के निवातिया

प्रेम गीत*** *** ***…….प्यार करेंगें…..*** *** *** कसम की कसम तुमको इतना प्यार करेंगें,हर दिन हर पल हम, प्रेम की बौछार करेंगे,यादों में आयेंगें, कभी हम ख्वाबो में आयेंगे,शरारत …

चना-आलेख-डी के निवातिया

*चना* ‘चना’ अपने नाम के जैसे भी खुद भी छोटा सा ही है, हाँ है तो छोटा ही मगर अपने गुण, प्रकृति, स्वभाव व आचरण से उतना ही विशाल …

वक़्त की चाल – डी के निवातिया

वक़्त की चाल *** जो आज वफ़ा की दुहाई देते है, कौन जाने ये कब बेवफा हो जाएंगे !जो आज बेवफा है चोला बदलकर, वफादार के भेष में नजर …

बीत गए सो बीत गए – डी के निवातिया

बीत गए सो बीत गए *** दिन महीने साल बीत गए सो बीत गए,कुछ पलों से हारे, हम, कुछ से जीत गए, वक़्त की धारा में, बहती जाए जीवन …

हद से गुजरते है – D.K. निवातिया

हद से गुजरते है *** जीने की चाहत में हद से गुजरते हैमौत की आहट में जद से गुज़रते हैहर दिन एक नया शगूफ़ा राह अटकें,नेक से लेने बदला …

पूजा – हाइकू – डी के निवातिया

विषय : पूजाविधा : हाइकू******** १)स्वर्ग की प्राप्तिमात पिता की पूजा !आत्मीय तृप्ति !! २)कर्म ही पूजा,सत्य भाग्य विधाता,पथ न दूजा !! ३)पूजा का नाता,गुरु, मात-पिता से,यही विधाता !! …

वादा – हाइकू – डी के निवातिया

विषय : वादाविधा : हाइकू***********१)याद है वादा,बाटेंगे सुख दुःखजो आधा आधा !! २)तेरा इरादा,नफरत मिटाना,था झूठा वादा !! ३)एक वादे पे,कुर्बान ये जहान,दोस्ती महान !! ४)वादा टूटे ना,निभाना ऐसे …

दोहे- मनुष जात – डी के निवातिया

मनुष जात से पशु भला, करे न खुद से घात ।मिथ्या नाता छल कपट, सखा न जाने तात ।। मानव जन सबसे बड़े, दुनिया में शैतानजन्म लिया जिस पेट …

औक़ात – डी के निवातिया

औकात ! कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो कोई कितना भी मालदार क्यों न हो, औक़ात खुद के लिए कफ़न की नहीं, कोई कितना भी दानदार क्यों न …

रुख़सत – डी के निवातिया

रुख़सत ! गुमनाम होकर रुख़सत कर जाऊंगा तेरे शहर से, गर एक बार तू अपने लबों से मेरा नाम पुकार दे !! ! डी के निवातिया Оформить и получить …

बात बड़ी है – डी के निवातिया

बात बड़ी है हिय-उपवन में, लालसा के अंकुर फूटे, मंत्रमुग्ध हो, गौरैया सी चहचाने लगी, क्षितिज की शाख पर, क्रंदन करती, फुदकती, नवजीवन के सपने संजोती, सप्तरंगी सपनो में …

*दीपावली*

दीपमाला की रौशनी से आँगन जगमगायेंगे, खुशियों की फुलझड़ियों से दिल मुस्कुरायेंगें, अम्बर ओढ़ेगा झिलमिल सितारों की चुनर, धरा पर लक्ष्मी-गणेश, राम जी उतर आयेंगे !! सुख-समृद्धि के प्रतीक …

रिश्तें – डी के निवातिया !!

  रिश्ते पुष्पों से महकते है कभी, कांटो से चुभते है, सरिता से बहते है, कभी, सागर से ठहरते है, बादल से बरसते है, कभी, बिजली से गरजते है, …

प्रेम – डी के निवातिया

प्रेम कविता जिसका प्रदर्शन हो,वो प्रेम नहीं, नयनों से दर्शन हो, वो प्रेम नहीं !!!जो हम-तुम करते है,प्रेम वो नही,जो मन मे विचरते है, प्रेम वो नही !!!कलम के …

सोचा न था – डी के निवातिया

सोचा न था !सोचा न था एक रोज़ इस मोड़ से गुजरना पड़ेगा, जिंदगी को मौत से पल-पल खातिर लड़ना पड़ेगा,चलते-चलते लड़खड़ा जाएंगे पग कठिन राहो में फिर गिरते-गिरते …

खुला आसमान चाहिए – डी के निवातिया

खुला आसमान चाहिए चन्द ज़मीं का टुकड़ा नहीं मुझे पूरा जहान चाहिए, मैं बेख़ौफ़ परिंदा हूँ मुझको खुला आसमान चाहिए !! ! कोई बने मालिक हवेलियों के, महलों में …

करवा चौथ – डी के निवातिया

सोलह श्रृंगार,सुहागिनी गहना, प्रीतम प्यार !! !करवा चौथ अनुपम त्योंहारमहत्ता प्यार !!!यम को मात, बचायें पति प्राण,  सती को दात !!!करवा चौथ,चन्द्रमा का पूजन, दाम्पत्य योग !!  !अनूठा प्रेम,छलनी …

मिट रहा प्रकृति श्रृंगार – डी के निवातिया

ऋतुओं के संग-संग मौसम बदले,बदल गया धरा पे जीवन आधार, मानव तेरी विलासिता चाहत में, उजड़ रहा है नित प्रकृति का श्रृंगार, दरख्त-बेल, घास-फूंस व् झाड़ियाँ, धरा से मिट …

दिल से लगाना छोड़ दिया – डी के निवातिया

दिल से लगाना छोड़ दिया हर एक बात को दिल से लगाना छोड़ दिया मैंने, अब बेवजह इस दिल को दुखाना छोड़ दिया मैने, शराफत करके जो नतीज़ा पाया …

जीने का आनंद – डी के निवातिया

ज्ञान बाँटने के लिए दुनियाँ काफी है,आप बस जीने का आनंद लिया करो ! बेहिसाब बेवक्त अनमोल जिंदगी मिली है,इसका भी कभी कुछ लुफ्त उठा लिया करो ! न …

हे प्राण प्रिये ! आ जाओ – डी के निवातिया

हे प्राण प्रिये ! आ जाओ ! ! अब कंठ क्षीण हो आया कब से नहीं तुमको पाया विरह ज्वाला में जलते हुए निर्जन कंटक पथ चलते हुए नयनो …

दास्ताँ – डी के निवातिया

चलते आ रहे जिस पर हम वो राह पुरानी हैमिलेंगे हमसफ़र अपने यही ये चाह पुरानी है बीते लम्हो में, नीरस, कितनी उम्र गुजारी हैदास्ताँ हर एक पल कि …

अनमोल तोहफा – डी के निवातिया

मुझसे दूर जाकर, मेरे ओर करीब आ गई, अमर होकर “माँ” तू अब मुझमे समा गई !! नासमझ थी मैं, जो तुमको खोकर रोई,मालूम न था, मैं तुमको सर्वस्व …

माँ बाप का दिल – डी के निवातिया

माँ बाप का दिल ! जिस सुत ने माँ बाप के सुख दुःख को नकारा है, संगनी ने भी जिनको बात बे-बात पर दुत्कारा है, फिर देखो उन माँ …

शुक्रिया अदा करना – डी के निवातिया

शुक्रिया अदा करना ! जाते हुए लम्हों को ज़रा हँसते हँसते विदा करना पल ख़ुशी के थे या गम के, शुक्रिया अदा करना ! लौटकर न आएगी ये फ़िज़ा, …