Category: देवेश शास्त्री

निन्दक

निन्दक खोजन को चला मिला न हमकों एकनेक-नेक तुम नेक हो कहते मिले अनेककहते मिले अनेक नेक भी ग्लानि न छाईजैसे चलती जौंक चीरती जाती काईकहें सुकवि देवेश देशभर …

कविता-मर्मज्ञ काव्यसाधक थे ‘आचार्य रूपेश’

– देवेश शास्त्री —————- 1 फरवरी 2019 शुक्रवार  को जुटेगा मंचीय कवियों-काव्यसाधकों का मेला शुक्ल परिवार बूढ़ादाना एवं हिमांगिनी साहित्य समिति द्वारा दिवंगत महाकवि रूप नारायण शुक्ल ‘‘रूपेश’’ की …

हिन्दी-दिवस पर

अंग्रेजी है मैडम उनकी, उर्दू इनकी शहजादी।हिन्दी राजकुमारी अपनी, संस्कृत सबकी परदादी।।भारतमाता के माथे की आभावत चमके बिन्दी।तन-मन जिसपर न्यौछावर हो, वह ही है अपनी हिन्दी।।चिन्तन हिन्दी, मन्थन हिन्दी,अध्ययन-अध्यापन …

‘वोट-दिमाग’ में दूरियांे से पराभव!

हाल के चुनाव में समाजवादी पार्टी के पराभव के दो पखवाड़े के बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए नेताजी ने ऐसा दुखड़ा ‘‘5 साल तक निरंतर होता रहा अपमान’’ रोया, …

पराभव

चैसठ चतुर्युगी शासन पर हावी चालिस साल विहंगम।क्रमिक हुआ अतिक्रमण, अन्ततः पैत्रिक संपत् मान रहे जम।दिल का ज्ञानचक्षु कर वेधन, धनकुबेर को लूटा जमकर-पुष्पक छीन बनेे जो अधिपति, शुरू …

सत्य

जिसे कहा औचित्यहीन, उसकी सत्ता का बल देखा।जिसका नहीं अभाव कहा, उसका पोषक निर्बल देखा।खेल रहा प्रारब्धबद्ध, पर उसको क्या पहचान सकोगे?सत्य करमगति सैद्धान्तिक है, विभव-पराभव का लेखा।। Оформить …

इतिहासकार

है अतीत इतिहास तो, उस पर कालिख लेप।बन इतिहासकार वे, ढोते आये खेप।।ढोते आये खेप, बन आक्रान्ता-पिट्ठू,जिनके भ्रम जंजाल ने माना उनको टट्टू,धन्य अहो इतिहास, हो रहा है जो …

कद-पद !

कद-पद या कि उपाधियां, पहुचें आधि-समीप।चित्त-वृत्ति तूफान में, विचलित हो ज्यों दीप।।विचलित हो ज्यों दीप, सीप वत् मोती ढालें।अनासक्त ही भोगें कद-पद भ्रम क्यों पालें?मानस-विकृति आधि तन पहुंचे बनकर …

कविता सहज स्वभाव

कविता सहज स्वभाव है, उस पर कृत्रिम धुंध।महज गलेबाजी में, ख्ंिाचते, पिचकें छन्द।।मन कलुषित, तन स्वच्छ है, उस पर वसन विशेष।सन्त-वेश धारे मगर, लूटमार अनिवेश।।अंगारों पर राख की पड़ी …

सीएम फायर ब्राण्ड

आजम, औवेसी छिपे, भय का भूत डिमांड।जैसे ही घोषित हुआ, सीएम फायर ब्राण्ड।।भोगी-रोगी पर सदा योगी है दमदार।योग साधना में कहां ‘भोग-रोग’ दरकार।। Оформить и получить экспресс займ на …

नेता जी की बल्ले-बल्ले।

लड़के से गलती हुई, कहता ‘बोले काम’।पापा-चाचा को गिरा, खुद ही गिरे धड़ाम।।खुद ही गिरे धड़ाम, रुको निकलेंगे किल्ले-नेता जी की बल्ले-बल्ले।अथ को माना इति जभी, तभी हुआ अवसान।अनुभव …

विक्रमादित्य से योग्यादित्य!

योगीराज का लाॅगइन ‘विकास’ है तो पासवर्ड ‘हिंदुत्व’। ……….. भारतवर्ष के सबसे बड़े प्रान्त उत्तर प्रदेश में अव ‘योगी आदित्य’ यानी यण् सन्धि करने पर ‘योग्यादित्य’ राज आ गया …

खून का चक्कर

भाई भाई प्रेम में बहुत बड़ा है मोह। बहुएं आकरके सुनो करवाती हैं द्रोह।। करवाती हैं द्रोह, मोह को तुड़वाती है, घर, धन, दौलत, हार-खेत, बटवारा करवाती है। कहें …

दशहरा को नहीं मारा गया रावण!

क्वार सुदी दशमी को नहीं मारा गया रावण! ‘‘विजया दशमी यानी क्वार सुदी दशहरा को रावण मारा गया।’’ यह महापर्व सदियों से मनाया जाता है। हम और आप सभी …

मक्खन

मक्खन महंगा हो गया दूध दही है लुप्त। मक्खनबाजी चल गई, मेधा कुंठित सुप्त। मेधा कुंठित सुप्त, कहाँ उनकी है गिनती। किया धरा बेकार सुनी जाती न विनती। इनके …

खुद से कह लो पीर

जैसी है करनी रही वैसा फल का स्वाद सदकर्मों के गुणों की भी होती है म्याद सुख जाने पर दुखों का निश्चित है आरम्भ क्षणिक सफलता पर अहो क्यों …

कैसा हाहाकार है?

ये कैसा है कोलाहल कैसा हां-हाकार है । चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥ निहित स्वार्थ वश हिंसा बढ़ती। बहकावे में जनता मरती । खून की नदियाँ यहाँ …

परिचय Devesh Shastri

नाम- देवेश शास्त्री जन्म-तिथि २२-१०-१९६८ जन्म स्थान – इटावा (उत्तर प्रदेश ) प्रकाशित पुस्तकें- अपना इटावा (तीन भागों में), वरद पुत्र पंगुजी, नीराजना, ज्ञान ज्योति अप्रकाशित पुस्तकें – कृष्ण …

जयत्विष्टिकापुरी Samskrit geet

जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी। गंगा-यमुना नद्योर्मध्ये, श्रेष्ठा चेयमुर्वरा धरणी। जयतु जयतु अस्माकं धरणी, जयत्विष्टिकापुर्याः धरणी।। घारं पारं करक पचारम, इति नामसु विभक्ता धरणी। जयतु जयतु अस्माकं धरणी, …

नक़ल

खुली नक़ल से देखिये, ढेरों पाये अंक। अंकपत्र पा खुश हुए बुद्धि शून्य मन रंक॥ बुद्धिशून्य मन रंक, डंक सा मारे जग सब, खडे निरुत्तर पूछे जाते यहाँ प्रश्न …