Category: देवेश दीक्षित

काजल

काजल लगे नैनों मेंनयन सुंदर बन जाएलग जाए यदि चरित्र पेतो चरित्रहीन कहलाएइसकी कोई न परिभाषा हैये अर्थहीन कहलाएये जग अलबेला हैइसको न कोई सुहाएकिसी को खाता देखेतो वो …

नया साल

नया साल आया हैखुशियाँ साथ लाया हैभेद-भाव सभी मिटा केमुस्कान साथ लाया है पिछली करनी बिसार केआगे की सुधि लेज्ञान की यही पोटली लेजीवन में सबके खुशियाँ भरे एक दूजे को …

कड़ाके की ठण्ड

पड़ी कड़ाके की ठण्ड हैजिसमें भीगा मेरा मन हैतन हुआ सन्न हैठण्ड का यही फन है गर्मी की चाहत हैमिले तो राहत हैनहीं तो आहत हैठण्ड ये घातक है रज़ाई की …

नरसंहार

नरसंहारहत्याओं के इस दौर मेंमच गया हाहाकारहैवानियत के इस रूप नेबढ़ा दिया नरसंहारबेगुनाहों के खून सेपृथ्वी हो गई लालचीख-पुकार के माहौल मेंकैसे बीते सालहैवानियत के दरिंदों नेखींच दी है …

लाचार

भेद-भाव के व्यवहार कादस्तक दिया घाव काऐसा हुआ विस्तारकि मासूमियत हुई लाचार आरोपियों की खान काजुर्मों की दुकान काऐसा हुआ विस्तारकि अबला हुई लाचार जरा-जरा सी बात काआकार लेती प्रहार काऐसा …

काश दिमाग मेरा कम्प्युटर होता

काश दिमाग मेरा कम्प्युटर होतासारे जहां की जानकारी भर लेताजिंदगी में कभी निराश न होताभूलने की आदत से परेशान न होता कुछ न कुछ हांसिल कर लेतामंजिल से कभी दूर …

भीड़

धोखा-धड़ी कीइस भीड़ में नहीं मैंअकेला हूँ और भी हैंकतार में यही खुद को मैंसमझाता हूँ चालाकी नहींखून मैं अक्सर यही सोचताहूँ स्थिति बड़ीबेहाल है इसलिए अक्सरझल्लाता हूँ सोच-सोच …

आगोश

तुम आगोश में आ जाओतुम्हें दिल में बसा लूँगानैनों के रास्ते सेतुम्हें झील में उतार लूँगा झूमेंगे हम दोनोंपानी तुम्पे उछालूँगामोहब्बत की डोरी सेईश्वर को पा लूँगा मोहब्बत कहते जिसकोवो धुन …

झगड़ा

छोटी – छोटी बात परझगड़ा होता जिनमेंसही मायेने में अक्सरप्यार होता उनमें गैरों से हमें क्या मतलबवो तो दूर ही रहते हैंदिल के पास जो रहे अक्सरउसी को अपना कहते …

प्यार

तुम पर आ रहा प्यार बड़ामत जा मुझसे दूर जरातन्हाई मुझे सताती हैये कैसी बेइंसाफी हैइंतज़ार में खोया रहता हूँतुम पर जान छिड़कता हूँफिर भी मुझसे कटती होदूर क्यों …

कैसे और क्या

कैसे और क्या लिखूं कविताकुछ समझ आ नहीं रहाभण्डार खो गया विचारों काये क्या हो गया कुछ सूझ नहीं रहाकुछ बूझ नहीं रहालिखने को उत्सुक हो रहापर विचार बन नहीं …

चुनाव

चुनाव गली गली और शहर शहर मेंशोर मचाते वोट दोलाउडस्पीकर पर जोर जोर सेकान फोड़ते वोट दो चुनाव चिन्ह लेकर घूमेंआओ हमको वोट दोहम तुम्हारे साथ हैंआओ अपना वोट दो वादा …

मूषक से साक्षात्कार

एक दिन स्वप्न में मूषक से हुआ साक्षात्कार कहने लगा वो मुझसे कर दूंगा सब बर्बाद मूषक राज हमारा नाम है नुक्सान पहुंचाना हमारा काम है पेट भरने की …

मेरे पास शब्द नहीं

मासूमियत से भरे बच्चों की मासूमियत का जवाब नहीं क्या कहूँ उनके बारे में मेरे पास शब्द नहीं पल में रोते पल में हँसते उनको ये तक ज्ञात नहीं …

अपनी मार्किट के हालात

अपनी मार्किट के हालात हैं ऐसे भटक गया कोई रास्ता हो जैसे ग्राहक कभी जब आता ऐसे एहसान उससे ले रखा हो जैसे भाव सुनकर बिदकते ऐसे बिजली का …