Category: देवेश दीक्षित

शब्दों का मेला…………………देवेश दीक्षित

शब्दों का मेला है मची है इसकी धूम चुन सके तो चुन ले फिर गाथा अपनी बुन   खेल इसका बड़ा निराला है इसकी महत्वता को चूम विष और …

कलियुग का प्रकोप………………………..देवेश दीक्षित

दूध की नदियां बहती थीं कभी अब खून की नदियां बहती हैं प्रेम भाव था भाईयों में कभी अब चाकू-छुरियां चलती हैं धन संपदा जमीन नारी जब हुआ करती …

दिल……………………देवेश दीक्षित

यों न पीठ दिखाओ मुझको मैं दिल लिए बैठा हूँ ज़रा नज़रों से नज़रें मिलाओ तुम्हारे इन्तजार में बैठा हूँ तुम्हारी झील सी आंखों को निहारना चाहता हूँ तुम्हारे …

दिल तो बच्चा है……………..देवेश दीक्षित

दिल तो बच्चा है तभी तो सच्चा है कदम उठाने से कुछ भी पहले ये सबको आगाह करता है क्या अच्छा है क्या बुरा है ये अवगत उससे कराता …

पिताजी मेरे रहे नहीं……………देवेश दीक्षित

पिताजी की तबीयत खराब हुई स्थिति को देख लगा डर डॉक्टर से बात हुई कहा उसने ले आओ इधर हमने फिर एम्बुलेंस बुलाई पहुंच गए हम उधर भर्ती उन …

असामाजिक तत्व…………………..देवेश दीक्षित

असामाजिक तत्व जब आते हैं समाज में मचाते हैं हुड़दंग डराते हैं बेकार में अपनी धाक जमाने को आतंक ये मचाते हैं गुनाह पर गुनाह कर कानून को अंगूठा …

कैसे लिखूं मैं………………………देवेश दीक्षित

कैसे लिखूं मैं हास्य कविता सोचता बहुत हूं मैं पर बनती नहीं कविता क्योंकि गंभीर हूं मैं तभी लिखता हूं गंभीर कविता प्रयत्न करता हूं मैं कि लिखूं हास्य …

बहुत अच्छा लगता है……………….देवेश दीक्षित

दिल की अपनी सुनना सुनकर उस पर विचारना विचार कर लय में लाना बहुत अच्छा लगता है   शब्दों को फिर आगे चुनना चुनकर उसे पिरोना पिरोकर कागज पर …

 बहुत बुरा लगता है………………देवेश दीक्षित

बहुत बुरा लगता है जब कोई दिल तोड़ देता है लिखी हुई कविता पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है   बहुत बुरा लगता है जब होती अधूरी कविता …

तुम हो तो सब कुछ है………………………देवेश दीक्षित

तुम हो तो सब कुछ है तुम्हारे बिना कुछ भी नहीं तुमसे ही मेरी दुनिया है साथ हो तुम तो न भटकूँ कहीं तुमसे ही मेरी मस्ती है हंसो …

कयामत……………………..देवेश दीक्षित

कयामत आई कोरोना की कयामत आई नज़रबंदी की किसने सोचा था ऐसा होगा मनुष्य घर में पागल होगा कुछ सूझ नहीं रहा कुछ बूझ नहीं रहा कयामत की इस …

पल दो पल का नेता हूँ…………………….देवेश दीक्षित

मैं पल दो पल का नेता हूँपल दो पल मेरी गद्दी हैपल दो पल मेरी सत्ता हैपल दो पल मेरा बुढ़ापा है मैं पल दो पल का नेता हूँपल दो …

सूखे पत्ते………………………देवेश दीक्षित

सूखे पत्ते गिरे पेड़ सेहरे पत्ते लहराएडालियाँ भी झूमे ऐसेजैसे तिरंगा दिए फहराए झर – झर करते पत्ते गिरतेमंद – मंद मुसकाएडाली से छूटे ऐसेजैसे पंछी पिंजरे से उड़ जाए फूटी …

कोरोना…………………….देवेश दीक्षित

कोरोना ऐसी महामारीदेखो कैसी लाचारीपूरा भारत बंद करा कररख दिया इसने सब को डराकरदहशत का आलम छायानज़र बंदी से अवगत करायाये कैसी स्थिति ला दीसड़क पर हो गई कम …

वक्त बेवक्त…………………….देवेश दीक्षित

वक्त बेवक्त तुम ही याद आती हो मेरे दिल ओ दिमाग में कुछ इस कदर छाती हो हौले से जब मुस्कराती हो एक नशा सा कर जाती हो तुम्हारे …

लबों पर आने दे

तेरी मुस्कुराहट कोलबों पर आने देदेख कर उसकोमुझे मुस्कुराने देभंवरे की तरह मुझकोतेरे पास आने देजन्नत में महसूस करूं खुद कोवो बहार आने देनजदीक होकर भी तुझकोदूर देखूं मैंऐसा …

मुस्कुराहट

सदा यूं ही बरकरार रहेसब के चेहरे पर मुस्कुराहटजब भी किसी को हम देखेंहमारे चेहरे पर आए मुस्कुराहट आँखों में दिव्यता सी चमकमाथे पर आलोकिक तेजवाणी में मीठी सी झनकजैसे …

कोरोना का कोप

एक तो कोरोना का कोपऊपर से इंद्र देव का जोशबिन मौसम वर्षा का रोषकिसको दें अब इसका दोषईश्वर की माया बड़ी निरालीदेखो कैसे करें चालाकीवर्षा करके अत्यंत भारीसूर्य देव …

वक्त नहीं है

वक्त नहीं है अपनों के पासअपनों  के लिएवक्त नहीं है दंपत्तियों के पासएक दूजे के लिए वक्त नहीं है बच्चों के पासमाँ बाप के लिएवक्त नहीं है दोस्तों के पासदोस्तों …

होली के रंग………………….देवेश दीक्षित

होली के रंगों में उठे सवाल जिससे मच गया बड़ा बवाल हैं इनमें गुलाब, गुब्बारे और पिचकारी जो नहीं लगे हमें हितकारी इनके सवालों से तो सांसद भी हुआ …