Category: दीपेश जोशी

छोड़ दो

रूह को ठेस पहुचे करना वो काम छोड़ दो,पाबंद रहो वक़्त के,रहना ग़ुलाम छोड़ दो।यू गफलतों में जीना भी कोई जीना है भला,झूठी हँसी हसना सुबह-शाम,छोड़ दो।एक गली की …

सहरा को समंदर बनाने चले हो

खुद अपनी तामीर मिटाने चले होसहरा को समंदर बनाने चले हो। बातें करता है ज़माना अब तोकि तुम अपनी तकदीर मिटाने चले हो सहरा को समंदर बनाने चले हो। आफ्ताब की रोशनी …

ज़मीनी हकीकत

दिन रोज़ ढलता है, शाम गुजरती हैं, मुसीबतें पार कर ही शख्सियत उभरती हैं। रुह तक कॅाप जाती है इबादत करने में कई कोशिशों बाद कोई तामीर सवरती हैं। …