Category: चन्द्र मोहन किस्कु

मेरी स्वप्न पर IPC 144

मेरी स्वप्न पर IPC 144 ———————-मेरी फूटी छज्जा पुआल की झोपडी में खजूर पाटिया फटा गद्धा पर लेट कर तकते रहता था आसमान की ओर और सोरेन इपिल ,भुरका …

स्वीकारता हूँ

स्वीकारता हूँ _________मै स्वीकार करता हूँ तुम्हारी गरीबी हालत अत्याचार और शोषण के लिए मै भी एक कारण हूँ जब तुम छोटी थी कुल्ही धूल में खेलती रहती थी …

नारी की पुकार

नारी की पुकार __________नारी का रूप लेकर क्या मैं पाप किया हूँ ?इसमें मेरा क्या है जुर्म ?भगवान ने ही तो मुझे बनाया है नर -नारी दोनों मनुष्य पर …

स्मृति की इतिहास पटल

स्मृति की इतिहास पटल ************************************************मेरी स्मृति की कागज पर लिखा हुआ है तुम्हारी प्यार तुम्हारी झीनी -झीनी साड़ी की आँचल नीले सागर जैसी दो आँखें देहभर की यौवन मुलाकातों …

रोशनी के लिए

रोशनी के लिए **************************सुबह दहलीज में पड़ी अखबार नहीं हूँ मै पड़ती हो सुबह-सुबह जल्दी में और शाम को फ़ेंक देते हो रद्दी के साथ कैलेंडर भी नहीं हूँ …

कैसे सोना जैसा समाज बनेगा ?

कैसे सोना जैसा समाज बनेगा ?———————————————————————-पुस्तक रखकर मैं लोगों को पढ़ा देह पर सफेद कपड़ा पहनने पर भी उसकी भीतर की काला ,अंधेरा, तंग ही देखा मैं जँहा भी …

खुशहाली की आशा

खुशहाली की आशा ———————- वह दिन कब आएगा ?जब सामने जो दिख रहा गगनचुम्बी ऊँची अट्टालिका के निचे ,पुआल की छज्जा पुआल की झोपडी में सोहराय महीना की जाड़ा …

मैं लड़ूँगा

$मैं लड़ूँगा $————–मैं लड़ूँगा बोमा -बारूद और बन्दुक से नहीं दो पैर और दो हाथवाले मनुष्य से नहीं जान जाने और खून बहाने के लिए नहीं समाज में सुख-शांति …

आशा की प्रदीप

आशा की प्रदीप—————— १ अंधकार की आँचल छोड़कर मैं सूर्यदेव की ओर बढूँगा दुःख और पराजय की पथ पर प्रदीप बहुत सारा जलाऊँगा। २ बुझती ख्वाहिश की डगर पर …

swantrataa ki swatantrataa diwas palan

स्वतंत्रता की स्वतंत्रता दिवस पालन प्रतिदिन ही स्वतंत्रता की माँ को पथ में ,पगडंडियों में सड़क की चौराहों पर लोगों की ओर करुण दृष्टि डालते हुए भीख मांगते हुए …

भोको की माँ

पेड़-लत्ताओं की कच्ची हरी पत्ती सफेद होकर गिरे जाती है फिर से नयी हरियाली पेड़ों में छा जाती हैं सूर्य की प्रकोप से सुखी बुढ़ी धरती भी वर्षा की …

मैं तो उड़ुँगा

मैं, क्यों चलुँगा? नहीं, मैं तो उड़ुँगा पंख फैलाकर उड़कर जाऊँगा नीले आसमान की उस पार जाँहा तारे -सितारे रहते हैं और तारों -सितारों को तोड़कर आँचल से बाँधकर …