Category: बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’

शालिनी छन्द (“राम स्तवन”)

शालिनी छन्द (“राम स्तवन”) हाथों में वे, घोर कोदण्ड धारे। लंका जा के, दैत्य दुर्दांत मारे।। सीता माता, मान के साथ लाये। ऐसे न्यारे, रामचन्द्रा सुहाये।। मर्यादा के, आप …

शार्दूलविक्रीडित छंद “हिन्दी यशोगान”

शार्दूलविक्रीडित छंद “हिन्दी यशोगान” हिन्दी भारत देश के गगन में, राकेश सी राजती। भाषा संस्कृत दिव्य हस्त इस पे, राखे सदा साजती।। सारे प्रांत रखे कई विविधता, देती उन्हे एकता। हिन्दी से पहचान है जगत में, देवें इसे भव्यता।। …

शिखरिणी छंद (“भारत वंदन”)

शिखरिणी छंद (“भारत वंदन”) बड़ा ही प्यारा है, जगत भर में भारत मुझे। सदा शोभा गाऊँ, पर हृदय की प्यास न बुझे।। तुम्हारे गीतों को, मधुर सुर में गा …

स्रग्धरा छंद “शिव स्तुति”

स्रग्धरा छंद “शिव स्तुति” शम्भो कैलाशवासी, सकल दुखित की, पूर्ण आशा करें वे। भूतों के नाथ न्यारे, भव-भय-दुख को, शीघ्र सारा हरें वे।। बाघों की चर्म धारें, कर महँ …

हरिणी छंद “राधेकृष्णा नाम-रस”

हरिणी छंद “राधेकृष्णा नाम-रस” मन नित भजो, राधेकृष्णा, यही बस सार है। इन रस भरे, नामों का तो, महत्त्व अपार है।। चिर युगल ये, जोड़ी न्यारी, त्रिलोक लुभावनी। भगत …

ग़ज़ल (जब तलक उनकी करामात)

बह्र:- 2122 1122 1122 22 जब तलक उनकी करामात नहीं होती है, आफ़तों की यहाँ बरसात नहीं होती है। जिनकी बंदूकें चलें दूसरों के कंधों से, उनकी खुद लड़ने …

ग़ज़ल (बुझी आग फिर से जलाने लगे हैंं)

ग़ज़ल (बुझी आग फिर से जलाने लगे हैंं) बह्र :- 122*4 बुझी आग फिर से जलाने लगे हैं, वे फितरत पुरानी दिखाने लगे हैं। गुलों से नवाजा सदा जिनको …

अनुष्टुप् छंद “गुरु पंचश्लोकी”

अनुष्टुप् छंद “गुरु पंचश्लोकी” सद्गुरु-महिमा न्यारी, जग का भेद खोल दे।वाणी है इतनी प्यारी, कानों में रस घोल दे।। गुरु से प्राप्त की शिक्षा, संशय दूर भागते।पाये जो गुरु …

करवा चौथ पर आरती

करवा चौथ पर आरती ओम जय पतिदेव प्रियेस्वामी जय पतिदेव प्रिये।चौथ मात से विनती-2शत शत वर्ष जिये।। कार्तिक लगते आई, चौथ तिथी प्यारी।करवा चौथ कहाये, सब से ये न्यारी।।ओम …

आँसू छंद “कल और आज”

भारत तू कहलाता था, सोने की चिड़िया जग में।तुझको दे पद जग-गुरु का, सब पड़ते तेरे पग में।तू ज्ञान-ज्योति से अपनी, संपूर्ण विश्व चमकाया।कितनों को इस संपद से, तूने …

अहीर छंद “प्रदूषण”

अहीर छंद “प्रदूषण”बढ़ा प्रदूषण जोर।इसका कहीं न छोर।।संकट ये अति घोर।मचा चतुर्दिक शोर।।यह दावानल आग।हम सब पर यह दाग।।जाओ मानव जाग।छोड़ो भागमभाग।।मनुज दनुज सम होय।मर्यादा वह खोय।।स्वारथ का बन …

“जागो भाग्य विधाताओं”

“जागो भाग्य विधाताओं”देखा अजब तमाशा, छायी दिल में निराशा,चार गीदड़ ले गये, मूँछ तेरी नोच के।सोये हुए शेर तुम, भूतकाल में हो गुम,पुरखों पे नाचते हो, नाक नीची सोच …

सार छंद (पलाश और नेता)

सार छंद (पलाश और नेता)छन्न पकैया छन्न पकैया, टेसू सा ये नेता।सूखी उलझी डालों सा दिल, किसका भी न चहेता।।पाँच साल तक आँसू देता, इसका पतझड़ चलता।जिस में सोता …

सरहदी मधुशाला

सरहदी मधुशालामधुशाला छंद (रुबाई)रख नापाक इरादे उसने, सरहद करदी मधुशाला।रोज करे वो टुच्ची हरकत, नफरत की पी कर हाला।उठो देश के मतवालों तुम, काली बन खप्पर लेके।भर भर पीओ …

“शिवेंद्रवज्रा स्तुति”

“शिवेंद्रवज्रा स्तुति”परहित कर विषपान, महादेव जग के बने।सुर नर मुनि गा गान, चरण वंदना नित करें।।माथ नवा जयकार, मधुर स्तोत्र गा जो करें।भरें सदा भंडार, औघड़ दानी कर कृपा।।कैलाश …

ये बालक कैसा? (हाइकु विधा)

ये बालक कैसा? (हाइकु विधा)अस्थिपिंजरकफ़न में लिपटाएक ठूँठ सा।पूर्ण उपेक्ष्यमानवी जीवन काकटु घूँट सा।स्लेटी बदनउसपे भाग्य लिखेमैलों की धार।कटोरा लिएएक मूर्त ढो रहीतन का भार।लाल लोचनअपलक ताकतेराहगीर को।सूखे से …

लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल (कज़ा मेरी अगर जो हो)

(सबसे लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल)काफ़िया=आरदीफ़= *मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर*1222×4खता मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर,सजा मेरी अगर जो हो, …

भारत यश गाथा

“भारत यश गाथा” ज्ञान राशि के महा सिन्धु को, तमपूर्ण जगत के इंदु को, पुरा सभ्यता के केंद्र बिंदु को, नमस्कार इसको मेरे बारम्बार । रूप रहा इसका अति …

वन्दना

“वन्दना” इतनी ईश दया दिखला, जीवन का कर दो सुप्रभात। दूर गगन में भटका दो, अंधकारमय जीवन रात।।1।। मेरे कष्टों के पथ अनेक, भटका रहता जिनमें यह मन। ज्ञान …