Category: अरविन्द श्रीवास्तव

अंटार्कटिका का एक हिमखण्ड

अभी खड़ा था यही कोई लाख वर्षों से समुद्र की देह पर चुपचाप निहार रहा था हमें हार-थक कर एक झटके में वह टूटा पिघला और मिनटों में खो …

अंगूठे

बताओ, कहाँ मारना है ठप्पा कहाँ लगाने हैं निशान तुम्हारे सफ़ेद–धवल काग़ज़ पर हम उगेंगे बिल्कुल अंडाकार या कोई अद्भुत कलाकृति बनकर बगैर किसी कालिख़, स्याही और पैड के …