Category: अकबर इलाहाबादी

मुस्लिम का मियाँपन सोख़्त करो

मुस्लिम का मियाँपन सोख़्त करो, हिन्दू की भी ठकुराई न रहे! बन जावो हर इक के बाप यहाँ दावे को कोई भाई न रहे! हम आपके फ़न के गाहक …

बिठाई जाएंगी पर्दे में बीबियाँ कब तक

बिठाई जाएंगी परदे में बीबियाँ कब तक बने रहोगे तुम इस मुल्क में मियाँ कब तक हरम-सरा की हिफ़ाज़त को तेग़ ही न रही तो काम देंगी यह चिलमन …

बहार आई

बहार आई, मये-गुल्गूँ के फ़व्वारे हुए जारी यहाँ सावन से बढ़कर साक़िया फागुन बरसता है फ़रावानी हुई दौलत की सन्नाआने योरप में यह अब्रे-दौरे-इंजन है कि जिससे हुन बरसता …

बहसें फ़ुजूल थीं यह खुला हाल देर

बहसें फिजूल थीं यह खुला हाल देर में अफ्सोस उम्र कट गई लफ़्ज़ों के फेर में है मुल्क इधर तो कहत जहद, उस तरफ यह वाज़ कुश्ते वह खा …

फिर गई आप की दो दिन में तबीयत कैसी

फिर गई आप की दो दिन में तबीयत कैसी ये वफ़ा कैसी थी साहब ! ये मुरव्वत कैसी दोस्त अहबाब से हंस बोल के कट जायेगी रात रिंद-ए-आज़ाद हैं, हमको …

पिंजरे में मुनिया

मुंशी कि क्लर्क या ज़मींदार लाज़िम है कलेक्टरी का दीदार हंगामा ये वोट का फ़क़त है मतलूब हरेक से दस्तख़त है हर सिम्त मची हुई है हलचल हर दर …

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार1 नहीं हूँ बाज़ार से गुज़रा हूँ, ख़रीददार नहीं हूँ ज़िन्दा हूँ मगर ज़ीस्त2 की लज़्ज़त3 नहीं बाक़ी हर चंद कि हूँ होश में, होशियार नहीं हूँ …

दिल मेरा जिस से बहलता

दिल मेरा जिस से बहलता कोई ऐसा न मिला बुत के बंदे तो मिले अल्लाह का बंदा न मिला बज़्म-ए-याराँ से फिरी बाद-ए-बहारी मायूस एक सर भी उसे आमादा-ए-सौदा …

तअज्जुब से कहने लगे बाबू साहब

तअज्जुब से कहने लगे बाबू साहब गौरमेन्ट सैयद पे क्यों मेहरबाँ है उसे क्यों हुई इस क़दर कामियाबी कि हर बज़्म में बस यही दास्ताँ है कभी लाट साहब हैं मेहमान उसके …

जो यूं ही लहज़ा लहज़ा दाग़-ए-हसरत की तरक़्क़ी है

जो यूं ही लहज़ा-लहज़ा दाग़-ए-हसरत की तरक़्क़ी है अजब क्या, रफ्ता-रफ्ता मैं सरापा सूरत-ए-दिल हूँ मदद-ऐ-रहनुमा-ए-गुमरहां इस दश्त-ए-गु़र्बत में मुसाफ़िर हूँ, परीशाँ हाल हूँ, गु़मकर्दा मंज़िल हूँ ये मेरे …

जिस बात को मुफ़ीद समझते हो

जिस बात को मुफ़ीद समझते हो ख़ुद करो औरों पे उसका बार न इस्रार से धरो हालात मुख़्तलिफ़ हैं, ज़रा सोच लो यह बात दुश्मन तो चाहते हैं कि …

जान ही लेने की हिकमत में तरक़्क़ी देखी

जान ही लेने की हिकमत में तरक़्क़ी देखी मौत का रोकने वाला कोई पैदा न हुआ उसकी बेटी ने उठा रक्खी है दुनिया सर पर ख़ैरियत गुज़री कि अंगूर के …

चश्मे-जहाँ से हालते अस्ली छिपी नहीं

चश्मे जहाँ से हालते असली नहीं छुपती अख्बार में जो चाहिए वह छाप दीजिए दावा बहुत बड़ा है रियाजी मे आपको तूले शबे फिराक को तो नाप दीजिए सुनते …

ख़ुशी है सब को कि आप्रेशन में ख़ूब नश्तर चल रहा है

ख़ुशी है सब को कि आप्रेशन में ख़ूब नश्तर चल रहा है किसी को इसकी ख़बर नहीं है मरीज़ का दम निकल रहा है फ़ना उसी रंग पर है क़ायम, फ़लक …