Category: Kavita

“मैं निशा हूं”

मैं निशा हूं सोचा कि आज कह ही दूं सबकुछ। निर्दोष हूं, अकेली हूं, प्यारी भी हूं सचमुच। मेरी तन्हाई को सिर्फ वहीं समझ सकता है- जिसने आविरक्त प्रेम …

आशाओं के दीप जलाना।

आशाओं के दीप जलाना।घोर अँधेरा घिरे डगर मेंबाधित पथ हो गली-नगर में,सूरज थका-थका दिखता होभाग्य धरा का तम लिखता हो।अम्बर पुलकित मारे ताना              …

सर्जिकल स्ट्राइक

रौद्र रूप देख थर्रायी है,धरती पाकिस्तान की । कफ़न बाँध कर रण में उतरी,मिट्टी हिन्दुस्तान की । छेड़ रहे थे सिंहों को,थी चर्चा स्वाभिमान की । बालाकोट में गरज …

राणा का शौर्य

अकबर  हुआ   दुलारों   में । हैं  राणा  खड़े   क़तारों  में । हम   पढ़ते  हैं  बाज़ारों  में । कुछ बिके हुए अख़बारों में । ये जाहिल हमें सिखाते हैं । …

पप्पू मेरा पास हुआ

कांग्रेस  मुख्यालय  गूंजा ,  श्री राम  के  नारों  से । अब बोलेंगी देखो मैडम,सुबह सुबह अख़बारों से । बड़े  दिनों से  जुगनू  हमने देखे ना  अँधियारों में । मोदी …

प्रेम दिवस

तेरे चंचल नयनो में बस के मिट जाऊ या आबाद रहूँ, हे सखी तुम्ही ये बतला दो अब क्या क्या जीवन सार कहूँ ।ये रोज रोज तेरा मिलना ,फिर …

कोरोना की मार

वो शहर सुनी सी हो गया हैंजिसमें लोग तारें की तरह जगमगाते थेंवो गलियां जहां से लोग निकलते थेंकुत्ते की आवाज़ भी अब सुनाई नहीं देती हैंअब कुत्ते भी …

मैं ढूंढ रही किसको ?

मैं ढूंढ रही किसको ?एक स्नेहिल भाव या.एक शीतल छांवकहां से आईं हूँ?कहाँ है जाना मुझे?इस अनसुलझी पहेली ने,जीवनमाला को उलझा सा दिया है।लक्ष्य की ओर बढ़ते-बढ़तेबार-बार पग थम …

यमलोक मे कोहराम

यम लोक मे चिन्ता छाईप्रथ्वी लोक मे महामारी आईकोरोना ने कहर बरपाईतीनो लोक मे चिन्ता छाईयमदूतों ने किया हंगामाकमीशन का रखा पैमानाहाथ जोड़ कर रहे विनतीयमराज अब हमसे न …

चिराग

उम्मीदों को खुद में समेटे रहते हर चिरागसदियों से इसके बल आगे बढ़े लोग बागपास फटकेगा ना अंधेरा ये कह रहे चिरागलौ इसकी देख रोशन गदगद हैं लोग बागतम …

चांद

चांद अकेला आज फिजा में हुआ बहुत हैरान.पड़ा सोच में आखिर क्यों चुप धरती के इंसान. तभी पवन ने सरसर करते राज उसे समझाया.मनमानी कर इंसानों ने जुल्म प्रकृति …

बात बात में

बात बात में मजहब की वो ढाल उठाते रहते हैं.जब देखो वो नियम कानूनों की बाट लगाते रहते हैं.भेजा उनका सड़ा दिया राजनीति की चालों ने. इसीलिए वे आगे …

अब भी मौका

अब भी मौका कर्म सुधारो प्रकृति नियम बिसराने वालोंखुद को खुदा मानकर के निज दौलत पर इतराने वालोंजीव जगत सबकी ही खातिर पुरखों ने कुछ नियम बनाएउन नियमों का …

सुख दुख

सुख दुख दोनों चक्रवत फिर क्यों होते उदासछिन छिन सब दिन जाएंगे नहीं रुकेंगे पाससमय के ऊपर नहीं चला कभी किसी का जोरचाहे कोई धनवान हो या कोई कमजोरगुनिया …

काग

अरसे बाद मुंडेर पर हमें आज दिखे कई काग मन को झंकृत कर रहा है कांव कांव का रागउनके राग में गूंजते हमने सुने समझे कई प्रश्नगलियां सड़क खामोश …

घुनाक्षर न्याय

आज घुनाक्षर न्याय से बहुत व्यथित हैं लोगपर पीड़़ा को नहीं समझते कुर्सी पर बैठे लोगपुरखों ने जनहित खातिर लोकतंत्र अपनायाकहां पता था उन्हें के वारिस दिखलाएंगे मायाकुर्सी ऊंची …

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जीवन साथी

मेरी अनकही अमानत, मेरी इकलौती इबादत,मेरी ज़रूरत, तु ही तो है मेरी ज़िंदगी,ज़ख़्मों का मरहम, मेरा नादान बचपन,मेरी हँसी, तु ही तो है मेरी अमादगी । मेरी पहली उम्मीद, मेरा …

जज़्बातों की दुनिया

मंदिर हिन्दुओं के और मस्जिदें मुसलमानों की;मज़हब से पहचानी जाती जहाँ नस्लें इंसानों की।जाकर देखा जब मैनें भीड़ भरे बाज़ारों में;दौलत से आँकी जाती वहाँ इज़्ज़त इंसानों की।मिला जब …