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मेरी कहानी मेरी जुबानी भाग-2 (POEM No. 21) CHANDAN RATHORE

कुछ साल और निकले में पढता रहा सब मुझे पढ़ाते रहेआ गया वो दिन जिस दिन होना था माँ से दूरसब छोड़ गये अकेले कोई नही था मेरे पासअकेले …

Mrat Kaaya Ka Rodan (मृत काया का रोदन) POEM NO. 230 (Chandan Rathore)

POEM NO . 230————मृत काया का रोदन————मृत काया के लिए हुआ आज फिर करुणा मय रोदन |छोटे छोटे बच्चों की आशाओं का हुआ शोषण ||रूठ गए जग छोड़ गए …