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सोरठा “राम महिमा”

मंजुल मुद आनंद, राम-चरित कलि अघ हरण। भव अधिताप निकंद, मोह निशा रवि सम दलन।। हरें जगत-संताप, नमो भक्त-वत्सल प्रभो। भव-वारिध के आप, मंदर सम नगराज हैं।। शिला और …

महाकवि तुलसी-महिमा

दन्त पंक्ति पट खोल, मुख महिं बोला राम जब| सुत उपजा अनमोल, हुलसी हुलसी, जग चकित|| (सोरठा) राजापुर शुभ रत्न समाना| उपजा जहँ तुलसी विद्वाना|| छंद शिरोमणि बाबा तुलसी| …