Tag: shivdutt shrotriya

तुम्हे पढ़ना नहीं आया

जिंदगी की क़िताब कुछ बिखरने सी लगी हैबेचने की ख़ातिर इसे मुझे मढ़ना नहीं आया ||लोग कहते है कि मुझे पत्थर गढ़ना नहीं आयातुम्हे क्या ख़ाक लिखता तुम्हे पढ़ना …

पर कौन सुनेगा उसकी

शाम को आने मे थोड़ी देरीहो गयी उसकोघर का माहौल बदल चुकाथा एकदमवो सहमी हुई सी डरी डरीआती है आँगन मेहर चेहरे पर देखती हैकई सवालसुबह का खुशनुमा माहौलधधक …

कैसे जान पाओगे मुझको

कैसे जान पाओगे मुझको अगर तुमने प्रेम नही कियातो कैसे जान पाओगे मुझकोकिसी को जी भरकर नही चाहाकिसी के लिए नही बहायाआँखों से नीर  रात भरकिसी के लिए अपना …

कोई सहारा तो हो

मिले नज़र फिर झुके नज़र, कोई इशारा तो होयो ही सही जीने का मगर, कोई सहारा तो हो ||स्कूल दफ़्तर परिवार सबको हिस्सा दे दियाजिसको अपना कह सके, कोई …

आया था चाँद पानी पर

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियकिसी ने उपमा दी इसेमहबूबा के चेहरे की,किसी ने कहा ये रात का साथी हैकभी बादल मे छिपकरलुका छिपी करता तो ,मासूम सा बनकर सामने आ जाता …

अंतिम यात्रा, भाग -१

अंतिम यात्राकिसी की चूड़ियाँ टूटेंगी,कुछ की उम्मीदे मुझसेविदा लेगी रूह जबमुस्करा कर मुझसेकितनी बार बुलाने पर भी जोरिश्ते नहीं आयेदौड़ते चले आएंगे वो तबआँशु बहायेकितने आँशु गिरेंगे तबजिस्म पर मेरेरुख्सती …