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बुलन्दी मेरे जज़्बे की – salimrazarewa

बुलन्दी मेरे जज़्बे की ये देखेगा ज़माना भीफ़लक के सहन में होगा मेरा इक आशियाना भीअकेले इन बहारों का नहीं लुत्फ़-ओ-करम साहिबकरम फ़रमाँ है मुझ पर कुछ मिजाज़-ए-आशिक़ाना भीजहाँ …