Tag: Prabhat Singh Rana ‘bhor’

तू ठहर सही, मैं आऊँगा..!

सोचा है इस बार सही, मिल कर सब कुछ कह जाऊँगा।हाँ माना कुछ देर रही, तू ठहर सही, मैं आऊँगा॥शायद पता है तुझको सब, पर कहना बड़ा ज़रूरी है।मेरे …

आहिस्ता

तेरी ख़ातिर आहिस्ता,शायद क़ामिल हो जाऊँगा।या शायद बिखरा-बिखरा,सब में शामिल हो जाऊँगा॥शमा पिघलती जाती है,जब वो यादों में आती है।शायद सम्मुख आएगी,जब मैं आमिल हो जाऊँगा॥पेशानी पर शिकन बढ़ाती,जब …