Tag: प्रकृति पर कविता

प्रकृति का एक संदेश (कोरोना कोविड -19)

कोरोना महामारी नहीं,प्रकृति का एक संदेश लेकर आया है।जिसने प्रकृति के दुश्मनों को आज चेताया है।।जो लोग दूर जाकर प्रवासी हो गए थे।उनको आज फिर से अपनों से मिलवाया …

मिट रहा प्रकृति श्रृंगार – डी के निवातिया

ऋतुओं के संग-संग मौसम बदले,बदल गया धरा पे जीवन आधार, मानव तेरी विलासिता चाहत में, उजड़ रहा है नित प्रकृति का श्रृंगार, दरख्त-बेल, घास-फूंस व् झाड़ियाँ, धरा से मिट …

पवन – डी० के० निवातिया

हे पवन !तू है बड़ी चंचल री,छेड़ जाती है,अधखिले पुष्पों को…!है जो चिरनिंद्रा में लीन,सुस्ताते हुए डाल पर,तेरे गुजरने के बादविचलित हो उठते है,नंन्हे शिशु की मानिंदतरस उठते है,जैसे …

यह जीव -हत्या क्यों और कब तक ! (कविता )

यह बेजुबान जानवर,यह भोले जानवर ,इंसान की नियत से बेखबर ,यह मासूम जानवर .घर पर तो लाते हैं,बड़ा प्यार-दुलार देते हैं,लेकिन जब निकल जाये मतलब,तो सड़कों पर भटकने/मरने को …

हाँ मैं वही बसंत हूँ – डी के निवातिया

हाँ मैं वही बसंत हूँ …. =+= जो कभी नई कोंपलो में दिखता थाकलियों में फूल बनकर खिलता थाहवाओ संग ख़ुशबू लिए फिरता थाचेहरों पे नई उंमग लिए मिलता …

समझो पीड़ा (हाइकु)- शिशिर मधुकर

भीषण बाढ़ धरती कराहती समझो पीड़ा।बरखा आए मयूर छुप गएचैन कहीं ना। राह कांटों की मुश्किल है चलना छलनी सीना। फूल खिले है चिड़ियाएं उड़ती संग में जीना।शिशिर मधुकर …

अब तो मचा है हाहाकार

अब तो मचा है हाहाकार, वृक्ष बिना बुरा हुआ है हाल।मानव ने यह किया कमाल, ख़ुद को पाएं नहीं सम्हाल।कैसे-कैसे अब किए हैं खेल?, हाल बुरा है पेलम-पेल।गर्मी ने …

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

बसंत बहार— प्रकृति पर कविता —डी. के. निवातिया

बसंत बहार बागो में कलियों पे बहार जब आने लगे, खेत-खलिहानों में फसले लहलाने लगे !गुलाबी धुप पर भी निखार जब आने लगे, समझ लेना के बसंत बहार आ …

आज घर पर हमारे भी चाँद आएगा।

भुला कर गिले शिकवे वो प्यार लाएगालालिमा अपने चहरे पर वो साथ लाएगाशीतलता से गर्म स्वभाव को ठंडा कर जायेगाआज घर पर हमारे भी चाँद आएगा साथ हूँ मै …

अनुराग – शिशिर मधुकर

अगर देखता हूँ फूल मैं गुनाह तो नहीँ करता उसकी जया से बस उदास दिल मेरा संवरता कुदरत ने ये सब खूबियां यूँ ही नहीं बनाई हैं प्रक्रति पुरुष …

सावन का विज्ञान – शिशिर मधुकर

सावन का महीना ज्यों ज्यों ही पास आता हैं उमस भरा मौसम सकल लोगों को सताता हैं गोरियां राहत के लिए जो उपाय अपनाती हैं उस से तो सावन …

गुल ए गुलाब – शिशिर मधुकर

कितनी खुशबू दी खुदा ने इस गुल ए गुलाब को पर कांटों से भी घेरा हैं इसके मचलते शबाब को कुदरत यही चाहे ना पहुँचे कोई बेरहम इस तक …

प्रकृति

हिमगिरि कहीं वृहद मरुस्थल कही स्याह रात कही दिवा धुप अतिशय शांति कही शेर गर्जना मनोहारिणी कही विभस्त रूप कहीं हरसिंगार फैलाती सुगंध कही कीट विहग की चहचहाहट कहीं …