Tag: प्यार पर कविता

सावन की बारिश – डी के निवातिया

सावन की बारिश ने मुझे सताया बहुत है, तेरी यादो ने अबकी दिल दुखाया बहुत है, वैसे तो पहले भी कई दफ़ा तन्हा रहे, मगर इस बार मुहब्बत ने …

रक्षा बंधन – डी के निवातिया

रक्षा बंधन सिर्फ भाई बहन का ही नहीं, सभी से प्रेम का त्यौहार है रक्षा बंधन, जो भी परवाह करे तुम्हारी, उनके मान सम्मान का पर्व है रक्षा बंधन, …

मगर से बैर – डी के निवातिया

दूसरों की मुखालफत में दिन रात रहता है, आग का दरिया बनकर पानी संग बहता है समझो कितना शातिर होगा वो शख्स, जो पानी में रहकर मगर से बैर …

शरारत कमाल करती है -डी के निवातिया

आँखों की शरारत, होठो की लाली, कमाल करती है, चाँद से चेहरे से बरसती खूबसूरती बवाल करती है !! कातिल जवानी, लुभाती अदाओं से छलकाती शराब, कम्बख्त मासूम सी …

निशानियां – डी के निवातिया

निशानियां *** वक़्त बता रहा है तुझको तेरी खामियां, पहचान ले अब तो अपनी नाकामिया, अब नहीं समझा तो क्या तब समझेगा, जब मिट जायेंगी तेरी सभी निशानियां !! …

नाम कर देंगे – डी के निवातिया

नाम कर देंगे *** याद रखेगा जमाना ऐसा काम कर देंगे ये जिन्दगी अपनी तुम्हारे नाम कर देंगे हम जियेंगे और मरेंगे बस इक तेरे लिए ऐलान इस बात …

जड़ चेतन – डी के निवातिया

जड़ चेतन *** मैं तो जड़ हूँ पर तुम तो चेतन हो, सँवार लो तुम, दे परिचय प्रबुद्धता का, तराश लो मुझे, अपने मन माफिक, कायम कर दो, गूढ़ता …

वो प्रेम नहीं – डी के निवातिया

कविता जिसका प्रदर्शन हो, वो प्रेम नहीं, नयनों से दर्शन हो, वो प्रेम नहीं !! ! जो हम-तुम करते है, प्रेम वो नही, जो मन मे विचरते है, प्रेम …

तुम बहुत याद आते हो – डी के निवातिया

तुम बहुत याद आते हो, तुम बहुत याद आते हो,क्यों इतना सताते हो जीने देते,न मरने देते हो क्यो इतना रुलाते !! जब से तुम चले गए दुनिया हमसे …

तू कैसा प्रेमी है – डी के निवातिया

तू कैसा प्रेमी है !! *** देता है न माँगता सोता न जागता न रोता न हँसता भागता न थकता देखता न तकता, बोलता न बकता, सभी को लगता …

नाकामी – शिशिर मधुकर

फूल वो सुख नहीं देता जिसकी खुशबू में खामी है तुम आगे बढ़ नहीं सकते अगर मन में गुलामी है भले कांटें अनेकों हैं महकते गुल की सोहबत में …

दे देना हमको माफ़ी – डी के निवातिया

मैं पतझड़ की पाती, तुम हो उपवन का फूल ! दे देना हमको माफ़ी, जो हो जाए हमसे भूल !! मै गाँव का देशी छोरा तुम ठहरी शहरी मेम, …

चमक कम न हो – डी के निवातिया

चमक कम न हो *** चाँद से रोशन चेहरे की चमक कम न हो, झील सी गहरी ये आँखे कभी नम न हो, बहारों की फिज़ाओ में दमकता ये …

चिट्ठियां जो तुम्हे भेजनी थी वो खो गई

चिट्ठियां जो तुम्हे भेजनी थी वो खों गईं____मेरी पसंद ,मेरा इंतजार लिखा होता थाशब्दों के हेर फेर इजहार लिखा होता था।मैं पसंद ना आऊं तो मत कहना किसी सेइस …

बिना मुस्कान के – शिशिर मधुकर

दर्द कोई पल रहा हो दिल में गर इंसान के फिर तुम्हें हरदम दिखेगा वो बिना मुस्कान के हर तरफ बिखरा पड़ा है घोंसला वो प्यार का दिख रहे …

बिना आत्मा – शिशिर मधुकर

मुद्दत हुई जब मिलोगे कुछ तो बताओगे मन की तुम्हें याद करनी पड़ेगी हर बात अपने वचन की सीने में कांटे गड़े हैं लेकन ना मैं रो रहा हूं …

अभी भी कसर है – शिशिर मधुकर

यूं ही नहीं हम परेशां ये सब तुम्हारा असर है मिलना मिलाना हुआ है लेकिन अभी भी कसर है तुम दूर बैठे हो छुप के आते नहीं सामने अब …

खुद में सिमट रहे हैं – शिशिर मधुकर

अपनी क्या तुमको बताएं मुश्किल से दिन कट रहे हैं बिन तेरे लम्हें सुकूं के जीवन से नित घट रहे हैं जाने पसीजो के फिर तुम या यूं ही …