Tag: सामाजिक विसमतांओं /ग़रीबी पर कविता
दु:ख ऊँची नहीं होती पहाड़ जैसा और चैाड़ी भी नहीं होती समुद्र जैसा पर जिसके ह्र्दय मे हर्ष और प्यार की कमी होती है दु:ख बाढ़ के पानी जैसा …
ठीक से शफल करो यार, वो पांच हैं, उनमें से चार, 65 वर्ष से जुआं खेल रहे हैं, तीन पत्ती, उनमें से एक हर बार हारता है, उसके पास …
भूख..एक सवाल ?? बेजान सूनी आँखें, सुख गये आँसू,नज़र धुँधलाते दाँत कसकर भींचे, “वे” भूख को अंतढ़ीयों में दबाते “वे” देते अभिशाप उस ख़ुदा को जिस कारन “वे” रोते …
भगवान का निवास वेद-पुराण के परिभाष कण-कण में इश्वर का वास जीव-निर्जीव सब में निवास फिर स्वर्ग में, या वेकुंठ में प्रवास मैं अज्ञानी मुझे नहीं आभास बताये मन्दिर …