Tag: ज़िन्दगी पर कविता

तुम बहुत याद आते हो – डी के निवातिया

तुम बहुत याद आते हो, तुम बहुत याद आते हो,क्यों इतना सताते हो जीने देते,न मरने देते हो क्यो इतना रुलाते !! जब से तुम चले गए दुनिया हमसे …

हुई महंगी मुबारकबाद -डी के निवातिया

हुई महंगी मुबारकबाद *** हुई महंगी बहुत ही मुबारकबाद, के सोच समझ कर दिया करो, देना हो जरूरी,तो रखना हिसाब, हर घड़ी हर शख्स को न दिया करो..!! कुछ …

आदमी है, खाता है – डी के निवातिया

आदमी है, खाता है, *********** आदमी है, खाता है, खाकर भी गुर्राता है, करता है खूब चोरी साथ में सीना जोरी कर के गर्व से चौड़ी छाती लाल पीली …

रिश्ते – डी के निवातिया

रिश्ते *** *** रिश्ते वही मगर, रिश्तो में रिश्तो की वो बात नहीं है, सम्बन्ध वही, मगर सम्बन्धो में ज़ज्बात नहीं है, घर में बैठे, चार प्राणी अपनी गर्दन …

नाकामी – शिशिर मधुकर

फूल वो सुख नहीं देता जिसकी खुशबू में खामी है तुम आगे बढ़ नहीं सकते अगर मन में गुलामी है भले कांटें अनेकों हैं महकते गुल की सोहबत में …

नुकसान – शिशिर मधुकर

तोड़ देना काश रिश्तों को बहुत आसान होता मन तनहा देखो हमारा फिर तो ना परेशान होता राहगीरों की खबर जो पूछ कर के जान लेते इस सफर में …

मैं क्या हूँ ? { श्रमिक वर्ग की वेदना }

दिखने में तो इंसान हूँ ,मगर क्या वास्तव में इंसान हूँ ?न दिल अपना ,न दिमाग अपना ,जो जिधर कहे वहीं चला जाता हूँ ।कभी गाँव से शहर की …

सयाने – शिशिर मधुकर

देखो तनहा जिंदगी का मेला तो वीरान होगा कर लो मुहब्बत किसी से जीना भी आसान होगा मुहब्बत के बिन तो गरीबी हर पल रहेगी जहन में मिलेगा जिसे …

सबसे ख़ास – शिशिर मधुकर

चलते रहे हैं देख लो मंजिल ना पास है कोई नहीं है जिससे कहें तू सबसे खास है रिश्तों की भीड़ में कोई रिश्ता नहीं मिला कैसे कहूं कि …

रिसते हुए नासूर – शिशिर मधुकर

हरदम रहे है साथ मगर दिल तो मिले नहीं बगिया में महके फूल तभी देखो खिले नहीं जाने क्या क्या सोच कर के मैं खामोश हो गया चुप हूं …

कहते ये लोग हैं – शिशिर मधुकर

उलफत ना तुम तलाश करो कहते ये लोग हैं खुशियों की चाह में यहां मिलते वियोग हैं जड़ से खत्म ना हो सके कोशिश करीं कई दुनिया से पूछ …

मत हो परेशां – शिशिर मधुकर

भूलेंगे तुझको कभी ना वादा है इस बात का सुन फिर से मैं तुझपे उगूंगा बोल शाखा को ये पात का सुन नींदें लगेंगी तभी तो ख्वाबों में कोई …

सूरज की किस्मत – शिशिर मधुकर

तूफान आते रहेंगे जीवन भी चलता रहेगा मिले ना मिले तू मुझे पर प्यार अपना पलता रहेगा ठोकर लगे ना तो जीवन में कोई दर्द को ना जाने गिरता …

कुछ सवाल ज़िंदगी से ….. (गजल)

यह क्या रोग लगाया है खुद को ए ज़िंदगी !,जिंदगी से कहीं पीछे छुट गयी तू ज़िंदगी ।कितनी हसरतें थी तेरी,और कितनी चाहते ,वो सब तुझसे क्यों रूठ गयी …

और कितनी चाहिए तुम्हें आज़ादी ? (कविता)

आज़ादी ! आज़ादी !आज़ादी !,बस रट लगा रखी है ‘आज़ादी ‘।इस लफ्ज की गहराई जानते हो ?आखिर क्या है यह आज़ादी ?ऊंची सोच और विशाल ह्रदय ,सयमित जीवन है …

दर्द सहने की आदत – शिशिर मधुकर

समय ने छल किया मुझसे तो अब ये हाल है मेरा बड़ा मायूस रहता हूं ना चमका भाल है मेरा बड़ी लम्बी हुई तुमसे जुदाई की घड़ी देखो बताऊं …