Tag: ज़िन्दगी पर कविता

जुदा हो जाऊँगा – डी के निवातिया

जुदा हो जाऊँगा *** कोई रोकना चाहेगा लाख फिर भी जुदा हो जाऊँगा लगाकर गले मौत को,  जिंदगी से ख़फ़ा हो जाऊँगा !! चाहकर भी कुछ न कर पायेगा …

औकात दिखा दी – डी के निवातिया

औकात दिखा दी *** इक बीमारी ने इंसानों को उनकी औकात दिखा दी, इंसान के भेष में छुपे हुए हैवानों की जात दिखा दी ! कोई रोता अपनो को …

रोना याद आया – डी के निवातिया

रोना याद आया *** रोते हुए देखा पड़ोसी को तो रोना याद आया, जब भूख लगी, तब फ़सल बोना याद आया ! सोया था पैर पसार कर, बड़े ही …

तेरी भी खता है – डी के निवातिया

तेरी भी खता है *** ख़ुदा की रज़ा क्या है ये किसे पता है, किसी और को दोष देना बड़ी धता है! जो भी हुआ है सबक ले कुछ …

सुरूर अच्छा नहीं होता – डी के निवातिया

सुरूर अच्छा नहीं होता *** हुस्न पर शबाब का सुरूर अच्छा नहीं होता, खूबसूरती पर करना गुरुर अच्छा नहीं होता, पानी के बुलबुले की तरह होती है ये जिंदगी, …

वो प्रेम नहीं – डी के निवातिया

कविता जिसका प्रदर्शन हो, वो प्रेम नहीं, नयनों से दर्शन हो, वो प्रेम नहीं !! ! जो हम-तुम करते है, प्रेम वो नही, जो मन मे विचरते है, प्रेम …

हमदर्द ढूंढते हो – डी के निवातिया

हमदर्द ढूंढते हो, दर्द के साये में रहते हो, और हमदर्द ढूंढते हो, बड़े नादाँ मरीज़ हो, खुद-ब-खुद मर्ज़ ढूंढते हो !! खुदगर्ज़ी की जीती जागती मिसाल हो आप, …

तुम बहुत याद आते हो – डी के निवातिया

तुम बहुत याद आते हो, तुम बहुत याद आते हो,क्यों इतना सताते हो जीने देते,न मरने देते हो क्यो इतना रुलाते !! जब से तुम चले गए दुनिया हमसे …

हुई महंगी मुबारकबाद -डी के निवातिया

हुई महंगी मुबारकबाद *** हुई महंगी बहुत ही मुबारकबाद, के सोच समझ कर दिया करो, देना हो जरूरी,तो रखना हिसाब, हर घड़ी हर शख्स को न दिया करो..!! कुछ …

आदमी है, खाता है – डी के निवातिया

आदमी है, खाता है, *********** आदमी है, खाता है, खाकर भी गुर्राता है, करता है खूब चोरी साथ में सीना जोरी कर के गर्व से चौड़ी छाती लाल पीली …

रिश्ते – डी के निवातिया

रिश्ते *** *** रिश्ते वही मगर, रिश्तो में रिश्तो की वो बात नहीं है, सम्बन्ध वही, मगर सम्बन्धो में ज़ज्बात नहीं है, घर में बैठे, चार प्राणी अपनी गर्दन …

नाकामी – शिशिर मधुकर

फूल वो सुख नहीं देता जिसकी खुशबू में खामी है तुम आगे बढ़ नहीं सकते अगर मन में गुलामी है भले कांटें अनेकों हैं महकते गुल की सोहबत में …

नुकसान – शिशिर मधुकर

तोड़ देना काश रिश्तों को बहुत आसान होता मन तनहा देखो हमारा फिर तो ना परेशान होता राहगीरों की खबर जो पूछ कर के जान लेते इस सफर में …

मैं क्या हूँ ? { श्रमिक वर्ग की वेदना }

दिखने में तो इंसान हूँ ,मगर क्या वास्तव में इंसान हूँ ?न दिल अपना ,न दिमाग अपना ,जो जिधर कहे वहीं चला जाता हूँ ।कभी गाँव से शहर की …

सयाने – शिशिर मधुकर

देखो तनहा जिंदगी का मेला तो वीरान होगा कर लो मुहब्बत किसी से जीना भी आसान होगा मुहब्बत के बिन तो गरीबी हर पल रहेगी जहन में मिलेगा जिसे …

सबसे ख़ास – शिशिर मधुकर

चलते रहे हैं देख लो मंजिल ना पास है कोई नहीं है जिससे कहें तू सबसे खास है रिश्तों की भीड़ में कोई रिश्ता नहीं मिला कैसे कहूं कि …

रिसते हुए नासूर – शिशिर मधुकर

हरदम रहे है साथ मगर दिल तो मिले नहीं बगिया में महके फूल तभी देखो खिले नहीं जाने क्या क्या सोच कर के मैं खामोश हो गया चुप हूं …