Tag: लाचारी /विवस्तायों मे फंसी ज़िन्दगी

काली रात आयी है – डी के निवातिया

काली रात आयी है *** डोली में सजकर, माँ के घर, ये कैसी सौगात आई है,तिरंगे में लिपटे देखो, बाँके दूल्हों की बारात आई है। एक बार फिर से …

नकली व्यवहार – शिशिर मधुकर

कौन किसको जहां में आज दिल से प्यार करता है जमाना बस दिखाने को नकली व्यवहार करता है साथ रहता है वो बंधन हैं कुछ तो ये नहीं समझो …

अनजान – शिशिर मधुकर

मैंने सजाया था तुम्हें अपने मुकुट में मान सा लेकिन तुम्हें ना हो सका उसका जरा भी भान साअब क्या करे कोई तुम्हारी सोच तो बदली नहींतुमको भी साथी …

कोशिशें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में थी जब तो प्यार आँखों से झरता था मैंने उल्फत का तब हर पल तेरे संग हंस के बरता था कोशिशें गर तेरी मुझको सुकूं देने …

इबारत – शिशिर मधुकर

समझता नहीं है बातें तू मेरी मैं चोट जीवन में खाई हुई हूँकभी कंगनों ने सजाया था मुझको सूनी मगर अब कलाई हुई हूँ मुझे मेरे अपनों ने जी …

सलीब- शिशिर मधुकर

जादू तेरी आवाज़ का जिसको नसीब हैदौलत असल उसे मिली वो कैसे गरीब है क्यों ना जलूँ मैं उसके मुकद्दर को देख केतेरे हुस्न की मय पी रहा मेरा …

उल्फ़त में दीवाने – शिशिर मधुकर

अरे उल्फ़त में दीवाने मेरे पीछे क्यों आता हैघूम के जुड़ ही जाएगा अगर जन्मों का नाता हैसमय से ही मिला करती हैं सारी नेमतें जग में हर इक …

गुनाह- शिशिर मधुकर

अरमान टूटते हैं जब उल्फ़त की राह मेंदिल में मिलेगा दर्द एक ऐसी ही चाह मेंनज़रों से मैंने आज भी उसको किया दुलारलेकिन दिखी ना तिश्नगी कोई निगाह मेंमायूस …

कमल – शिशिर मधुकर

गुल कमल के तू कहाँ कीचड़ में खिल गया तेरे हुस्न का रुआब सब मिट्टी में मिल गयाकपड़ा वो बड़ा कीमती अनजान को मिलादेखो लिबास सारा ये उल्टा ही …

मेरा मन तर नहीं होता – शिशिर मधुकर

अगर दीवानगी होती तो फिर ये डर नहीं होता तुम भी तन्हा नहीं रहते सूना ये घर नहीं होतामैं तो मुद्दत से प्यासा हूँ आस बारिश की रखता हूँफ़कत …

लाचारी – शिशिर मधुकर

मिलन की आरजू पे डर ज़माने का जो भारी हैतेरी मेरी मुहब्बत में अजब सी कुछ लाचारी हैदोस्तों दोस्ती मुझको तो बस टुकडों में मिल पाईबड़ी तन्हा सी मैंने …

तेरी आवाज़ – शिशिर मधुकर

तेरी आवाज़ को सुनना सुकूँ एक रूह को देता हैशिकायत है मगर मुझको ख़बर तू क्यों ना लेता हैप्यार बरसेगा जो तेरा चैन कुछ आ ही जाएगामेरे जीवन के …

मुहब्ब्त की प्यास – शिशिर मधुकर

मिलन की चाह की देखो फ़कत बातें वो करता हैकभी कोशिश करे ना कुछ पास आने से डरता हैकोई सच्ची मुहब्बत अब न उसके पास है देखो मुझे भी …

दूर वो सहर गई – शिशिर मधुकर

बस तड़प तड़प में ही ये ज़िंदगी गुज़र गईदेने का वादा करा किस्मत मगर मुकर गईएक नशे में रह रहा था मैं तो पाल के स्वप्न असलियत से पर …