Tag: लाचारी /विवस्तायों मे फंसी ज़िन्दगी

नाकामी – शिशिर मधुकर

फूल वो सुख नहीं देता जिसकी खुशबू में खामी है तुम आगे बढ़ नहीं सकते अगर मन में गुलामी है भले कांटें अनेकों हैं महकते गुल की सोहबत में …

मैं क्या हूँ ? { श्रमिक वर्ग की वेदना }

दिखने में तो इंसान हूँ ,मगर क्या वास्तव में इंसान हूँ ?न दिल अपना ,न दिमाग अपना ,जो जिधर कहे वहीं चला जाता हूँ ।कभी गाँव से शहर की …

कोरोना वीरो को प्रणाम – डी० के० निवातिया

कोरोना वीरो को प्रणाम *** कोरोना वीरो का अमिट बलिदान,याद रखेगा बच्चा बच्चा हिंदुस्तान,इनकी मेहनत औ दरियादिली का,गुणगान युगों युगों करेगा ये जहान !! डर अब अंतस में रम …

कयामत……………………..देवेश दीक्षित

कयामत आई कोरोना की कयामत आई नज़रबंदी की किसने सोचा था ऐसा होगा मनुष्य घर में पागल होगा कुछ सूझ नहीं रहा कुछ बूझ नहीं रहा कयामत की इस …

रिसते हुए नासूर – शिशिर मधुकर

हरदम रहे है साथ मगर दिल तो मिले नहीं बगिया में महके फूल तभी देखो खिले नहीं जाने क्या क्या सोच कर के मैं खामोश हो गया चुप हूं …

मैंने बिसार ली – शिशिर मधुकर

तेरे बिना भी जिन्दगी ले मैंने गुजार ली गठरी हर इक उम्मीद की सर से उतार ली बीते लम्हों को भूलना आसान तो नहीं अपने वस्ल की हर घड़ी …

कहते ये लोग हैं – शिशिर मधुकर

उलफत ना तुम तलाश करो कहते ये लोग हैं खुशियों की चाह में यहां मिलते वियोग हैं जड़ से खत्म ना हो सके कोशिश करीं कई दुनिया से पूछ …

दर्द सहने की आदत – शिशिर मधुकर

समय ने छल किया मुझसे तो अब ये हाल है मेरा बड़ा मायूस रहता हूं ना चमका भाल है मेरा बड़ी लम्बी हुई तुमसे जुदाई की घड़ी देखो बताऊं …

दौर इक वो भी था – शिशिर मधुकर

घाव सूखा नहीं अब तक बना जो तेरे जाने से मगर क्या फायदा तुझको पीर अपनी बताने से आज फिर से कुरेदा दिल के मेरे राज को उसने उभर …

मौन की भाषा – शिशिर मधुकर

ये मेरे मौन की भाषा समझ ना कोई पाएगा जो दिल से सोचता होगा वही नजदीक आएगा यही हाथियार है मेरा किसी से दूर जाने का मुझे दुश्मन लगे …

कुदरत से क्या लड़ूं – शिशिर मधुकर

दिल की ये आरजू है कोई संग में चले मेरे बन के स्वप्न अंखियों में कोई हरदम पले मेरे देखो मैं ढूंढता हूं किसी बिछड़ी सी रूह को कब …

फूल का सा मन – शिशिर मधुकर

तुमको तलाशते रहे तुम ना मिले मुझे हरदम रहेंगे जान लो कुछ तो गिले मुझे सब कुछ लुटा दिया फकत इक बोल पे तेरे मिल जाते काश इसके एवज …

लाचार

भेद-भाव के व्यवहार कादस्तक दिया घाव काऐसा हुआ विस्तारकि मासूमियत हुई लाचार आरोपियों की खान काजुर्मों की दुकान काऐसा हुआ विस्तारकि अबला हुई लाचार जरा-जरा सी बात काआकार लेती प्रहार काऐसा …