Tag: प्रेरणापूरक काव्य

ज़िन्दगी के काले पन्ने

काली अंधेरी रात, आसमान में कड़कड़ाती हुई बिजली के साथ मूसलाधार बारिश और पेड़ को जड़ से उखाड़ देने वाली आंधी चल रही थी। वरुण घर के बरामदे में …

आशाओं के दीप जलाना।

आशाओं के दीप जलाना।घोर अँधेरा घिरे डगर मेंबाधित पथ हो गली-नगर में,सूरज थका-थका दिखता होभाग्य धरा का तम लिखता हो।अम्बर पुलकित मारे ताना              …

मैं क्या हूँ ? { श्रमिक वर्ग की वेदना }

दिखने में तो इंसान हूँ ,मगर क्या वास्तव में इंसान हूँ ?न दिल अपना ,न दिमाग अपना ,जो जिधर कहे वहीं चला जाता हूँ ।कभी गाँव से शहर की …

कुछ सवाल ज़िंदगी से ….. (गजल)

यह क्या रोग लगाया है खुद को ए ज़िंदगी !,जिंदगी से कहीं पीछे छुट गयी तू ज़िंदगी ।कितनी हसरतें थी तेरी,और कितनी चाहते ,वो सब तुझसे क्यों रूठ गयी …

और कितनी चाहिए तुम्हें आज़ादी ? (कविता)

आज़ादी ! आज़ादी !आज़ादी !,बस रट लगा रखी है ‘आज़ादी ‘।इस लफ्ज की गहराई जानते हो ?आखिर क्या है यह आज़ादी ?ऊंची सोच और विशाल ह्रदय ,सयमित जीवन है …

जनतंत्र …. फैसला….

क्यूंकि मैं उनको भा गयी थी….फैसला था…घर के सभी लोगों का…मुझे छोड़ कर…शादी ऊंचे घराने में…कर दी मेरी….ऊंची एड़ी के सैंडल…चमकते हुए…बहुत चुभते थे मुझे…बहुत तकलीफ देते थे…सब को …

पवन – डी० के० निवातिया

हे पवन !तू है बड़ी चंचल री,छेड़ जाती है,अधखिले पुष्पों को…!है जो चिरनिंद्रा में लीन,सुस्ताते हुए डाल पर,तेरे गुजरने के बादविचलित हो उठते है,नंन्हे शिशु की मानिंदतरस उठते है,जैसे …

जिंदगी और मौत का खेल

शुक्र है जिंदगी बाजार में खरीदी नहीं जाती lखरीदी जाती तो अमीरों की गुलाम बन जाती llअमीर फिर मौत को अपने इशारों पर नचाता lमौत की आगोश में सिर्फ …

मुझको वो कर दिखाना है- डी. के. निवातिया

——::अब मुझको वो कर दिखाना है ::—- *** अपना लक्ष्य मुझे हर हाल में पाना हैलाख बाधा हो राह में नही घबराना हैठाना है मैंने जो कुछ कर गुजरने …

हम तुम्हे भुला न पाए …… (ग़ज़ल ) { अमर गायक स्व.मुहम्मद रफ़ी साहब की याद में }

कितने ही ज़माने गुज़र गए ,मगर हम तुम्हें ना भुला पाए.तेरी तस्वीर पर सजदा किया,तेरी याद में दो अश्क बहाए.तेरे गीतों को जब सूना तो,कई मंज़र आखों के रूबरू …

आरक्षण बंद करो

जातिगत के नाम पर, अब आरक्षण बंद करो lप्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ने का मौका दो llजातिगत का हर तबका गरीब नहीं पाया जाता lफिर देकर आरक्षण, क्यों कमजोर …

यह जीव -हत्या क्यों और कब तक ! (कविता )

यह बेजुबान जानवर,यह भोले जानवर ,इंसान की नियत से बेखबर ,यह मासूम जानवर .घर पर तो लाते हैं,बड़ा प्यार-दुलार देते हैं,लेकिन जब निकल जाये मतलब,तो सड़कों पर भटकने/मरने को …

मानवता ही धर्म

हिन्दू ,मुस्लिम,सिख, ईसाई lकिसने इन धर्मो में बाटा है llपैदा होता है जब एक इंसा lवो धर्म लेकर नहीं आता है llधर्मो की ये मोहर लगाकर lकिसने हमको अलग …

बस यूं ही जगमगाते रहना

अक्सर और अधिकांश कई लोगों को रौशनी बहुत ही पसंद होती है और जब बात करे दिए कि तो वो बहुत ही सुंदर दिखती है बिल्कुल फूटरी आनंदी की …

बिन पटाखे दिवाली सून

प्रदूषण की आड़ में बंद कर दी आतिशबाज़ी lबोले ना होगा धुआँ ना होती पैसो की बर्बादी llसमझ नहीं आता क्या प्रदूषण यही फैलता है lसिगरेट का धुआँ, पर्यावरण स्वच्छ बनता …