Tag: देश पर कविता

मातृभूमि का श्रृंगार करो – डी के निवातिया

आज़ादी के पावन दिन पर, मातृभूमि का श्रृंगार करो देश ध्वजा का संदेश यहीं, वैर  भाव का संहार करो।। जो मिट गए, जो खो गए, हाथ थाम तिरंगा सो …

कविता- देश में फैली ये तमाम बातें कैसी?

इंसानियत की बात करते हो हरदम, फिर ये  फैली नफरत की आग कैसी?…. सुकून की तलाश में निकले हो सब फिर ये आतंक – हिंसा की बात कैसी?… रहते …

और कितनी चाहिए तुम्हें आज़ादी ? (कविता)

आज़ादी ! आज़ादी !आज़ादी !,बस रट लगा रखी है ‘आज़ादी ‘।इस लफ्ज की गहराई जानते हो ?आखिर क्या है यह आज़ादी ?ऊंची सोच और विशाल ह्रदय ,सयमित जीवन है …

काली रात आयी है – डी के निवातिया

काली रात आयी है *** डोली में सजकर, माँ के घर, ये कैसी सौगात आई है,तिरंगे में लिपटे देखो, बाँके दूल्हों की बारात आई है। एक बार फिर से …

शोलो से लड़ना होगा – डी. के. निवातिया

शोलो से लड़ना होगा *** सहते – सहते, सह  रहे है हम,सदियों से आतंक की अठखेलियां, कितने आये कितने गए सत्तारूढ़ बुझा रहे आजतक सिर्फ पहेलियाँ,कुछ तो खामी होगी …

पीड़ा की लहरें – शिशिर मधुकर

शहीदों की चिताओं पर उठी पीड़ा के लहरें हैं मगर सोचो ज़रा हम ही तो असली अंधे बहरे हैसोचते रहते हैं एक दिन शेर भी घास खाएगाजेहादी बुद्ध बन …

“जागो भाग्य विधाताओं”

“जागो भाग्य विधाताओं”देखा अजब तमाशा, छायी दिल में निराशा,चार गीदड़ ले गये, मूँछ तेरी नोच के।सोये हुए शेर तुम, भूतकाल में हो गुम,पुरखों पे नाचते हो, नाक नीची सोच …

क्या कहना – डी के निवातिया

क्या कहना ! मेरे देश के चौकीदारों का, क्या कहना, भई क्या कहना।एक से बढ़कर एक आया, कोई भाई बनकर, कोई बहना ।। क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना।क्या कहना …

भारत की छटा – डी के निवातिया

भारत की छटा मेरे भारत में जनता की, रीत बड़ी निराली है,जो दिल को बहला दे ये उसकी ही सवाली हैदिन को रात कहने वालो की ये भरते हामी हैयहाँ …

सटीक निर्णय लेना – अनु महेश्वरी

 आज के राजनेताओं सेक्या अब उम्मीदे होगीइनकी बयानबाजी देखोसब ये लगते है ढोंगी।मतलब निकलते ही देखोमुँह फेर चले जाते हैचुनाव के पहले कैसे सबहाथ जोड़ फिर आते है।इनका न …

वतन इश्क़ से ऊंचा इश्क़ नहीं है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

सुनो तुम आजाद हिन्द के वासी….करना कभी तुम न हमसे किनारा…देकर लहू हमने सींचा वतन है….रहे ऊंचा मस्तक वतन ओ हमारा…धरम न जाती कुछ भी न देखा…वतन राह में …

मै भारत माता बोल रही हूँ – डी के निवातिया

मै भारत माता बोल रही हूँ *** जंजीरों में जकड़ी हूँमै भारत माता बोल रही हूँह्रदय में उठती पीड़ाचन्द शब्दों में खोल रही हूँ ।। कोई बन गया पैसे …

अमर रहेगा नाम तुम्हारा — डी के निवातिया

अमर रहेगा नाम तुम्हारा *** तुम योग्य लफ्ज़ नहीं पास मेरे, कैसे करुँ गुणगान तुम्हाराराजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह, कितना है अहसान तुम्हारादेश प्रेम के सूचक थे तुमदेश की खातिर …

धैर्य की परीक्षा – डी के निवातिया

   धैर्य की परीक्षा *** अब न खाली हो किसी माँ की गोद, कोई लाल अब न फ़ना होकब तक देनी होगी धैर्य की परीक्षा, अब कोई नियम बना …

राष्ट्रोत्कर्ष-उत्थान

यह राष्ट्र मुझे करता अभिसींचित् प्रतिपल मलय फुहारों से ,प्रतिदानों में मिले ठोकरों , धिकारों, दुत्कारों से ,जो लूट रहे मुझको हर क्षण ,उन कायर कुधारों से ,विविध द्रोहियों …

बस रहे हम हिंदुस्तानी – अनु महेश्वरी

केवल अँधेरे की बातें करने से, यह दूर नहीं होगा,हर एक को दीया जला, जहाँ रोशन करना होगा|शिकायतों का दौर छोड़ अब कुछ कर दिखाना है,अपना पराया छोड़, अब …

काश, ऐसे भारत का निर्माण अब हकीकत हो – अनु महेश्वरी

हर इंसान बने, अब अच्छा,नाता जोड़े, लोगो से सच्चा,छल कपट और दुर्भावना का यहाँ न कोई स्थान न हो,देश तोड़ने वालो का इस जहाँ में अब न कोई मान …

काश ! हम बच्चे ही होते…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

काश ! हम बच्चे ही होते….दिल से हम फिर सच्चे होते….न कोई होता वैरी अपना…न हम किसी के दुश्मन होते…काश ! हम बच्चे ही होते….सुबह सुबह नहीं उठते जब …

इक्कीसवीं सदीं का अट्ठारवां साल

इक्कीसवीं सदीं का अट्ठारवां साल *** इक्कीसवीं सदीं के, अठ्ठारवे साल का, जवानी में कदमदेखेगी दुनिया, है कितना, मेरे वतन कि रवानी में दमदुश्मन, कितना भी कोशिश कर ले, …

अमन की खुशबु – अनु महेश्वरी

आओ मिल सब, चाहत के, फूल हम खिलाए,न हम झगड़े, न ही और हम नफ़रत ही फैलाए|सामंजस्य अपना बना रहे, और एकता हम दिखलाए,किसी के फ़ायदे के लिए, हमे …

दिवंगतों को मत बदनाम करो — डी के निवातिया

दिवंगतों को मत बदनाम करो *** अपने पूर्वजो की गैरत कटघरे ला दीतुमने आकर मीठी बातो में !सत्तर साल की कामयाबी मिटा दीतुमने आकर के जज्बातो में !! कौन …

मैं सैनिक हूँ

मैं सैनिक हूँमैं जगता हूँ रातभरचौकस निगाहें गड़ाए हुएउस जगह जहाँ अगली सुबह देख पाऊंइसमे भी संशय हैउसके लिए जो अभी अभीछाती से लगाके सोई है मासूम बच्चे कोमैं …

आला-रे-आला — डी के निवातिया

आला-रे-आला *** आला-रे-आला, सुन मेरे लाला, लगा ले अपनी जुबान पे तालाजो बोलेगा सच्ची सच्ची बाते, किया जायेगा उसका मुँह कालावतन व्यवस्था का टूटा पलंग हैचरमारती अर्थव्यवस्था बेढंग हैढीला …

स्‍वप्‍न देखा था कभी : अटल बिहारी वाजपेयी

स्‍वप्‍न देखा था कभी जो आज हर धडकन में है        एक नया भारत बनाने का इरादा मन में हैएक नया भारत, कि जिसमें एक नया विश्‍वास होजिसकी आंखों में …