Tag: देशभक्ति गीत

मातृभूमि का श्रृंगार करो – डी के निवातिया

आज़ादी के पावन दिन पर, मातृभूमि का श्रृंगार करो देश ध्वजा का संदेश यहीं, वैर  भाव का संहार करो।। जो मिट गए, जो खो गए, हाथ थाम तिरंगा सो …

और कितनी चाहिए तुम्हें आज़ादी ? (कविता)

आज़ादी ! आज़ादी !आज़ादी !,बस रट लगा रखी है ‘आज़ादी ‘।इस लफ्ज की गहराई जानते हो ?आखिर क्या है यह आज़ादी ?ऊंची सोच और विशाल ह्रदय ,सयमित जीवन है …

काली रात आयी है – डी के निवातिया

काली रात आयी है *** डोली में सजकर, माँ के घर, ये कैसी सौगात आई है,तिरंगे में लिपटे देखो, बाँके दूल्हों की बारात आई है। एक बार फिर से …

सबसे पहले है देश – अनु महेश्वरी

बधाई हो बधाई हो,स्वतंत्रता दिवस की सबको बधाई हो। पाने के लिए ये आज़ादी,पुर्वजों ने दी है कुर्बानी,देखो इसे अब न कोई, ज़ख्म दे जाए।बधाई हो बधाई हो,स्वतंत्रता दिवस …

ज़लवा दिखाओ तो जाने – डी के निवातिया

ज़लवा दिखाओ तो जाने *** आज भी पहले सा मुस्कराओ तो जानेफिर से वही ज़लवा दिखाओ तो जाने !! मुहब्बत को तरस गयी है प्यासी निगाहेंफिर उसी मंज़र से …

अमर रहेगा नाम तुम्हारा — डी के निवातिया

अमर रहेगा नाम तुम्हारा *** तुम योग्य लफ्ज़ नहीं पास मेरे, कैसे करुँ गुणगान तुम्हाराराजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह, कितना है अहसान तुम्हारादेश प्रेम के सूचक थे तुमदेश की खातिर …

शत शत नमन — डी के निवातिया

जय जवान – जय किसानके उद्घोषकभारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री जी कीपुण्य तिथि पर शत शत नमन२ अक्तू १९०४ – ११ जनवरी १९६६ *** “लाल” जैसे लालो के …

अमन की खुशबु – अनु महेश्वरी

आओ मिल सब, चाहत के, फूल हम खिलाए,न हम झगड़े, न ही और हम नफ़रत ही फैलाए|सामंजस्य अपना बना रहे, और एकता हम दिखलाए,किसी के फ़ायदे के लिए, हमे …

मैं सैनिक हूँ

मैं सैनिक हूँमैं जगता हूँ रातभरचौकस निगाहें गड़ाए हुएउस जगह जहाँ अगली सुबह देख पाऊंइसमे भी संशय हैउसके लिए जो अभी अभीछाती से लगाके सोई है मासूम बच्चे कोमैं …

तुम कर्णधार हो – अनु महेश्वरी

उठो, जागो, नौजवानों, तुम पर ही,अब, भारत का सब, भार है,विश्वास हमें है पूरा तुम पे,तुम रखोंगे, इसे सम्भाल के|जब जब दुश्मन वार करें,शीश इसका न, झुकने देना,पड़े ज़रूरत …

घर घर में आतंकी – शिशिर मधुकर

बाहरी दुश्मन की ज़रूरत नहीं है भारत को वो घर घर में यहाँ आसानी से मिल जाएंगेटीवी पर्दे पे अपने कारोबार की तरक्की कोबुरहान वानी की बरसी को ये …

बस इस देश का परचम लहराए – अनु महेश्वरी

राह सबकी अलग हो सकती जहाँ,पर मंजिल सबकी एक ही है यहाँ| सही रास्ते पे चले हर इंसान,हुआ इसलिए धर्म का निर्माण| धर्म के भी ठेकेदारों ने जन्म लिया,इस …

कभी देशद्रोही, तुम मत बनना – अनु महेश्वरी

अगर भला न कर सको, चलेगा,कभी किसी का बुरा मत करना|अगर दानवीर न बन सको, चलेगा,कभी किसी के हक़ का मत छीनना|प्यार से बात न कर सको, चलेगा,कभी किसी …

एक सैनिक की गाथा – अनु महेश्वरी

सभी की तरह मैंने भी घर छोड़ा था,कुछ बनने के लिए, कुछ काम करने के लिए,कड़ी मेहनत के बाद, नौकरी भी मिल गयी थी,मैंने भी कर्तव्य निष्ठा से अपना …

मैं शरीफ था इसलिए चुप रहा- आशीष अवस्थी

मैं शरीफ था इसलिए चुप रहालोगों ने समझा मुझे जवाब नहीं आता जब से शराफत निकाल के फेंकी मैंने अब लोगों को सवाल नहीं आता कुछ सोच कर बख्शे थे …

७१. सारे जग में भारत सा………….देश नही |गीत| “मनोज कुमार”

मेरा भारत, अदभुत भारत, अतुलनीय भारतना ताज जैसी कोई ईमारत कहीं ना गंगा जैसी कोई नदी है कहीं सारे जग में भारत सा कोई नही, देश नही मेरे भारत …

६८. हिंदुस्तान की बिटिया मैं………. तेरी दीवानी हूँ |गीत| “मनोज कुमार”

हिंदुस्तान की बिटिया मैं हिन्दी बोली जानी हूँमेरी भारत धरती माँ मैं तेरी दीवानी हूँहिंदुस्तान की बिटिया मैं……………………………….. तेरी दीवानी हूँनैनों में शोले रखती हूँ ये खून सैनानी है …

अब तक क्यों ना ठानी है – शिशिर मधुकर

जब भी मेरी भारत माता का कोई लाल बलि चढ़ जाता है कायरता का रोना धोना अपने अखबारों में छप जाता है दुर्दांत पड़ोसी से सभ्य व्यवहार की आकांक्षाएँ …

देश के लाल फना हो जाते है — डी. के. निवातिया

देश के लाल फना हो जाते है *** पुराने जख्म भरते नहीं की नये फिर से मिल जाते हैसेनापतियों की गैरत पे जाने क्यों ताले पड़ जाते हैचलता रहता …

उधम सिंह सरदार… ~Gursevak singh pawar

उधम सिंह सरदार…देश की शान बचाने वाला,देश का मान बढ़ाने वाला !!उधम सिंह सरदार…पंजाब की मिटटी मे पैदा होकर,तुमने गुरुओं का मान बढ़ाया !!अपने आप को सींच कर,तुमने गोरों …

किसान और जवान (विवेक बिजनोरी)

“राजनीति बन गयी तमाशा अपने हिंदुस्तान की,ये कीमत चुकाई है तुमने शहीदों के अहसान कीलूट लूट गरीबों को अपनी तिजोरी भर रहे,सबका पेट पालने वाले आत्महत्या हैं कर रहे।बाद …

घर घर दीप जलाए हैं – शिशिर मधुकर

मेरे देश के सैनिक वीरॉ मेरा नमन स्वीकार करोदुश्मन चैन नहीँ पाए तुम ऐसा प्रबल प्रहार करोजिन लालों ने सीमाओं पर अपने प्राण लुटायें हैं उनकी यादों में हम …

४१. टूट गयी अपनी ……….|गीत| “मनोज कुमार”

टूट गयी अपनी पुरानी महोब्बत रूठ गयी अपनी दीवानी महोब्बतमनाया भी हमने ना मानी महोब्बतदिल का भी हाल ना जानी महोब्बतटूट गयी अपनी………………………….. जानी महोब्बतक्या हाल दिल का बयाँ …