Tag: नज़्म

अपने ही घर में बेगाना हूँ – डी के निवातिया

अपने ही घर में बेगाना हूँ,हालत पर अपनी बेचारा हूँ ।।मैं सबका सब मेरे है फिर भी,अपनों के बीच अनजाना हूँ,।।कहने को है सारा शहर मेरामुर्दो की भीड़ में …

जब से हम कांटो को, गले से लगाने लगे है

  जब से हम कांटो को, गले से लगाने लगे हैलोग फूलो की चुभन से, हमे सताने लगे है !दर्द से रिश्ता कुछ ख़ास-म-खास हुआ हैमर्ज़-ऐ इश्क में खुद सुधार …

खुराफात हो जाए – डी के निवातिया

खुराफात हो जाए *** शैतानों की भीड़ में अगर इंसान से मुलाक़ात हो जाए,मैं समझू, की मेरी ईश्वर , अल्लाह से बात हो जाए !! झूठों के नगर में …

अनमोल तोहफा – डी के निवातिया

मुझसे दूर जाकर, मेरे ओर करीब आ गई, अमर होकर “माँ” तू अब मुझमे समा गई !! नासमझ थी मैं, जो तुमको खोकर रोई,मालूम न था, मैं तुमको सर्वस्व …

शुक्रिया अदा करना – डी के निवातिया

शुक्रिया अदा करना ! जाते हुए लम्हों को ज़रा हँसते हँसते विदा करना पल ख़ुशी के थे या गम के, शुक्रिया अदा करना ! लौटकर न आएगी ये फ़िज़ा, …

काली रात आयी है – डी के निवातिया

काली रात आयी है *** डोली में सजकर, माँ के घर, ये कैसी सौगात आई है,तिरंगे में लिपटे देखो, बाँके दूल्हों की बारात आई है। एक बार फिर से …

गंवारा नहीं – डी के निवातिया

गंवारा नहीं *** जाज़िब आब-ए-आईना है हम, कोई आवारा नहीं,हुस्न करे नज़रअंदाज़ कोई ये हमको गंवारा नहीं । मिल गए है ख़ाक में हूर-ऐ-जन्नत जाने कितने,लेकर अपनी पनाहो में जिसे …

छुप-छुप के – डी के निवातिया

छुप-छुप के ***ये जो छुप-छुप के नज़रे मिलाई जा रही है,जरूर कोई नई साज़िश रचाई जा रही है !!ये इश्क का मसला भी सियासत सा लगे है,मिलकर गले प्रेम …

ख़फा क्यों है – डी के निवातिया

ख़फा *** वो शख्स मुझसे इतना ख़फा क्यों हैबेवफाई में ढूंढता वो वफ़ा क्यों है !! कभी चाहत, कभी नफरत-ऐ-अदामिज़ाज़ उनका दो-तरफा क्यों है !! इक – दो बार …

अन-गिनत फूल मोहब्बत के चढ़ाता जाऊँ-सलीम रज़ा रीवा

अन-गिनत फूल मोहब्बत के चढ़ाता जाऊँ आख़िरी बार गले तुझ को लगाता जाऊँ oo जाने इस शहर में फिर लौट के कब आऊँगा पर ये वादा है तुझे भूल …

सताने लगे है – डी के निवातिया

सताने लगे है *** जब से हम काँटों को, गले से लगाने लगे हैलोग फूलों की चुभन से, हमे सताने लगे है ! दर्द से रिश्ता कुछ जब ख़ास-म-खास …

कहानी छोड़ जायेंगे – डी के निवातिया

कहानी छोड़ जायेंगे *** *** *** मिटाओगे कहाँ तक मेरी यादें, हर मोड़ पर लफ्जों की वीरानी छोड़ जायेंगे lकैसे बीतेगी तुम्हारी सुबह-शाम, हम सिसकती रातों की कहानी छोड़ …

दीवाना – डी के निवातिया

दीवाना___मै दीवाना, तेरी कातिल अदाओ पे मरने आ गयालुटां के जां इस जुर्म का जुर्माना भरने आ गया !!मुहब्बत करते देख जमाने को बाते बहुत बनायीमिटाके खुद को इसमें …

ज़लवा दिखाओ तो जाने – डी के निवातिया

ज़लवा दिखाओ तो जाने *** आज भी पहले सा मुस्कराओ तो जानेफिर से वही ज़लवा दिखाओ तो जाने !! मुहब्बत को तरस गयी है प्यासी निगाहेंफिर उसी मंज़र से …

अफ़सोस न कर – डी के निवातिया

अफ़सोस न कर *** मेरे वतन के हिस्से ये सौगात हर बार मिली है !कभी गूंगो की कभी बहरो की सरकार मिली है !! किसी में हुनर सुनने का, …

बार-बार – डी के निवातिया

बार-बार *** वो कौन है जो दिल को दुखाता है बार-बार !अश्क बहते नहीं दिल करहाता है बार-बार !! वफ़ा संग बेवफाई दस्तूर पुराना है जमाने काफिर क्यों दास्ताँ …

मेरी तन्हाई..मेरी नज़्म..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

मेरी तन्हाई आज यूं मुझसे मिल कर रोई….सखी बचपन की बिछड़ी मिली हो जैसे कोई…पल भर में ही हो गयी फिर से वो मेरी….गिला शिकवा लब पे रहा न …

दो दूना बाइस — डी के निवातिया

दो दूना बाईस — बेवजह में वजह ढूंढने की गुंज़ाइश चाहिये !काम हो न हो पर होने की नुमाइश चाहिये !! कौन कितना खरा है, किसमे कितनी खोट !पहले …

लफ्ज़ फिसलने लगे — डी के निवातिया

:””; लफ्ज़ फिसलने लगे ;””; +*””*.*””* + अधरों के पुष्प कँवल उनके खिलने लगे है !लगता है सनम से अब वो मिलने लगे है !! कुछ तो असर जरूर …

शायद….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

सपनों से निकल हकीकत तुम बन जाओ….चाँदनी बन मुझमें तुम कभी सिमट जाओ…रात रौशन हो जायेगी मेरी तुमसे ए सनम…आँचल से मुझपे तारों को छिटका जाओ…हो कहीं भी सहर …

लफ्ज़ मेरे — डी के निवातिया

लफ्ज़ मेरे *** लफ्ज़ मेरे एक रोज़ ज़माना बोल रहा होगारफ्ता रफ्ता सबके वो राज़ खोल रहा होगा !! ज्यों ज्यों पढ़े जायेंगे पन्ने उलझी डायरी केना जाने कितनो …

मुलाकात

मुलाकात…झुकी रहने दो मेरी पलकें आज,जो नजर उठाई तो ज़खम हरे हो जाऐगें ।दफन कर दो अपने सवालों को आज,जो लब खुले तो दर्द पुराने बयां हो जाएंगे।चंद लमहे …

नज़्म – तुम ही बोलो ….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

आज फिर तुमने, दिल मेरे पे, दस्तक दी है….मेरे बालों में, तेरी उँगलियों ने, हरकत की है…एक सिहरन सी, बदन मेरे में, लहराई है……ठहरे पानी में हलचल ने ली …

ढलता रहता हूँ — डी के निवातिया

ढलता रहता हूँ *** हर रोज़, दिन सा, ढलता रहता हूँ !बनके दिया सा, जलता रहता हूँ !! कोई चिंगारी कहे, कोई चिराग !  यूँ नजरो में, बदलता रहता …