Tag: मुक्तक

समंदर की तरह – डी के निवातिया

समंदर की तरह***पास होकर भी दूर कितने हम धरती अम्बर की तरहसाथ है मगर वर्ष की दुरी है जनवरी-दिसंबर की तरहन मिलते है कभी न बिछुड़ने का कोई बहाना …

क्या नाम दूँ – डी के निवातिया

क्या नाम दूँ *** तू जिस तरह मुझ में समाया इसे नाम खुमार दूँ क्या,तेरी खुशबु है की मिटती नहीं, अब बदन उतार दूँ क्या,जब-जब देखूं खुद, मेरा मुझ …

सियासतदार – डी के निवातिया

सियासतदार — सियासतदार सब बेशुमार बदजुबानी उतर गएछोड़के मझदार में खुद दूसरी राह से गुज़र गएऐतबार कोई करे भी तो कैसे करे बेईमानो कालगाके आग शहर में खुद की …

आड़ में – डी के निवातिया

समस्त राजनीतिक दलों को समर्पित आड़ में!ये तुम्हारा चुनाव आयोग जाये भाड़ मेंनियम कायदे क़ानून सब गए कबाड़ मेंसही गलत क्या है ये फैसला हम करेंगेचुनाव लड़ेंगे अपनी ताकत …

तन्हा – डी के निवातिया

तन्हा*** कहाँ चल दिये हमे तन्हा छोड़ केबेदर्दी से ये नाज़ुक दिल तोड़ केक्या रह पाओगे खुद भी चैन सेछोड़कर हमे ऐसे नाज़ुक मोड़ पे !!!!डी के निवातिया Оформить …

किनारा – डी के निवातिया

किनारा मझदार में टूटी कश्ती को किनारा नहीं मिलता,मन के अंधेरों में खोये को,उजियारा नहीं मिलतासंभलकर चल राही, अपने वक़्त को पहचानकरबीता हुआ लम्हा जिंदगी में दोबारा नहीं मिलता …

उल्फ़त – शिशिर मधुकर

झलक देखी मेरी तूने प्यार उसमें भी कर डालातेरे फूलों से लफ्जों ने मेरे दामन को भर डालामिला जब तक नहीं था तू मेरे मन में उदासी थी तेरी …

भँवर – डी के निवातिया

  भँवर से निकलूँ तो किनारा मिले, ज़िंदगी को जीने का सहारा मिलेबड़ी उलझन में है हर एक लम्हा काश किसी अपने का सहारा मिले !!!डी के निवातिया Оформить …

शराब बना दें – डी के निवातिया

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नया बवाल – डी के निवातिया

नया बवाल!न जाने लोगो ने जहन में क्या पाल रखा है,जिसे देखो सबके पास नया बवाल रखा है,फिक्रमंद जो दिखते ज्यादा मुल्क के लिएउन्होने ही फैला के तमाम ये …

नाम जुबां पे –

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दर्द किसी का – डी के निवातिया

दर्द किसी का कोई जब समझने लगेसमझो आदमियत उसकी जगने लगेशराफत के आसमान में कुहासा घना हैहैवानियत की गर्द भी कुछ छटने लगे !!!!डी के निवातिया Оформить и получить …

समीक्षा- डी के निवातिया

समीक्षा *** संसद की गलियां भी कुछ अब तंग होनी चाहिएहुक्मरानो के खिलाफ भी एक जंग होनी चाहिएहकीकत में जो पा रहे क्या सच में पाने लायक हैइसकी समीक्षा …

मर्यादा पुरुषोत्तम राम – डी के निवातिया

मर्यादा पुरुषोत्तम राम *** मेरे रोम रोम में बसने वाले रामतुमने सुधारें सबके बिगड़े कामसाक्षात् मर्यादा के तुम हो रक्षकतुम से सुबह मेरी तुम से शाम !! !डी के …

झलक – शिशिर मधुकर

झलक जब प्रेम की सच्चे किसी रिश्ते में मिलती हैकली डाली पे देखो तब यहाँ गुल बन के खिलती हैहवाओं का हसीं झोंका ज्यों ही छू कर गुजरता हैहर …

जी भर के इठलाती हूँ – शिशिर मधुकर

जब जब तुम पर मैं अपने अधिकारों को जतलाती हूँतुम मेरे हो सब लोगों को इस सच को ही बतलाती हूँमेरी बचकाना बातों पे जब भी तुम धीरे से …

कल्पना का कोई छोर नहीं – डी के निवातिया

कल्पना का कोई छोर नहींसृजन का इसके ठोर नहींबिना पंख यह उड़े गगन मेंइसके आगे कोई और नहीं !!!!!स्वरचित : डी के निवातिया Оформить и получить экспресс займ на …

तुम्हारी अदा – डी के निवातिया

तुम्हारी अदा***इतना प्यार करते हो, कभी न जताते हो तुमयदा कदा ही सही मगर, बहुत सतातें हो तुमकैसे न जां निसार करें हम तुम्हारी अदाओं पेबेवजह भी रूठें तो …

मुझसे जीया नहीं जाता – शिशिर मधुकर

तेरे बिन इस ज़माने में मुझसे जीया नहीं जाताज़हर का घूंट तन्हाई का भी ये पीया नहीं जातालाख चाहा मगर ये घाव दिल के रिसते जाते हैं किसी भी …

आईना तुम ज़रा देखो – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर तो ली तुमने मगर अब पैर खींचे हैं दर्द इतना हुआ सोचो आँख हम अब भी मींचे हैंआईना तुम ज़रा देखो खिली सूरत जो दिखती हैये गुल …

जनसंख्या विस्फोट – शिशिर मधुकर

जनसंख्या विस्फोट है एक वोट का सारा खेल भारत का इसके कारण ही निकल रहा है तेलजाहिल जनता आँखें मूंदे भार बढ़ाती जाती है और अधिक भारत भूमि अब …

बिना तेरे – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर जो ली तुमसे कहो अब मैं रुकूं कैसेफ़कत डर कर ज़माने से कहो अब मैं झुकूं कैसेबिना तेरे मेरे जीवन में कोई खुशियां ना रहती हैं पाऊँगा …

नारी -शिशिर मधुकर

नारी नारी सब करें पर दिखता ना नया विचार बाप के कंधों पे पैदा होते ही बढ़ जाता है भारबढ़ जाता है भार देखो तुम सामाजिक चतुराईबिन दहेज के …

मनवा तो हर पल पास था – शिशिर कुमार

मोहन भी दीवाने हो गए राधा में कुछ तो खास थादो बदन हों चाहे उनके मनवा तो हर पल पास थाहर व्यक्ति को हर व्यक्ति से प्रीत ना इतनी …