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कब समझेगा – डी के निवातिया

कब समझेगा वक़्त बता रहा है तुझको तेरी खामियां, पहचान ले अब तो अपनी नाकामिया, अब नहीं समझा तो क्या तब समझेगा, जब मिट जायेंगी जहां से तेरी निशानियां …

मंजर – डी के निवातिया

मंजर *** महामारी का ऐसा खंजर न देखा था हमने कभी इंसानी दिल इतना बंजर न देखा था हमने कभी, धरती रो रही है देखकर आज आसमान रो रहा …

निशानियां – डी के निवातिया

निशानियां *** वक़्त बता रहा है तुझको तेरी खामियां, पहचान ले अब तो अपनी नाकामिया, अब नहीं समझा तो क्या तब समझेगा, जब मिट जायेंगी तेरी सभी निशानियां !! …

नाम कर देंगे – डी के निवातिया

नाम कर देंगे *** याद रखेगा जमाना ऐसा काम कर देंगे ये जिन्दगी अपनी तुम्हारे नाम कर देंगे हम जियेंगे और मरेंगे बस इक तेरे लिए ऐलान इस बात …

सुरूर अच्छा नहीं होता – डी के निवातिया

सुरूर अच्छा नहीं होता *** हुस्न पर शबाब का सुरूर अच्छा नहीं होता, खूबसूरती पर करना गुरुर अच्छा नहीं होता, पानी के बुलबुले की तरह होती है ये जिंदगी, …

कब समझोगे – डी के निवातिया

अभी नहीं तो कब समझोगे, आज नहीं तो कल समझोगे, शाशक  शेर  भूखा गुर्राता है, खा जाएगा जब  समझोगे !! *** डी के निवातिया

हुनर- डी के निवातिया

हुनर *** छोटी छोटी बातों पर अपनों से गिला क्या, इश्क मुहब्बत में हुई बातों का सिला क्या, झुकने का हुनर जरूरी है यहां जीने के लिए, अड़कर पर्वत …

रूह का लिबास – डी के निवातिया

रूह का लिबास *** साँसों की गर्म हवा बर्फ सी जमने लगे, लबों से हर्फ़ जर्जर पेड़ से हिलने लगे, रूह ! तुम लिबास बदल लेना उस रोज़, जिस …

मदारी या फ़रेबी – डी के निवातिया

मदारी या फ़रेबी *** मदारी हर दफ़ा कोई नया खेला रचाता है फँसाकर जाल में अपने हमें बुद्धू बनाता है सुई की छेद में हाथी घुसाता है सुना हूँ …

सरकारें – डी के निवातिया

सरकारें ! सरकारों में पंगे है या पंगो की सरकारें है सरकारों में गुंडे है या गुंडों की सरकारें है हकीकत से हमेशा मुहँ छुपाते है ये लोग, सरकारों …

लगी जो आग इस ज़माने में ।

लगी जो आग इस ज़माने में वो बुझे कैसे, उठी दीवार ये जो दरमिया गिरे कैसे। दरारे पड़ रही बचपन की मुस्कुराहटों के बीच, बढ़ रहीं दूरियां दिल की, …

ज़ाम-ऐ-शराब – डी के निवातिया

ज़ाम-ऐ-शराब *** इश्क में हमे न वफ़ा का गुलाब चाहिए,ख़िदमत में न दावत-ऐ-क़बाब चाहिए !हम तो आशिक, मजनूं, दिवाने यार है,उनकी आँखों से ज़ाम-ऐ-शराब चाहिए !! *** स्वरचित – …

निर्भया के न्याय पर 3 कुण्डलियाँ

(१.) आशा देवी रो पड़ी, रोये बद्रीनाथबिटिया तेरी मौत ने, किया कुठाराघातकिया कुठाराघात, ज़ालिमों ने तड़पायासात बरस के बाद, न्याय बेटी ने पायामहावीर कविराय, हर क़दम मिली निराशाक़ानूनी षड्यंत्र, …

गुनाहग़ार – डी के निवातिया

गुनाहग़ार!मानता हूँ इस बात के लिए मैं गुनाहग़ार हूँ,तेरे अनमोल दो घडी वक़्त का तलबगार हूँ,कोई असीम दौलत तो नहीं मांगी थी तुझसे,फिर क्यों तेरी नज़रो में हुआ मैं …

गुमान – डी के निवातिया  

गुमान! कुछ साथ लाये थे ना साथ ले जाना है,जिस हाल आये थे उस हाल में जाना है,फिर किस बात का गुमान करते हो यारोजिस देह में आये थे, …

रिश्ता – शिशिर मधुकर

ये रिश्ता बन गया ना तोड़ना अब हाथ है मेरे तेरी खुशबू मेरी सांसों में घुल के साथ है मेरे नहीं मुझको पता औरों ने तुझको क्या जगह बख्शी …

वक़्त की चाल – डी के निवातिया

वक़्त की चाल *** जो आज वफ़ा की दुहाई देते है, कौन जाने ये कब बेवफा हो जाएंगे !जो आज बेवफा है चोला बदलकर, वफादार के भेष में नजर …

बीत गए सो बीत गए – डी के निवातिया

बीत गए सो बीत गए *** दिन महीने साल बीत गए सो बीत गए,कुछ पलों से हारे, हम, कुछ से जीत गए, वक़्त की धारा में, बहती जाए जीवन …

सोचा न था – डी के निवातिया

सोचा न था !सोचा न था एक रोज़ इस मोड़ से गुजरना पड़ेगा, जिंदगी को मौत से पल-पल खातिर लड़ना पड़ेगा,चलते-चलते लड़खड़ा जाएंगे पग कठिन राहो में फिर गिरते-गिरते …

दास्ताँ – डी के निवातिया

चलते आ रहे जिस पर हम वो राह पुरानी हैमिलेंगे हमसफ़र अपने यही ये चाह पुरानी है बीते लम्हो में, नीरस, कितनी उम्र गुजारी हैदास्ताँ हर एक पल कि …