Tag: मुक्तक

रूह का लिबास – डी के निवातिया

रूह का लिबास *** साँसों की गर्म हवा बर्फ सी जमने लगे, लबों से हर्फ़ जर्जर पेड़ से हिलने लगे, रूह ! तुम लिबास बदल लेना उस रोज़, जिस …

मदारी या फ़रेबी – डी के निवातिया

मदारी या फ़रेबी *** मदारी हर दफ़ा कोई नया खेला रचाता है फँसाकर जाल में अपने हमें बुद्धू बनाता है सुई की छेद में हाथी घुसाता है सुना हूँ …

सरकारें – डी के निवातिया

सरकारें ! सरकारों में पंगे है या पंगो की सरकारें है सरकारों में गुंडे है या गुंडों की सरकारें है हकीकत से हमेशा मुहँ छुपाते है ये लोग, सरकारों …

लगी जो आग इस ज़माने में ।

लगी जो आग इस ज़माने में वो बुझे कैसे, उठी दीवार ये जो दरमिया गिरे कैसे। दरारे पड़ रही बचपन की मुस्कुराहटों के बीच,बढ़ रहीं दूरियां दिल की, ये …

ज़ाम-ऐ-शराब – डी के निवातिया

ज़ाम-ऐ-शराब *** इश्क में हमे न वफ़ा का गुलाब चाहिए,ख़िदमत में न दावत-ऐ-क़बाब चाहिए !हम तो आशिक, मजनूं, दिवाने यार है,उनकी आँखों से ज़ाम-ऐ-शराब चाहिए !! *** स्वरचित – …

निर्भया के न्याय पर 3 कुण्डलियाँ

(१.) आशा देवी रो पड़ी, रोये बद्रीनाथबिटिया तेरी मौत ने, किया कुठाराघातकिया कुठाराघात, ज़ालिमों ने तड़पायासात बरस के बाद, न्याय बेटी ने पायामहावीर कविराय, हर क़दम मिली निराशाक़ानूनी षड्यंत्र, …

गुनाहग़ार – डी के निवातिया

गुनाहग़ार!मानता हूँ इस बात के लिए मैं गुनाहग़ार हूँ,तेरे अनमोल दो घडी वक़्त का तलबगार हूँ,कोई असीम दौलत तो नहीं मांगी थी तुझसे,फिर क्यों तेरी नज़रो में हुआ मैं …

गुमान – डी के निवातिया  

गुमान! कुछ साथ लाये थे ना साथ ले जाना है,जिस हाल आये थे उस हाल में जाना है,फिर किस बात का गुमान करते हो यारोजिस देह में आये थे, …

रिश्ता – शिशिर मधुकर

ये रिश्ता बन गया ना तोड़ना अब हाथ है मेरे तेरी खुशबू मेरी सांसों में घुल के साथ है मेरे नहीं मुझको पता औरों ने तुझको क्या जगह बख्शी …

वक़्त की चाल – डी के निवातिया

वक़्त की चाल *** जो आज वफ़ा की दुहाई देते है, कौन जाने ये कब बेवफा हो जाएंगे !जो आज बेवफा है चोला बदलकर, वफादार के भेष में नजर …

बीत गए सो बीत गए – डी के निवातिया

बीत गए सो बीत गए *** दिन महीने साल बीत गए सो बीत गए,कुछ पलों से हारे, हम, कुछ से जीत गए, वक़्त की धारा में, बहती जाए जीवन …

सोचा न था – डी के निवातिया

सोचा न था !सोचा न था एक रोज़ इस मोड़ से गुजरना पड़ेगा, जिंदगी को मौत से पल-पल खातिर लड़ना पड़ेगा,चलते-चलते लड़खड़ा जाएंगे पग कठिन राहो में फिर गिरते-गिरते …

दास्ताँ – डी के निवातिया

चलते आ रहे जिस पर हम वो राह पुरानी हैमिलेंगे हमसफ़र अपने यही ये चाह पुरानी है बीते लम्हो में, नीरस, कितनी उम्र गुजारी हैदास्ताँ हर एक पल कि …

बिन बुलाएं – डी के निवातिया

बिन बुलाएं तेरे शहर में आता रहूंगा, नाम लबों से तेरा गुनगुनाता रहूंगा ! तूने सिखाये थे रिश्ते नातो के बंधन, वो रस्म-ओ-रिवाज़ निभाता रहूंगा !! ! डी के …

कलयुग की महिमा – डी के निवातिया

कलयुग की महिमा!झूठ का बोलबाला सच का मुँह काला हुआ,कलयुग की महिमा में गड़बड़ झाला हुआ,वक़्त मिले तो आज़मा लेना सच बोलकर,कुत्ता काट लेगा तुम्हे खुद का पाला हुआ …

दस्तक – डी के निवातिया

दस्तक!मेरे दिल के दरवाज़े दस्तक देकर, छुप जानातेरी आवाज़ सुनकर इन साँसों का रुक जानायूँ गुजरते है जिंदगी के पल तेरी ही इबादत मेंतेरा नाम आते ही सदके सिर …

सुकून – डी के निवातिया

सुकून!मेरे दिल को भी सुकून मिलेगा एक दिन,मेरे दिल में भी गुलाब खिलेगा एक दिन,बस थोड़ी सी प्रेम की फुहार को बरसने दो,सोंधी-सोंधी मिटटी सा महकेगा एक दिन ! …

मंज़ूर अरदास करा दे – डी के निवातिया

मंज़ूर अरदास करा दे *** रब की इबादत गाह में मंज़ूर अरदास करा देअपनी पहली सी मुहब्बत का अहसास करा देऊब चुका हूँ अब इस बेरंग, नीरस जिंदगी सेमुझे …

बेवजह- डी के निवातिया

बेवजह! किसी के बीच में टंगड़ी अड़ाना नहीं आता,मुझे बेवजह में पंख फड़फड़ाना नहीं आता,शायद यही एक कमी, मुझमे जिस कारण,लोगो को पसंद मेरा दर खटखटाना नहीं आता !! …

खेल सियासत का -डी के निवातिया

खेल सियासत का! न खेल मेरे संग ये खेल सियासत कासच्चा होता नहीं है मेल सियासत काजहाँ मतलब में सब कुछ जायज़ हो नहीं चाहिए ऐसा बे-मेल सियासत का …

बाली उम्र – डी के निवातिया

बाली उम्र *** ये किस मोड़ पे जिंदगी ने खड़ा कर दियाबाली उम्र में हमे तज़ुर्बे से बड़ा कर दियाउम्र अठखेलियों की न जाने कब बीत गईनरम हाथों को …

आबरू – डी के निवातिया

आबरू***मुझे मंदिर में पूजा, किसी ने मयखाने मेंफिर भी बस न पाई दिल के आशियाने में,आबरू लुटती रही, मै दर दर भटकती रही,किसी को तरस न आया बेदर्द जमाने …