Tag: जीवन- दर्शन

जड़ चेतन – डी के निवातिया

जड़ चेतन *** मैं तो जड़ हूँ पर तुम तो चेतन हो, सँवार लो तुम, दे परिचय प्रबुद्धता का, तराश लो मुझे, अपने मन माफिक, कायम कर दो, गूढ़ता …

ज़िन्दगी के काले पन्ने

काली अंधेरी रात, आसमान में कड़कड़ाती हुई बिजली के साथ मूसलाधार बारिश और पेड़ को जड़ से उखाड़ देने वाली आंधी चल रही थी। वरुण घर के बरामदे में …

मैं क्या हूँ ? { श्रमिक वर्ग की वेदना }

दिखने में तो इंसान हूँ ,मगर क्या वास्तव में इंसान हूँ ?न दिल अपना ,न दिमाग अपना ,जो जिधर कहे वहीं चला जाता हूँ ।कभी गाँव से शहर की …

और कितनी चाहिए तुम्हें आज़ादी ? (कविता)

आज़ादी ! आज़ादी !आज़ादी !,बस रट लगा रखी है ‘आज़ादी ‘।इस लफ्ज की गहराई जानते हो ?आखिर क्या है यह आज़ादी ?ऊंची सोच और विशाल ह्रदय ,सयमित जीवन है …

पतंग…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

पतंग…एक लफ्ज़…या…ज़िन्दगी का गूढ़ रहस्य…हमेशा मेरे विचारों में….उथल पुथल मचाता रहा…खंगालता रहा मुझे…और मैं…उड़ता रहा….भावों के पंखों पे सवार…जानने के लिए…पतंग उड़ती कैसे है… स्वछन्द…कैसा लगता होगा…इसे…अबोधपन कहो या …

कल्पना – डी के निवातिया

आऒ जानें ….कल्पना क्या है ……….!!***प्रत्यक्षानात्मक अनुभवों की ये कुँजी हैबिंबों और सृजन विचारों की ये पूँजी हैविचारणात्मक स्तर की रचनात्मकता’कल्पना’ नियोजन पक्ष की है रोचकता !!दिवास्वप्न व मानसिक …

जय जयति नन्द के लाल…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जय जयति नन्द के लाल मदन गोपाल मेरे मन हरण…संग राधा मन मेरे बसहु कृपा करो राधा रमण….सर मोर मुकुट कपाल शशि बिम्ब सुन्दर अति सुंदरम…कदम्ब कुण्डल कर्ण शोभित …

विनाशकारी कलयुग ( कविता)

कलयुग का यह विनाशकारी रूप ,हमारा भाग्य हमें दिखा रहा .विकास का चेहरा दिखाते हुए ,इसका कदम तो पतन की ओर बढ़ रहा .ज्ञानियों से सूना था इसका बखान …

हरी रहने दो ये धरती – अनु महेश्वरी

वृक्षो को रख, हरी रहने दो ये धरती,मत उजाड़ो, अपने मतलब से सृष्टि,विकास के नाम, चमन को जो उजाड़ाबंजर हुई धरा, तो कैसे होगा गुजारा।सूरज की तपती धूप को …

माँ – अनु महेश्वरी

माँ होती है ममता की मूरत,उससे प्यारी न कोई सूरत।बच्चों के सुख में जिसे खुशी है मिलती,उसके मुख से आशीष की धारा है बहती।बच्चों के खातिर जो हर पीड़ा …

वक़्त – अनु महेश्वरी

गुरुर किस बात का करते हो तुम,गुरुर किस बात का करते हो तुम,आज अगर हो मिट्टी के ऊपर तो,कल हो जाओगे मिट्टी में विलीन|वक़्त निकाल, अपनों से करो बाते …

जीना, समझने की है बात – अनु महेश्वरी 

नज़र नज़र का है फेर,देखने में ही सब भेद,किसी को दिखे, भरा है आधा,तो किसी को दिखे, आधा है खाली|नज़रिये का ही तो खेल है सब,जीना, समझने की है …

ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी ने हैरान, सभी को है किया,हर पल बदलता, लोगो का नज़रिया,किसी ने इसे, जीकर है समझा,किसी ने इसे, समझ के है जिया|अनु महेश्वरीचेन्नई Оформить и получить экспресс займ …

मैं नादान हूँ – अनु महेश्वरी

अब भी गिरती हूँ,फिर संभलती हूँ,फिर उठती हूँ,फिर चल पड़ती हूँ,मैं नादान हूँ|अब भी गलतियां करती हूँ,फिर कुछ सीखती हूँ,फिर नए सपने बुनती हूँ,फिर आगे बढ़ जाती हूँ,मैं नादान …

नादान हूँ – अनु महेश्वरी

अब भी गिरती हूँ,फिर संभलती हूँ,फिर उठती हूँ,फिर चल पड़ती हूँ,मैं नादान हूँ|अब भी गलतियां करती हूँ,फिर कुछ सीखती हूँ,फिर नए सपने बुनती हूँ,फिर आगे बढ़ जाती हूँ,मैं नादान …